फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Hamirpur News ›   School sold as scrap, education left homeless; classes being held under the shade of a tree.

Hamirpur News: कबाड़ में बिका स्कूल, पढ़ाई बेघर, पेड़ की छांव में लग रही कक्षा

Mon, 24 Aug 2026 12:05 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 24 Aug 2026 12:05 AM IST
विज्ञापन
School sold as scrap, education left homeless; classes being held under the shade of a tree.
फोटो 23 एचएएमपी 02- पेड़ के नीचे पढ़ते गंगवा डेरा के बच्चे। संवाद
हमीरपुर। सरकारी स्कूलों में बच्चों को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। चंदूपर ग्राम पंचायत के मजरा गंगवा डेरा में प्राथमिक विद्यालय दो साल से भवनविहीन है। पेड़ की छांव में कक्षा लग रही है। पुरानी इमारत को 2024 में तकनीकी टीम ने असुरक्षित घोषित किया था। इसके बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने भवन की नीलामी कर कबाड़ में बेच दिया। वहीं नई इमारत के लिए प्रस्ताव कागजों में अटका है।
विज्ञापन

विद्यालय में कक्षा एक से पांच तक कुल 36 बच्चे पंजीकृत हैं जबकि प्रधानाध्यापक रघुराज कुटार, शिक्षामित्र कमलेश कुमार व संतोषी देवी की तैनाती है। पुराना भवन बिकने के बाद गांव के भूरे ने अपने मकान का एक हिस्सा बच्चों की पढ़ाई के लिए दिया था जिसमें वर्ष 2025 तक पढ़ाई चली। घर में विवाह समारोह के कारण भूरे ने घर खाली करा लिया था। अब पूरा विद्यालय बेघर है। अब बच्चों की दिनचर्या मौसम तय करता है। तेज धूप में बरगद की छांव में कक्षा लगती है जबकि बारिश में पढ़ाई रोकनी पड़ती है। किताब-कॉपी बच्चों के पास है लेकिन छत नहीं है। बच्चों को खुले आसमान के नीचे मिड-डे मील परोसा जाता है।ग्रामीणों में इस स्थिति को लेकर नाराजगी है। उनका कहना है कि दो साल में नई इमारत की नींव तक नहीं रखी गई। धूप और बारिश में खुले में बच्चों का बैठना सुरक्षित नहीं है।
विज्ञापन

रसोइया का घर बना मिनी स्कूल
रसोइया सरवती देवी ने नए भवन बनने तक अपना एक कमरा निशुल्क दिया है। उसी कमरे में विद्यालय के जरूरी कागजात रखे जाते हैं। सरवती देवी ने बताया कि बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इसलिए यह व्यवस्था की है। विभाग की ओर से इसके लिए कोई सहयोग नहीं मिला है। यह मानवीय पहल है लेकिन पूरी कक्षा संचालित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन

नए भवन की नींव तक नहीं गई
गंगवा डेरा निवासी अशोक निषाद का कहना है कि पुरानी इमारत हटे करीब दो साल हो चुके हैं। इतने समय में बच्चों की पढ़ाई के लिए स्थायी व्यवस्था हो जानी चाहिए थी लेकिन नई इमारत की नींव तक नहीं रखी गई। विभाग क्या कर रहा है, कुछ पता ही नहीं चल रहा। अध्यापकों के पास बारिश में छुट्टी करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचता है।
बच्चों की सुरक्षा का भी सवाल
गंगवा डेरा निवासी संजय निषाद, रंजीत, रामभरोसे, जगदीश, बबलू, लालाराम, शकुंतला, सरोज, उमा, रमाकांती का कहना है कि बच्चों को धूप और बारिश में बैठकर पढ़ाना किसी मजबूरी से कम नहीं है। दो साल हो चुके है लेकिन अभी तक विद्यालय नहीं बन पाया है। स्कूल भवन के नाम पर इस गांव के लिए यही बरगद का पेड़ है। बच्चों का पेड़ के नीचे पढ़ना सुरक्षित नहीं है।


शासन को भवन निर्माण का प्रस्ताव भेजा गया है। स्वीकृति नहीं मिली है। स्वीकृति मिलते ही निर्माण शुरू कराया जाएगा। जिले में 967 विद्यालय हैं। इनमें 200 स्मार्ट कक्षाओं से सुसज्जित हो चुके हैं। अन्य विद्यालयों को बेहतर किया जा रहा है। - मुकेश खरवार, बीएसए, हमीरपुर

फोटो 23 एचएएमपी 02- पेड़ के नीचे पढ़ते गंगवा डेरा के बच्चे। संवाद

फोटो 23 एचएएमपी 02- पेड़ के नीचे पढ़ते गंगवा डेरा के बच्चे। संवाद

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed