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हमीरपुर: आर्मी भर्ती में फर्जी निवासपत्रों की सीबीआई जांच तेज, 70 अभ्यर्थियों के जारी हुए थे फर्जी प्रपत्र
Thu, 04 Feb 2021 07:34 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Thu, 04 Feb 2021 07:34 PM IST
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सीबीआई
- फोटो : पीटीआई
भारतीय सेना में हमीरपुर के 70 अभ्यर्थियों के निवास प्रमाणपत्र और अन्य कागजात फर्जी पाए जाने के मामले की जांच कर रही सीबीआई ने तेज कर दी है। कलक्ट्रेट के एसीआरए समेत तमाम कर्मचारियों को अभिलेखों समेत तलब किया है। हालांकि सभी कर्मचारी कई बार सीबीआई के बुलावे पर लखनऊ जाकर अपना पक्ष रख चुके हैं।
सेना भर्ती प्रक्रिया वर्ष-2017 में शुरू हुई थी। जिसमें जिले में 70 अभ्यर्थी चयनित हुए थे। यह अभ्यर्थी अलीगढ़ के रहने वाले थे। जिन्होंने सदर तहसील क्षेत्र के लेखपालों और नगर पालिका के सभासदों से मिलकर निवास प्रमाणपत्र और अन्य कागजात हासिल किए थे।
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सेना भर्ती प्रक्रिया वर्ष-2017 में शुरू हुई थी। जिसमें जिले में 70 अभ्यर्थी चयनित हुए थे। यह अभ्यर्थी अलीगढ़ के रहने वाले थे। जिन्होंने सदर तहसील क्षेत्र के लेखपालों और नगर पालिका के सभासदों से मिलकर निवास प्रमाणपत्र और अन्य कागजात हासिल किए थे।
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सीबीआई के इंस्पेक्टर संतोष कुमार तिवारी के नेतृत्व में दो सदस्यीय टीम बीते साल 18 मार्च को शहर आई थी। तब तीन दिनों में नौ लेखपाल समेत 18 कर्मचारियों को तलब कर बयान लिए थे। सीबीआई के बुलावे पर रिटायर्ड बाबू वीरेंद्र कुमार, एसडीएम के पेशकार बृजकिशोर, सदर तहसील के नाजिर गोविंद शर्मा व एसीआरए समेत कई कर्मचारी अभिलेख समेत लखनऊ पहुंचे थे।
इन कर्मियों को कई बार अभिलेख समेत बुलाया जा चुका है। सदर तहसील के नाजिर गोविंद शर्मा ने बताया कर्मियों को सीबीआई ने तलब नहीं किया है, बल्कि जो अभिलेख मांगे जाते हैं उन्हें लेकर कर्मचारी लखनऊ जाते हैं। वर्ष 2018 में सीबीआई ने कई दिनों तक मामले की जांच कर प्रधानों और लेखपालों से बयान लिए थे।
सर्वाधिक अभ्यर्थी कुरारा क्षेत्र के पतारा गांव के थे। सत्यापन में मार्कशीट में अलीगढ़ का पता होने पर मामले का खुलासा हुआ था और तीन युवक पकड़े गए थे। मामले की जांच कर खुफिया विभाग ने रिपोर्ट दी थी।
इन कर्मियों को कई बार अभिलेख समेत बुलाया जा चुका है। सदर तहसील के नाजिर गोविंद शर्मा ने बताया कर्मियों को सीबीआई ने तलब नहीं किया है, बल्कि जो अभिलेख मांगे जाते हैं उन्हें लेकर कर्मचारी लखनऊ जाते हैं। वर्ष 2018 में सीबीआई ने कई दिनों तक मामले की जांच कर प्रधानों और लेखपालों से बयान लिए थे।
सर्वाधिक अभ्यर्थी कुरारा क्षेत्र के पतारा गांव के थे। सत्यापन में मार्कशीट में अलीगढ़ का पता होने पर मामले का खुलासा हुआ था और तीन युवक पकड़े गए थे। मामले की जांच कर खुफिया विभाग ने रिपोर्ट दी थी।