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दो वर्ष बाद मिली टीएलएम की धनराशि

Tue, 30 Nov 2021 12:09 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 30 Nov 2021 12:09 AM IST
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TLM money received after two years
हमीरपुर। जिले के लिए शिक्षण अधिगम सामग्री (टीएलएम) शासन दो वर्ष बाद राशि मुहैया कराई गई है। आठ लाख 40 हजार रुपये इसके लिए जारी कर दिए गए हैं।
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जनपद में कुल 975 परिषदीय विद्यालय हैं। इनमें करीब 2800 शिक्षक हैं। इस धनराशि से प्रत्येक शिक्षक अपने अपने विषयों में कठिन पाठों व बिंदुओं को उदाहरण देकर या फिर उससे संबंधित कोई यंत्र, चीज या पोस्टर दिखाकर बच्चों को समझाने का प्रयास करता है। परिषदीय विद्यालयों में दो से तीन साल पहले 500 रुपये प्रति शिक्षक जारी किया जाता रहा है। बीएसए राकेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि कोरोनाकाल में टीएलएम का पैसा शासन से नहीं मिला। शनिवार को 2800 शिक्षकों के लिए आठ लाख 40 हजार की धनराशि मिली है। एक सप्ताह के अंदर शिक्षकों के खातों में 300 रुपये पहुंचाए जाएंगे।
जगत में ऐसे उदाहरणों व उत्पादों को जिनकी मदद से बच्चों को विषय सीखने में आसानी हो या उनमें सीखने की ललक पैदा हो, उन्हें शिक्षण अधिगम सामग्री यानी टीएलएम कहते हैं। मदद से भी छोटा बड़ा, समूह बनाना, चित्र बनाना व तह लगाना आदि सिखाया जा सकता है। इसके अलावा सांप सीढ़ी, राष्ट्रीय प्रतीक, फल फूलों के कार्ड, रेलवे के टिकट, कविता पोस्टर्स सहित कई सामग्री ऐसी हैं जो कुछ रुपयों में आ सकतीं हैं। इनकी मदद से बच्चों को काफी कुछ सिखाया जा सकता है। इसके अलावा जैसे थर्माकोल आदि जिसके माध्यम से उभरते हुए अक्षर, अंक आदि को भी समझाया जा सकता है।
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इनसेट
कंचे, तीलियां व गेंद भी सिखाती है गणित
सुनने में भले ही अटपटा लगे पर नौनिहालों को गणित
ऐसे भले ही न समझ आए पर कंचों व गेंदों को गिनकर गिनती सिखाई जाए तो उनको जल्द समझ आ जाती है। ये बातें कारीमाटी प्राथमिक स्कूल की प्रधानाध्यापिका रमा सिंह ने कही। गणित किट में चांदा, पटरी, पेंसिल, रबर, कटर, ठोस आकृतियां, नेपियर पट्टी, गिनतारा, डिस्क आदि टीएलएम हैं। शिक्षक स्वयं से चार्ट पेपर, फ्लैश कार्ड आदि बनाते हैं जो बच्चों को सिखाने के काम आती है। बताया कि पर्यावरण से संबंधित पैमाना घड़ी, मानक पैमाना, तापमापी, कमानीदार तुला आदि मॉडल पर्यावरण अध्ययन को समझाने के लिए बच्चों के काम आ सकतीं हैं। बताया कि गत दो वर्षों से टीएलएम का एक भी पैसा नहीं मिला है।
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