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पद्मावति से अंजान, खोज रहे गूगल और किताबों में ज्ञान

Sun, 26 Nov 2017 01:06 AM IST
Updated Sun, 26 Nov 2017 01:06 AM IST
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पद्मावति से अंजान, खोज रहे गूगल और किताबों में ज्ञान
फोटो संख्या 25एचपीआर पीएच- 06, 07
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पद्मावति से अंजान, गूगल और किताबों से जुटा रहे जानकारी
-पद्मापति पर जारी बहस के बाद सही इतिहास खंगालने में जुटे युवा
-पुस्तकालय और नेट पर कहानी का सच जानने की लगी है होड़
नितिन दीक्षित
हापुड़। इस समय रानी पद्मावती पर आधारित बनी फिल्म सबसे गर्म मुद्दा है। फिल्म को लेकर जारी विवादों के कारण हर कोई रानी पद्मावती के बारे में जानने को उत्सुक है। इसके लिए युवा न सिर्फ पुस्तकों की खोज कर रहे, बल्कि गूगल पर सर्च करने का सिलसिला जारी है। किताब और इंटरनेट पर मिल रही जानकारियों से युवा अपनी जिज्ञासा शांत करने का प्रयास कर रहे हैं।
फिल्म पद्मावती में रानी के किरदार को लेकर खूब हो हल्ला हो रहा है। राजपूज समाज के साथ कुछ अन्य वर्गों ने भी इस फिल्म का विरोध किया है। इस विरोध ने लोगों खासकर युवाओं के अंदर यह उत्सुकता जगा दी है कि आखिर रानी पद्मावती और अलाउद्दीन खिलजी का सच क्या था। ऐसे में युवा इंटरनेट पर पद्मावती से जुड़े तथ्यों की जानकारी जुटाकर अपनी जिज्ञासा शांत कर रहे हैं।
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इसके लिए पुस्तकालयों का भी सहारा लिया जा रहा है। एसएसवी डिग्री कालेज के लाइब्रेरियन अरुण कुमार का कहना है कि पद्मावती की जानकारी से जुड़े तथ्यों की जानकारी जुटाने के लिए युवाओं में क्रेज है।
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युवा रानी पद्मावती व अलाउद्दीन खिलाजी के बारे में जानने की कोशिश कर रहे हैं। मलिक मुहम्मद जायसी की रचना पद्मावत में चित्तौड़ के राजा रतन सिंह सहित अन्य के बारे में बताया गया है। हालांकि अधिकतर पुस्तकालयों में यह पुस्तक नहीं है जिससे लोगों में मायूसी है।
पुस्तक विक्रेता चिराग गुप्ता का कहना है कि रानी पद्मावती से जुड़ी किताबों की काफी मांग है। प्रतियोगी परीक्षाओं में इससे जुड़े सवाल आ सकते हैं, इसलिए कंप्टीशन की तैयारी की जा रही है।
इतिहासकार व एसएसवी कालेज के प्रवक्ता हरीश कुमार का कहना है कि मलिक मुहम्मद जायसी ने किताब पद्मावत की रचना सन 1540 में की थी। इसमें दिए गए तत्थों को अधिकतर इतिहासकार मनगढ़ंत मानते हैं। उनका कहना है कि अलाउद्दीन के समकालीन लोग व अन्य पुराने इतिहासकारों ने इस प्रकार की कथा का कहीं उल्लेख नहीं किया है। जबकि इसी रचना की कहानी पर फिल्म का निर्माण माना गया है। इतिहासकारों का इस मुद्दे पर अलग-अलग मत है। रानी पद्मावती को उनके जौहर के लिए जाना जाता है। इतिहास में भी इसका जिक्र है।

ये कथा है प्रचलित --
इतिहास की किताबों के अनुसार पद्मावति के रूप के बखान से प्रभावित सुल्तान अलाउ्ददीन खिलजी ने 1303 ई. में एक विशाल सेना के साथ चितौड़ पर हमला कर दिया था। चारों ओर से पहाड़ियों से घिरे होने के कारण खिलजी पांच महीने तक चितौड़ को घेरे रहा। आखिरकार रक्तपात रोकने की मंशा से राणा रत्न सिंह रानी पद्मावति का अक्श दर्पण में दिखाने को राजी हो गया। रानी का अक्श देखकर खिलजी अपनी विशाल सेना के साथ वापस लौटने लगा, लेकिन रत्न सिंह खिलजी को विदा करने किले से बाहर आ गया। इस दौरान खिलजी ने उसे बंदी बना लिया। उसके बाद हुए कत्लेआम में रत्न सिंह सहित राजपूत योद्धा मारे गए और पद्मावति जौहर हो गयी थी।
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