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Hamirpur News: हो चंद्रावल का जीर्णोद्धार तो क्षेत्र में बढ़े हरियाली
Sat, 07 Jun 2025 11:54 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
Updated Sat, 07 Jun 2025 11:54 PM IST
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परछा गांव के पास से निकली चंद्रावल नदी। संवाद
- फोटो : परछा गांव के पास से निकली चंद्रावल नदी। संवाद
मौदहा (हमीरपुर)। विलुप्त होती जा रही क्षेत्र वासियों की लाइफ लाइन रही चंद्रावल नदी के जीर्णोद्धार की मांग तेज हो गई है। ताकि क्षेत्र में न केवल जल स्तर में सुधार हो बल्कि 12 माह नदी में पानी मौजूद रहे। लोगों के अनुसार नदी के जीर्णोद्धार होने से क्षेत्र में हरियाली बढ़ेगी।
जिले की ऐतिहासिक चंद्रावल नदी मौजूदा समय में अपना अस्तित्व खोती जा रही है। ऐसे में इसमें बने बांध व चेकडैम बेकार साबित हो रहे है। समतल जमीन देख इस पर अतिक्रमण भी जारी है। इस नदी का का उद्गम स्थल महोबा जनपद का ग्राम चांदौ है। प्रथम दृष्टया इस गांव में नदी का बोध नहीं होता, लेकिन उद्गम स्थल से चार किलोमीटर दूरी पर चरखारी रोड रेलवे क्रॉसिंग के पास यह छोटी नदी का रूप लेती है। इसे चंद्रावल नदी के नाम से जाना जाता है। उद्गम स्थल से बगरौन की दूरी लगभग नौ किलोमीटर है। यहां गांव के पास चंद्रावल बांध निर्मित है, इससे भी किसानों को सिंचाई के लिए न के बराबर पानी मिलता है। चांदौ गांव तक कभी कीरत सागर की सीमा फैली थी। कीरत सागर के उफनाने पर इसका पानी चंद्रावल नदी में जाता था। पूरे साल यह नदी पानी से भरी रहती थी। चांदौ गांव से निकलते हुए यह नदी जिले के विभिन्न गांवों से होकर हमीरपुर जिले के कैथी गांव में केन नदी से मिलती है। ।
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चंद्रावल में कई नाले मिलते हैं
चंद्रावल नदी में कई छोटी नदी नाले समाहित होते हैं ग्राम नायकपुरवा के बिछुही नाला, ग्राम इचौली के श्याम नाला सहित गांवों के नाले इसमें समाहित हो जाते हैं सिहो नदी जो महोबा जनपद के ग्राम बम्हौरी से जो चंद्रावल में लारौद में मिलता हैं। सरसई नाला जो महोबा के चिचारा से निकला और श्याम नाला में इचौली में समाहित होता, बड़ेरी नाला जो ग्राम चकदहा से निकलता हैं और मौदहा व सिजनौड़ा के पास चंद्रावल में समाहित होता हैं। कारकी नाला जो बांदा के खैराडा गांव से निकल कर गुसियारी, कपसा, सिजवाही टिकरी, होते हुए चंद्रावल में मिला हैं। बरगला नाला जो बांदा जनपद के गांव मरौली के पास से होते हुए हमीरपुर के ग्राम टिकरी, भभई से श्यामनाले में मिलता हैं और आगे चंद्रावल में मिलते है।
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जिले की ऐतिहासिक चंद्रावल नदी मौजूदा समय में अपना अस्तित्व खोती जा रही है। ऐसे में इसमें बने बांध व चेकडैम बेकार साबित हो रहे है। समतल जमीन देख इस पर अतिक्रमण भी जारी है। इस नदी का का उद्गम स्थल महोबा जनपद का ग्राम चांदौ है। प्रथम दृष्टया इस गांव में नदी का बोध नहीं होता, लेकिन उद्गम स्थल से चार किलोमीटर दूरी पर चरखारी रोड रेलवे क्रॉसिंग के पास यह छोटी नदी का रूप लेती है। इसे चंद्रावल नदी के नाम से जाना जाता है। उद्गम स्थल से बगरौन की दूरी लगभग नौ किलोमीटर है। यहां गांव के पास चंद्रावल बांध निर्मित है, इससे भी किसानों को सिंचाई के लिए न के बराबर पानी मिलता है। चांदौ गांव तक कभी कीरत सागर की सीमा फैली थी। कीरत सागर के उफनाने पर इसका पानी चंद्रावल नदी में जाता था। पूरे साल यह नदी पानी से भरी रहती थी। चांदौ गांव से निकलते हुए यह नदी जिले के विभिन्न गांवों से होकर हमीरपुर जिले के कैथी गांव में केन नदी से मिलती है। ।
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चंद्रावल में कई नाले मिलते हैं
चंद्रावल नदी में कई छोटी नदी नाले समाहित होते हैं ग्राम नायकपुरवा के बिछुही नाला, ग्राम इचौली के श्याम नाला सहित गांवों के नाले इसमें समाहित हो जाते हैं सिहो नदी जो महोबा जनपद के ग्राम बम्हौरी से जो चंद्रावल में लारौद में मिलता हैं। सरसई नाला जो महोबा के चिचारा से निकला और श्याम नाला में इचौली में समाहित होता, बड़ेरी नाला जो ग्राम चकदहा से निकलता हैं और मौदहा व सिजनौड़ा के पास चंद्रावल में समाहित होता हैं। कारकी नाला जो बांदा के खैराडा गांव से निकल कर गुसियारी, कपसा, सिजवाही टिकरी, होते हुए चंद्रावल में मिला हैं। बरगला नाला जो बांदा जनपद के गांव मरौली के पास से होते हुए हमीरपुर के ग्राम टिकरी, भभई से श्यामनाले में मिलता हैं और आगे चंद्रावल में मिलते है।
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