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गन्ना, धान, चारे पर एफएडब्ल्यू कीट का खतरा, अलर्टरा, अलर्ट
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गन्ना, धान, चारे पर एफएडब्ल्यू कीट का खतरा, अलर्ट
हापुड़। गन्ना, धान, चारे की फसल पर फाल आर्मी वोर्म (एफएडब्ल्यू) का खतरा है। कन्नौज, इटावा, मैनपुरी में इसके प्रकोप को लेकर हापुड़ में अलर्ट कर दिया गया है। शुरूआत में ही कीट पर नियंत्रण कारगर है, उपचार में देरी से कीट तेजी से फसलों को चट करता है। जिला कृषि अधिकारी ने एडवाइजरी जारी कर किसानों को जागरूक करने के लिए विभागीय कर्मियों को निर्देशित किया है।
जिला कृषि अधिकारी मनोज कुमार के अनुसार एफएडब्ल्यू एक बहुभोजीय कीट है, जो मक्का, ज्वार, बाजरा, धान, गेहूं, गन्ना की फसलों को नुकसान पहुंचाता है। इस कीट की मादा ज्यादातर पत्तियों के निचले स्तर पर अंडे देती हैं, अंडे धूसर से हरे व भूरे रंग के होते हैं। लार्वा अवस्था में पीठ के नीचे तीन पतली सफेद धारियों और सिर पर एक अलग सफेद उल्टा अंग्रेजी शब्द का वाई दिखता है।
यह कीट पौधे के डंठल में अंदर घुसकर अपना भोजन प्राप्त करता है। इस कीट के प्रकोप की पहचान फसल की बढ़वार की अवस्था में जैसे पत्तियों को खुरचकर खाने से पारदर्शी झिल्ली का बनना, पत्तियों में छिद्र व कीट के मल मूत्र से पहचाना जा सकता है, मल महीन भूसे के बुरादे जैसा दिखाई देता है।
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उन्होंने बताया कि इस कीट से फसलों के बचाव के लिए फसल की प्रारंभिक अवस्था में बालू एवं चूना को 9:1 अनुपात में प्रभावित पौधों के गोभ में बुरकाव करना लाभकारी होता है। अंडपरजीवी 2-5 ट्राईकोग्रामा कार्ड एवं टेलोनोमस रेमस का प्रयोग अंडे दिए जाने की अवस्था में करने से संख्या बढ़ोत्तरी पर रोक लगती है। एनपीवी 250 एलई, मेटाराजियम एनिप्सोली, नोमेरिया रिलाई, ब्यूवेरिया बैसियाना एवं वेनीसिलिटेम लेकानी जैविक कीटनाशकों का प्रारंभिक अवस्था में ही समय से प्रयोग अत्यंत प्रभावशाली है।
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हापुड़। गन्ना, धान, चारे की फसल पर फाल आर्मी वोर्म (एफएडब्ल्यू) का खतरा है। कन्नौज, इटावा, मैनपुरी में इसके प्रकोप को लेकर हापुड़ में अलर्ट कर दिया गया है। शुरूआत में ही कीट पर नियंत्रण कारगर है, उपचार में देरी से कीट तेजी से फसलों को चट करता है। जिला कृषि अधिकारी ने एडवाइजरी जारी कर किसानों को जागरूक करने के लिए विभागीय कर्मियों को निर्देशित किया है।
जिला कृषि अधिकारी मनोज कुमार के अनुसार एफएडब्ल्यू एक बहुभोजीय कीट है, जो मक्का, ज्वार, बाजरा, धान, गेहूं, गन्ना की फसलों को नुकसान पहुंचाता है। इस कीट की मादा ज्यादातर पत्तियों के निचले स्तर पर अंडे देती हैं, अंडे धूसर से हरे व भूरे रंग के होते हैं। लार्वा अवस्था में पीठ के नीचे तीन पतली सफेद धारियों और सिर पर एक अलग सफेद उल्टा अंग्रेजी शब्द का वाई दिखता है।
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यह कीट पौधे के डंठल में अंदर घुसकर अपना भोजन प्राप्त करता है। इस कीट के प्रकोप की पहचान फसल की बढ़वार की अवस्था में जैसे पत्तियों को खुरचकर खाने से पारदर्शी झिल्ली का बनना, पत्तियों में छिद्र व कीट के मल मूत्र से पहचाना जा सकता है, मल महीन भूसे के बुरादे जैसा दिखाई देता है।
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उन्होंने बताया कि इस कीट से फसलों के बचाव के लिए फसल की प्रारंभिक अवस्था में बालू एवं चूना को 9:1 अनुपात में प्रभावित पौधों के गोभ में बुरकाव करना लाभकारी होता है। अंडपरजीवी 2-5 ट्राईकोग्रामा कार्ड एवं टेलोनोमस रेमस का प्रयोग अंडे दिए जाने की अवस्था में करने से संख्या बढ़ोत्तरी पर रोक लगती है। एनपीवी 250 एलई, मेटाराजियम एनिप्सोली, नोमेरिया रिलाई, ब्यूवेरिया बैसियाना एवं वेनीसिलिटेम लेकानी जैविक कीटनाशकों का प्रारंभिक अवस्था में ही समय से प्रयोग अत्यंत प्रभावशाली है।