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जिले के 3830 किसानों का 17 करोड़ रुपये ब्याज होगा माफ
Updated Fri, 06 Apr 2018 12:05 AM IST
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जिले के 3830 किसानों का 17 करोड़ रुपये ब्याज होगा माफ
हापुड़। जिले के तीन सहकारी भूमि विकास बैंक से जुड़े 3830 किसानों को बड़ी सौगात मिलने जा रही है। इन किसानों का करीब 17 करोड़ रुपये का ब्याज माफ होगा। किसानों पर कुल बकायेदारी 34 करोड़ की है। शासन से ओटीएस योजना को हरी झंडी मिलते ही बैंक अफसरों ने किसानों की सूची श्रेणीवार तैयार करनी शुरू कर दी है।
जिले में भूमि विकास बैंक की तीन शाखाएं हापुड़, पिलखुवा व गढ़मुक्तेश्वर में है। इन बैंकों से किसानों को लंबे समय के लिए (दीर्घकालीन) ऋण दिया जाता है। यह ऋण डेयरी योजना, कुक्कुट विकास योजना, पशुपालन, कृषि के लिए दिया जाता है। बीते दो दशक में इन बैंकों से हजारों किसानों ने ऋण लिया था, लेकिन करीब 3830 किसान ऐसे हैं जो डिफाल्टर की श्रेणी में पहुंच चुके हैं।
काफी समय बाद भी वह ऋण का पैसा जमा नहीं कर पाए हैं। इन किसानों को शासन ने ऋण मोचन योजना के दायरे में नहीं लिया था। हालांकि सहकारी मंत्री मुकुट विहारी वर्मा ने बुधवार को एकमुश्त समाधान योजना को हरी झंडी दे दी है।
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उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि एक अप्रैल 1997 से पहले जिन किसानों का ऋण है, उन्हें सिर्फ मूलधन ही जमा करना होगा, ब्याज पूरी तरह माफ होगा। वहीं एक अप्रैल 1997 से 31 मार्च 2007 के बीच जिन किसानों ने ऋण लिया है उन्हें मूलधन के बराबर ही ब्याज देना होगा। इस तरह तीन श्रेणियों में किसानों को बांटा जाना है।
जिला भूमि विकास बैंक के प्रबंधक आशुतोष मिश्रा ने बताया कि जिले की तीनों शाखाओं से करीब 3830 किसानों ने दीर्घकालीन ऋण लिया हुआ है। इन किसानों द्वारा लिए 17 करोड़ के मूलधन पर करीब 17 करोड़ रुपये ही ब्याज लग रहा है। ऐसे में कुल 3830 किसानों पर बैंकों का करीब 34 करोड़ रुपये बकाया है। शासन से जिस तरह निर्देश मिले हैं, किसानों को श्रेणीवार बांटा जा रहा है।
2012 में बहुत कम किसानों को मिला था लाभ
वर्ष 2012 में सपा सरकार ने भूमि विकास बैंक के 50 हजार रुपये तक वाले किसानों का ऋण माफ किया था, लेकिन अधिकांश किसान 50 हजार से अधिक बकायेदारी के थे। इस कारण करीब 200 किसानों को ही ऋण माफी का लाभ मिल सका था।
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हापुड़। जिले के तीन सहकारी भूमि विकास बैंक से जुड़े 3830 किसानों को बड़ी सौगात मिलने जा रही है। इन किसानों का करीब 17 करोड़ रुपये का ब्याज माफ होगा। किसानों पर कुल बकायेदारी 34 करोड़ की है। शासन से ओटीएस योजना को हरी झंडी मिलते ही बैंक अफसरों ने किसानों की सूची श्रेणीवार तैयार करनी शुरू कर दी है।
जिले में भूमि विकास बैंक की तीन शाखाएं हापुड़, पिलखुवा व गढ़मुक्तेश्वर में है। इन बैंकों से किसानों को लंबे समय के लिए (दीर्घकालीन) ऋण दिया जाता है। यह ऋण डेयरी योजना, कुक्कुट विकास योजना, पशुपालन, कृषि के लिए दिया जाता है। बीते दो दशक में इन बैंकों से हजारों किसानों ने ऋण लिया था, लेकिन करीब 3830 किसान ऐसे हैं जो डिफाल्टर की श्रेणी में पहुंच चुके हैं।
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काफी समय बाद भी वह ऋण का पैसा जमा नहीं कर पाए हैं। इन किसानों को शासन ने ऋण मोचन योजना के दायरे में नहीं लिया था। हालांकि सहकारी मंत्री मुकुट विहारी वर्मा ने बुधवार को एकमुश्त समाधान योजना को हरी झंडी दे दी है।
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उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि एक अप्रैल 1997 से पहले जिन किसानों का ऋण है, उन्हें सिर्फ मूलधन ही जमा करना होगा, ब्याज पूरी तरह माफ होगा। वहीं एक अप्रैल 1997 से 31 मार्च 2007 के बीच जिन किसानों ने ऋण लिया है उन्हें मूलधन के बराबर ही ब्याज देना होगा। इस तरह तीन श्रेणियों में किसानों को बांटा जाना है।
जिला भूमि विकास बैंक के प्रबंधक आशुतोष मिश्रा ने बताया कि जिले की तीनों शाखाओं से करीब 3830 किसानों ने दीर्घकालीन ऋण लिया हुआ है। इन किसानों द्वारा लिए 17 करोड़ के मूलधन पर करीब 17 करोड़ रुपये ही ब्याज लग रहा है। ऐसे में कुल 3830 किसानों पर बैंकों का करीब 34 करोड़ रुपये बकाया है। शासन से जिस तरह निर्देश मिले हैं, किसानों को श्रेणीवार बांटा जा रहा है।
2012 में बहुत कम किसानों को मिला था लाभ
वर्ष 2012 में सपा सरकार ने भूमि विकास बैंक के 50 हजार रुपये तक वाले किसानों का ऋण माफ किया था, लेकिन अधिकांश किसान 50 हजार से अधिक बकायेदारी के थे। इस कारण करीब 200 किसानों को ही ऋण माफी का लाभ मिल सका था।