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Hapur News: हवाई हमलों के दौरान बंकर में छिपकर बचाते हैं जान
Wed, 02 Oct 2024 10:50 PM IST
गाजियाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
संवाद न्यूज एजेंसी, हापुड़
Updated Wed, 02 Oct 2024 10:50 PM IST
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हापुड़। मंगलवार रात ईरान द्वारा इजराइल पर हमला करने के बाद हापुड़ से गए कामगारों के परिवारों को चिंता सजाने लगी है। हापुड़ जिले से 10 लोग इजराइल में हैं। लगातार हो रहे हवाई हमलों के दौरान ये लोग बंकरों में छिपकर जान बचाते हैं। उनकी सलामती के लिए लगातार परिवार की ओर से दुआएं की जा रही हैं।
मोहल्ला मजीदपुरा गली नंबर चार निवासी शाहबुद्दीन (35) पुत्र रमजानी राज मिस्त्री हैं। रमजानी भी पूर्व सभासद रह चुके हैं। ईद से दो दिन पहले अप्रैल में शाहबुद्दीन इजराइल गए थे। शाहबुद्दीन के भाई रियाजुद्दीन ने बताया कि वह इजराइल के यरुशलम में हैं। उन्होंने बताया कि शुरूआत में स्थिति ठीक रही, लेकिन हालात कुछ बदल गए हैं। शाहबुद्दीन दिन में करीब आठ घंटे काम करते हैं और फिर होटल में रहने चले जाते हैं। परिजनों ने बताया कि जहां वे रह रहे हैं, वहां भी बमबारी हो रही है। ऐसे में उन्हें पहले अलर्ट कर दिया जाता है। सायरन बजता है और वे आसपास बने बंकर में चले जाते हैं। काम करने के दौरान दूर दराज के इलाकों से कभी भी बम गिरने की आवाज आती हैं जो दहशत में डालती रहती हैं। उन्होंने बताया कि अलर्ट के दौरान करीब एक से दो घंटे बंकर में रहने के बाद दोबारा कार्य शुरू कर देते हैं।
परिजनों ने बताया कि शाहबुद्दीन से अब दिन में करीब तीन बार व्हाट्सएप कॉल पर बात करते हैं। इस दौरान पूरा परिवार एक साथ उनसे बात करता है। वहां की गिरी हुई इमारतें भी उन्हें कई बार वीडियो कॉल पर दिखाई हैं। ऐसे में उन्हें देखकर काफी दहशत होती है। परिवार के लोग एक साथ उनकी सलामती के लिए दुआ कर रहे हैं। शाहबुद्दीन की पत्नी अपने चार बच्चे के साथ यहीं रहती हैं। जिनमें तीन लड़कियां शामिल हैं।
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खाने और रहने की है बेहतर व्यवस्था
परिजनों ने बताया कि वे शुरूआत में शाहबुद्दीन जाने के लिए मना कर रहे थे। लेकिन दो साल के लिए अच्छी तनख्वाह मिलने पर उन्होंने हामी भर दी। परिजनों का कहना है कि वहां रहने और खाने की व्यवस्थाएं काफी बेहतर हैं और अधिकतर समय किसी प्रकार की दिक्कत नहीं रही है। उनका कहना है कि लौटकर वे बच्चों को बेहतर भविष्य दे सकते हैं।
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मोहल्ला मजीदपुरा गली नंबर चार निवासी शाहबुद्दीन (35) पुत्र रमजानी राज मिस्त्री हैं। रमजानी भी पूर्व सभासद रह चुके हैं। ईद से दो दिन पहले अप्रैल में शाहबुद्दीन इजराइल गए थे। शाहबुद्दीन के भाई रियाजुद्दीन ने बताया कि वह इजराइल के यरुशलम में हैं। उन्होंने बताया कि शुरूआत में स्थिति ठीक रही, लेकिन हालात कुछ बदल गए हैं। शाहबुद्दीन दिन में करीब आठ घंटे काम करते हैं और फिर होटल में रहने चले जाते हैं। परिजनों ने बताया कि जहां वे रह रहे हैं, वहां भी बमबारी हो रही है। ऐसे में उन्हें पहले अलर्ट कर दिया जाता है। सायरन बजता है और वे आसपास बने बंकर में चले जाते हैं। काम करने के दौरान दूर दराज के इलाकों से कभी भी बम गिरने की आवाज आती हैं जो दहशत में डालती रहती हैं। उन्होंने बताया कि अलर्ट के दौरान करीब एक से दो घंटे बंकर में रहने के बाद दोबारा कार्य शुरू कर देते हैं।
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परिजनों ने बताया कि शाहबुद्दीन से अब दिन में करीब तीन बार व्हाट्सएप कॉल पर बात करते हैं। इस दौरान पूरा परिवार एक साथ उनसे बात करता है। वहां की गिरी हुई इमारतें भी उन्हें कई बार वीडियो कॉल पर दिखाई हैं। ऐसे में उन्हें देखकर काफी दहशत होती है। परिवार के लोग एक साथ उनकी सलामती के लिए दुआ कर रहे हैं। शाहबुद्दीन की पत्नी अपने चार बच्चे के साथ यहीं रहती हैं। जिनमें तीन लड़कियां शामिल हैं।
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परिजनों ने बताया कि वे शुरूआत में शाहबुद्दीन जाने के लिए मना कर रहे थे। लेकिन दो साल के लिए अच्छी तनख्वाह मिलने पर उन्होंने हामी भर दी। परिजनों का कहना है कि वहां रहने और खाने की व्यवस्थाएं काफी बेहतर हैं और अधिकतर समय किसी प्रकार की दिक्कत नहीं रही है। उनका कहना है कि लौटकर वे बच्चों को बेहतर भविष्य दे सकते हैं।