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इस बार कड़ाके की ठंड को रहे तैयार
Updated Tue, 14 Nov 2017 11:39 PM IST
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इस बार कड़ाके की ठंड झेलने को रहें तैयार
हापुड़। भयंकर गर्मी और धुंध के बाद अबकी हाड़ कंपकंपाने वाली सर्दी के लिए भी आप तैयार रहिये। इस बार पिछले साल की अपेक्षा कड़ाके की ठंड पड़ेगी। इस माह के तीसरे सप्ताह से इसका असर भी दिखना शुरू हो जाएगा। पश्चिमी उतर प्रदेश के जिलों में न्यूनतम तापमान तीन-चार डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। इस दौरान कोहरा भी लोगों को खासा परेशान करेगा।
प्रकृति से छेड़छाड़ का सबसे बड़ा दुष्प्रभाव मौसम पर पड़ा है। इस बार मौसम विशेषज्ञ मान रहे हैं कि ठंड अधिक पड़ेगी। श्री बल्लभपंत कृषि विश्वविद्यालय के मौसम विज्ञानी मनोज आत्रेय का कहना है कि इस बार गर्मी ने रिकार्ड तोड़े हैं। अधिकतम पारा 48 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया गया था। इसी तरह इस बार न्यूनतम तापमान काफी नीचे लुढ़क सकता है। इसके पीछे भूमि का अत्यधिक दोहन और अंधाधुंध पेड़ों के कटान को माना जा रहा है। लेकिन अब सुबह-शाम ठंड बढ़नी शुरू हो जाएगी। अब तक करीब 27 डिग्री सेल्सियस है जो तेजी से 20 के आसपास पहुंच जाएगा।
कोहरा दे रहा संकेत
कोहरा पड़ना शुरू हो चुका है, जो ठंड के इशारे को दर्शा रहा है। इस माह के अंतिम में कोहरा और अधिक बढ़ जाएगी। अक्सर 15 से 20 दिन तक कोहरा छाया रहता है, लेकिन इस बार कोहरा दो माह तक रह सकता है। इस बार पाला पड़ने के भी पूरे आसार हैं और शीतलहर पिछले वर्षों की अपेक्षा करीब 20 प्रतिशत तक अधिक चलेगी। कोहरे की दृश्यता क्षमता भी कम रह जाएगी।
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फसलों को होगा लाभ--
कृषि विशेषज्ञ प्रवेश त्यागी कहते हैं कि अधिक ठंड से जनजीवन भले ही प्रभावित हो लेकिन इससे फसलों को लाभ होगा। गेहूं की फसल भी अच्छी होगी। कई साल से ठंड कम होने के कारण उत्पादन कम रहता है। अन्य फसलों के लिए भी ठंड संजीवनी बनकर आएगी। सर्दी के मौसम में अधिक ठंड पड़ना फसलों के लिए बेहतर रहेगा।
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हापुड़। भयंकर गर्मी और धुंध के बाद अबकी हाड़ कंपकंपाने वाली सर्दी के लिए भी आप तैयार रहिये। इस बार पिछले साल की अपेक्षा कड़ाके की ठंड पड़ेगी। इस माह के तीसरे सप्ताह से इसका असर भी दिखना शुरू हो जाएगा। पश्चिमी उतर प्रदेश के जिलों में न्यूनतम तापमान तीन-चार डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। इस दौरान कोहरा भी लोगों को खासा परेशान करेगा।
प्रकृति से छेड़छाड़ का सबसे बड़ा दुष्प्रभाव मौसम पर पड़ा है। इस बार मौसम विशेषज्ञ मान रहे हैं कि ठंड अधिक पड़ेगी। श्री बल्लभपंत कृषि विश्वविद्यालय के मौसम विज्ञानी मनोज आत्रेय का कहना है कि इस बार गर्मी ने रिकार्ड तोड़े हैं। अधिकतम पारा 48 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज किया गया था। इसी तरह इस बार न्यूनतम तापमान काफी नीचे लुढ़क सकता है। इसके पीछे भूमि का अत्यधिक दोहन और अंधाधुंध पेड़ों के कटान को माना जा रहा है। लेकिन अब सुबह-शाम ठंड बढ़नी शुरू हो जाएगी। अब तक करीब 27 डिग्री सेल्सियस है जो तेजी से 20 के आसपास पहुंच जाएगा।
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कोहरा दे रहा संकेत
कोहरा पड़ना शुरू हो चुका है, जो ठंड के इशारे को दर्शा रहा है। इस माह के अंतिम में कोहरा और अधिक बढ़ जाएगी। अक्सर 15 से 20 दिन तक कोहरा छाया रहता है, लेकिन इस बार कोहरा दो माह तक रह सकता है। इस बार पाला पड़ने के भी पूरे आसार हैं और शीतलहर पिछले वर्षों की अपेक्षा करीब 20 प्रतिशत तक अधिक चलेगी। कोहरे की दृश्यता क्षमता भी कम रह जाएगी।
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फसलों को होगा लाभ--
कृषि विशेषज्ञ प्रवेश त्यागी कहते हैं कि अधिक ठंड से जनजीवन भले ही प्रभावित हो लेकिन इससे फसलों को लाभ होगा। गेहूं की फसल भी अच्छी होगी। कई साल से ठंड कम होने के कारण उत्पादन कम रहता है। अन्य फसलों के लिए भी ठंड संजीवनी बनकर आएगी। सर्दी के मौसम में अधिक ठंड पड़ना फसलों के लिए बेहतर रहेगा।