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Hamirpur News: अब भीख मांगने वाले बच्चे भी जाएंगे स्कूल
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हमीरपुर। सड़कों पर भीख मांगने वाले और बाल श्रम से मुक्त कराए गए बच्चों को अब जिला प्रशासन स्कूल भेजेगा। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत उन्हें ढाई हजार रुपये प्रतिमाह भी दिया जाएगा।
जिले में बड़ी संख्या में सड़कों पर भीख मांगते हुए बच्चे दिखाई देते हैं। यह अक्सर कलक्ट्रेट के अंदर या रोडवेज बस अड्डे के पास देखे जा सकते हैं। इसके साथ ही बड़ी संख्या में होटलों, ढाबों व अन्य दुकानों पर बच्चे बालश्रम करते हुए दिखाई देते हैं। अब ऐसे बच्चों को स्कूल भेजकर शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ा जाएगा। बाल संरक्षण इकाई की टीम सूचना मिलने पर बच्चों को आवासित कराते हुए सरकारी विद्यालयों में इनका दाखिला करवाएगी। बाल संरक्षण अधिकारी गोपाल मिश्रा ने बताया कि बाल संरक्षण इकाई की तरफ से बच्चों के परिजनों की भी काउंसलिंग की जाएगी। उन्होंने कहा कि भीख मांगना व नाबालिग बच्चों से श्रम कराना अपराध की श्रेणी में आता है। अभियान के माध्यम से बच्चों को स्कूल में भेजना, इनका अकाउंट खुलवाना, बाल सेवा योजना के तहत पंजीकृत कर शिक्षा से जोड़ना बाल संरक्षण इकाई का काम होगा।
जिला प्रोबेशन अधिकारी राजीव कुमार सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री बाल सेवा योजन के तहत अब तक कोरोना काल में माता-पिता को खो चुके 46 बच्चों और सामान्य श्रेणी में 196 बच्चों को इसका लाभ दिया जा रहा है। योजना के लिए अभी तक कोई आवेदन नहीं हुआ है।
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बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष विभा भारती का कहना है कि टीम सर्वे कर रही है, जो भी बच्चे भीख मांगतेे हुए मिलेंगे उनका स्कूल में दाखिला कराया जाएगा। ऐसे बच्चों की सूचना कार्यालय में दे सकते हैं। बच्चाें के माता पिता की काउंसलिंग की जाएगी।
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जिले में बड़ी संख्या में सड़कों पर भीख मांगते हुए बच्चे दिखाई देते हैं। यह अक्सर कलक्ट्रेट के अंदर या रोडवेज बस अड्डे के पास देखे जा सकते हैं। इसके साथ ही बड़ी संख्या में होटलों, ढाबों व अन्य दुकानों पर बच्चे बालश्रम करते हुए दिखाई देते हैं। अब ऐसे बच्चों को स्कूल भेजकर शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ा जाएगा। बाल संरक्षण इकाई की टीम सूचना मिलने पर बच्चों को आवासित कराते हुए सरकारी विद्यालयों में इनका दाखिला करवाएगी। बाल संरक्षण अधिकारी गोपाल मिश्रा ने बताया कि बाल संरक्षण इकाई की तरफ से बच्चों के परिजनों की भी काउंसलिंग की जाएगी। उन्होंने कहा कि भीख मांगना व नाबालिग बच्चों से श्रम कराना अपराध की श्रेणी में आता है। अभियान के माध्यम से बच्चों को स्कूल में भेजना, इनका अकाउंट खुलवाना, बाल सेवा योजना के तहत पंजीकृत कर शिक्षा से जोड़ना बाल संरक्षण इकाई का काम होगा।
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जिला प्रोबेशन अधिकारी राजीव कुमार सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री बाल सेवा योजन के तहत अब तक कोरोना काल में माता-पिता को खो चुके 46 बच्चों और सामान्य श्रेणी में 196 बच्चों को इसका लाभ दिया जा रहा है। योजना के लिए अभी तक कोई आवेदन नहीं हुआ है।
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बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष विभा भारती का कहना है कि टीम सर्वे कर रही है, जो भी बच्चे भीख मांगतेे हुए मिलेंगे उनका स्कूल में दाखिला कराया जाएगा। ऐसे बच्चों की सूचना कार्यालय में दे सकते हैं। बच्चाें के माता पिता की काउंसलिंग की जाएगी।