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Hamirpur News: बारिश में पंप कैनाल की बाउंड्रीवाॅल क्षतिग्रस्त, निर्माण पर सवाल
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फोटो- 01 एचएएमपी 31- भौंरा डांडा में क्षतिग्रस्त पंप कैनाल की बाउंड्रीवाल। संवाद
हमीरपुर। सुमेरपुर विकासखंड के भौंरा डांडा में 115.71 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन पंप कैनाल परियोजना की बाउंड्रीवाल का करीब 10 मीटर हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। दीवार के आसपास मिट्टी का कटाव और निर्माण सामग्री का मलबा दिखाई दे रहा है।
ग्रामीणों ने दीवार की मजबूती पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की है। वहीं विभाग का कहना है कि बाउंड्रीवाल बारिश के कारण नहीं, बल्कि पाइपलाइन बिछाने के दौरान क्षतिग्रस्त हुई थी। बारिश के चलते समय से इसका पुनर्निर्माण नहीं हो सका। अब ठेकेदार से क्षतिग्रस्त हिस्से को दोबारा बनवाया जाएगा।
यमुना नदी से पानी लेकर बांदा जनपद के 10 और हमीरपुर के दो गांवों के करीब 5,070 किसानों को सिंचाई सुविधा देने के लिए परियोजना का निर्माण कराया जा रहा है। करीब 18.7 किलोमीटर भूमिगत पाइपलाइन के जरिये खेतों तक पानी पहुंचाया जाना है। विभाग के अनुसार अब तक करीब नौ किलोमीटर पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है और करीब 10 किलोमीटर काम बाकी है। पूरी परियोजना की भौतिक प्रगति करीब 74 प्रतिशत बताई गई है।
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बीम की मजबूती पर ग्रामीण ने उठाए सवाल: भौंरा निवासी मुनीम ने आरोप लगाया कि बाउंड्रीवाल में बीम पर्याप्त मजबूती से नहीं रखी गई, जिससे दीवार धसक गई। उन्होंने दूसरी तरफ भी दीवार में दरार होने की बात कही है। इससे निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि विभाग ने निर्माण में तकनीकी कमी होने की बात से इनकार किया है। सहायक अभियंता के अनुसार बाउंड्रीवाल के पिलर नीचे तक बनाए गए हैं और निर्माण स्वीकृत डिजाइन व ड्राइंग के अनुसार कराया गया है।
74 फीसदी काम पूरा, नौ किमी पाइपलाइन पड़ी: सहायक अभियंता के अनुसार परियोजना की भौतिक प्रगति करीब 74 प्रतिशत है। कैंप कार्यालय, स्टाफ क्वार्टर और मीटर रूम आदि के काम पूरे हो चुके हैं। पंप हाउस का काम भी काफी आगे बढ़ चुका है। विद्युत कार्य में पोल लगाए जा रहे हैं। करीब नौ किलोमीटर पाइपलाइन बिछ चुकी है, जबकि करीब 10 किलोमीटर काम बाकी है। शेष हिस्से में करीब छह किलोमीटर पाइप उपलब्ध हो चुका है। करीब तीन किलोमीटर के काम का एस्टीमेट तैयार कर प्रक्रिया चल रही है।
दिसंबर तक सिंचाई देने का प्रयास: परियोजना की निर्धारित पूर्णता तिथि 31 मार्च 2027 है। विभाग का प्रयास है कि दिसंबर 2026 तक किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध करा दी जाए। यमुना नदी से चंदपुरवा के पास मंदिर के आगे पानी लेकर भूमिगत पाइपलाइन के माध्यम से खेतों तक पहुंचाया जाएगा। परियोजना की क्षमता 40 क्यूसेक है।
सिविल में एक और मैकेनिकल में पांच साल की जिम्मेदारी: सहायक अभियंता के अनुसार सिविल कार्यों के लिए ठेकेदार की एक वर्ष की डिफेक्ट लाइबिलिटी और मैकेनिकल कार्यों के लिए पांच वर्ष की जिम्मेदारी रहती है। इस अवधि में संबंधित कार्य में खराबी आने पर ठेकेदार को अपने खर्च पर उसे ठीक करना होगा।
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ग्रामीणों ने दीवार की मजबूती पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की है। वहीं विभाग का कहना है कि बाउंड्रीवाल बारिश के कारण नहीं, बल्कि पाइपलाइन बिछाने के दौरान क्षतिग्रस्त हुई थी। बारिश के चलते समय से इसका पुनर्निर्माण नहीं हो सका। अब ठेकेदार से क्षतिग्रस्त हिस्से को दोबारा बनवाया जाएगा।
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यमुना नदी से पानी लेकर बांदा जनपद के 10 और हमीरपुर के दो गांवों के करीब 5,070 किसानों को सिंचाई सुविधा देने के लिए परियोजना का निर्माण कराया जा रहा है। करीब 18.7 किलोमीटर भूमिगत पाइपलाइन के जरिये खेतों तक पानी पहुंचाया जाना है। विभाग के अनुसार अब तक करीब नौ किलोमीटर पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है और करीब 10 किलोमीटर काम बाकी है। पूरी परियोजना की भौतिक प्रगति करीब 74 प्रतिशत बताई गई है।
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बीम की मजबूती पर ग्रामीण ने उठाए सवाल: भौंरा निवासी मुनीम ने आरोप लगाया कि बाउंड्रीवाल में बीम पर्याप्त मजबूती से नहीं रखी गई, जिससे दीवार धसक गई। उन्होंने दूसरी तरफ भी दीवार में दरार होने की बात कही है। इससे निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि विभाग ने निर्माण में तकनीकी कमी होने की बात से इनकार किया है। सहायक अभियंता के अनुसार बाउंड्रीवाल के पिलर नीचे तक बनाए गए हैं और निर्माण स्वीकृत डिजाइन व ड्राइंग के अनुसार कराया गया है।
74 फीसदी काम पूरा, नौ किमी पाइपलाइन पड़ी: सहायक अभियंता के अनुसार परियोजना की भौतिक प्रगति करीब 74 प्रतिशत है। कैंप कार्यालय, स्टाफ क्वार्टर और मीटर रूम आदि के काम पूरे हो चुके हैं। पंप हाउस का काम भी काफी आगे बढ़ चुका है। विद्युत कार्य में पोल लगाए जा रहे हैं। करीब नौ किलोमीटर पाइपलाइन बिछ चुकी है, जबकि करीब 10 किलोमीटर काम बाकी है। शेष हिस्से में करीब छह किलोमीटर पाइप उपलब्ध हो चुका है। करीब तीन किलोमीटर के काम का एस्टीमेट तैयार कर प्रक्रिया चल रही है।
दिसंबर तक सिंचाई देने का प्रयास: परियोजना की निर्धारित पूर्णता तिथि 31 मार्च 2027 है। विभाग का प्रयास है कि दिसंबर 2026 तक किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध करा दी जाए। यमुना नदी से चंदपुरवा के पास मंदिर के आगे पानी लेकर भूमिगत पाइपलाइन के माध्यम से खेतों तक पहुंचाया जाएगा। परियोजना की क्षमता 40 क्यूसेक है।
सिविल में एक और मैकेनिकल में पांच साल की जिम्मेदारी: सहायक अभियंता के अनुसार सिविल कार्यों के लिए ठेकेदार की एक वर्ष की डिफेक्ट लाइबिलिटी और मैकेनिकल कार्यों के लिए पांच वर्ष की जिम्मेदारी रहती है। इस अवधि में संबंधित कार्य में खराबी आने पर ठेकेदार को अपने खर्च पर उसे ठीक करना होगा।