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Hamirpur News: औषधीय खेती पर जोर...लक्ष्य देने में कंजूसी
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हमीरपुर। कोरोना महामारी का असर औषधीय खेती पर भी पड़ा है। पिछले दो वर्षों में किसी भी औषधीय खेती के लिए एक भी लक्ष्य जिले को नहीं मिला है। किसानों को मिलने वाला अनुदान भी बंद रहा। चालू वित्तीय वर्ष में तुलसी की फसल के लिए 30 हेक्टेयर का लक्ष्य शासन से मिला है। जिसके तहत किसानों को 30 फीसदी अनुदान में बीज व दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इच्छुक कृषक विभाग की वेबसाइट में आनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
शासन से औषधीय फसलों पर जोर दिया जा रहा है। जबकि हकीकत में शासन जिलों को लक्ष्य देने में कंजूसी कर रहा है। कोरोना काल में किसी भी औषधीय खेती के लिए लक्ष्य तय नहीं किया गया और न ही बजट आवंटित किया गया। वर्ष 2021-22 में 40 हेक्टेयर में तुलसी की खेती का लक्ष्य मिला था। वहीं चालू सीजन में शासन ने 30 हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित किया है। जबकि अन्य औषधीय फसलों का लक्ष्य न मिलने से किसान मायूस हैं। वहीं तुलसी की बाजार में मांग न होने से ज्यादातर किसानों का माल खराब हो रहा है। जिससे किसान इसकी फसल करने में कतरा रहे हैं।
जनपद में औषधीय फसलों के लिए अपार संभावनाएं हैं। बलुई, दोमट व काबर मिट्टी का क्षेत्र होने के चलते इन फसलों की अच्छी पैदावार हो सकती है। वर्ष 2017-18 में 65 हेक्टेयर तुलसी, वर्ष 18-19 में 60 हेक्टेयर तुलसी, 25 हेक्टेयर एलोवेरा, 4.5 हेक्टेयर सतावर का लक्ष्य मिला था। वर्ष 2019-20 में 192 हेक्टेयर तुलसी, 20 हेक्टेयर एलोवेरा व पांच हेक्टेयर में सतावर, वर्ष 21-22 में 40 हेक्टेयर तुलसी का लक्ष्य मिला था। वहीं 23-24 में 30 हेक्टेयर में तुलसी की खेती कराए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
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राठ क्षेत्र के उमरिया निवासी किसान जयनरायन ने बताया कि तुलसी का अधिक उत्पादन होने के कारण बाजार में मांग कम है। जिसके चलते उसकी करीब 30 क्विंटल तुलसी की पत्ती डंप है। तुलसी की खेती में दांव लगाना घाटे का सौदा साबित हो रहा है।
चिल्ली गांव निवासी किसान श्यामलाल ने बताया कि दो साल से हो रही अत्यधिक बारिश के चलते फसल की क्वालिटी खराब हो जाती है। जिससे व्यापारी माल खरीदने में आनाकानी करते हैं। बताया कि करीब पांच क्विंटल तुलसी पत्ती घर में डंप है। जिसका कोई खरीदार नहीं है।
जिला उद्यान अधिकारी रमेश पाठक ने बताया कि चालू वर्ष में जिले को 30 हेक्टेयर में तुलसी का लक्ष्य मिला है। कहा कि कोरोना काल में दो वर्षों से औषधीय फसलों का कोई लक्ष्य नहीं मिला है। कहा कि शासन से मिली गाइडलाइन के मुताबिक 30 फीसदी अनुदान पर किसानों को बीज व दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। जिसके लिए इच्छुक किसान आनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
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शासन से औषधीय फसलों पर जोर दिया जा रहा है। जबकि हकीकत में शासन जिलों को लक्ष्य देने में कंजूसी कर रहा है। कोरोना काल में किसी भी औषधीय खेती के लिए लक्ष्य तय नहीं किया गया और न ही बजट आवंटित किया गया। वर्ष 2021-22 में 40 हेक्टेयर में तुलसी की खेती का लक्ष्य मिला था। वहीं चालू सीजन में शासन ने 30 हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित किया है। जबकि अन्य औषधीय फसलों का लक्ष्य न मिलने से किसान मायूस हैं। वहीं तुलसी की बाजार में मांग न होने से ज्यादातर किसानों का माल खराब हो रहा है। जिससे किसान इसकी फसल करने में कतरा रहे हैं।
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जनपद में औषधीय फसलों के लिए अपार संभावनाएं हैं। बलुई, दोमट व काबर मिट्टी का क्षेत्र होने के चलते इन फसलों की अच्छी पैदावार हो सकती है। वर्ष 2017-18 में 65 हेक्टेयर तुलसी, वर्ष 18-19 में 60 हेक्टेयर तुलसी, 25 हेक्टेयर एलोवेरा, 4.5 हेक्टेयर सतावर का लक्ष्य मिला था। वर्ष 2019-20 में 192 हेक्टेयर तुलसी, 20 हेक्टेयर एलोवेरा व पांच हेक्टेयर में सतावर, वर्ष 21-22 में 40 हेक्टेयर तुलसी का लक्ष्य मिला था। वहीं 23-24 में 30 हेक्टेयर में तुलसी की खेती कराए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
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राठ क्षेत्र के उमरिया निवासी किसान जयनरायन ने बताया कि तुलसी का अधिक उत्पादन होने के कारण बाजार में मांग कम है। जिसके चलते उसकी करीब 30 क्विंटल तुलसी की पत्ती डंप है। तुलसी की खेती में दांव लगाना घाटे का सौदा साबित हो रहा है।
चिल्ली गांव निवासी किसान श्यामलाल ने बताया कि दो साल से हो रही अत्यधिक बारिश के चलते फसल की क्वालिटी खराब हो जाती है। जिससे व्यापारी माल खरीदने में आनाकानी करते हैं। बताया कि करीब पांच क्विंटल तुलसी पत्ती घर में डंप है। जिसका कोई खरीदार नहीं है।
जिला उद्यान अधिकारी रमेश पाठक ने बताया कि चालू वर्ष में जिले को 30 हेक्टेयर में तुलसी का लक्ष्य मिला है। कहा कि कोरोना काल में दो वर्षों से औषधीय फसलों का कोई लक्ष्य नहीं मिला है। कहा कि शासन से मिली गाइडलाइन के मुताबिक 30 फीसदी अनुदान पर किसानों को बीज व दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। जिसके लिए इच्छुक किसान आनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
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