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Hapur News: पारा चढ़ने से बढ़े फंगल इंफेक्शन के मरीज
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संवाद न्यूज एजेंसी
हापुड़। गर्मियों शुरू होने के साथ ही फंगल इंफेक्शन मरीजों में फैलने लगा है। त्वचा रोग विशेषज्ञों की ओपीडी में आने वाले मरीज एक साल से रोग ठीक नहीं होने की समस्या लेकर पहुंच रहे हैं। जांच में मरीजों द्वारा दवा का कोर्स पूरा न किए जाने से बीमारी बार बार उबरने का कारण सामने आया। इसके अलावा सन बर्न के मरीज ओपीडी में पहुंचने लगे हैं। सीएचसी और जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन करीब 280 त्वचा रोगी पहुंच रहे हैं।
चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ.अमरजीत सिंह ने बताया कि त्वचा रोग गर्मी और बरसात आने पर बढ़ जाता है। फंगल इंफेक्शन सबसे पहले शरीर के पसीना रुकने वाले स्थानों पर अधिक होता है, जैसे बगल, जांघ, छाती का निचला भाग और उंगलियों का बीच। दवाओं के सेवन से बीमारी पूरी तरह ठीक हो जाती है।
ओपीडी में आने वाले मरीजों में बहुत से ऐसे हैं जो एक साल से ठीक नहीं हो पाए। ऐसे मरीजों से जानकारी की तो बताया कि एक से दो सप्ताह दवा खाकर छोड़ दी, फिर बीमारी हुई तो फिर दवा खायी। उन्होंने बताया कि फंगल के चक्र को तोड़ने के लिए एक से डेढ़ महीने का कोर्स जरूरी होता है। इसके बाद फंगल के होने की संभावना कम हो जाती है।
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साथ ही करीब 30 फीसदी मरीज स्केबीज के हैं। इन मरीजों को उंगलियों के बीच, चेहरे पर या शरीर के अन्य जगहों पर दाने बन जाते हैं। डॉ.अमरजीत ने मरीजों को सलाह दी है कि त्वचा रोगों से बचने को योग्य चिकित्सक से इलाज कराएं। पसीना आने वाले शहरी के स्थानों को सूखा रखें, जिसके लिए पाउडर का इस्तेमाल करें।
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हापुड़। गर्मियों शुरू होने के साथ ही फंगल इंफेक्शन मरीजों में फैलने लगा है। त्वचा रोग विशेषज्ञों की ओपीडी में आने वाले मरीज एक साल से रोग ठीक नहीं होने की समस्या लेकर पहुंच रहे हैं। जांच में मरीजों द्वारा दवा का कोर्स पूरा न किए जाने से बीमारी बार बार उबरने का कारण सामने आया। इसके अलावा सन बर्न के मरीज ओपीडी में पहुंचने लगे हैं। सीएचसी और जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन करीब 280 त्वचा रोगी पहुंच रहे हैं।
चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ.अमरजीत सिंह ने बताया कि त्वचा रोग गर्मी और बरसात आने पर बढ़ जाता है। फंगल इंफेक्शन सबसे पहले शरीर के पसीना रुकने वाले स्थानों पर अधिक होता है, जैसे बगल, जांघ, छाती का निचला भाग और उंगलियों का बीच। दवाओं के सेवन से बीमारी पूरी तरह ठीक हो जाती है।
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ओपीडी में आने वाले मरीजों में बहुत से ऐसे हैं जो एक साल से ठीक नहीं हो पाए। ऐसे मरीजों से जानकारी की तो बताया कि एक से दो सप्ताह दवा खाकर छोड़ दी, फिर बीमारी हुई तो फिर दवा खायी। उन्होंने बताया कि फंगल के चक्र को तोड़ने के लिए एक से डेढ़ महीने का कोर्स जरूरी होता है। इसके बाद फंगल के होने की संभावना कम हो जाती है।
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साथ ही करीब 30 फीसदी मरीज स्केबीज के हैं। इन मरीजों को उंगलियों के बीच, चेहरे पर या शरीर के अन्य जगहों पर दाने बन जाते हैं। डॉ.अमरजीत ने मरीजों को सलाह दी है कि त्वचा रोगों से बचने को योग्य चिकित्सक से इलाज कराएं। पसीना आने वाले शहरी के स्थानों को सूखा रखें, जिसके लिए पाउडर का इस्तेमाल करें।