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एक्सडीआर टीबी को दे दी मात, फिर शुरू की नौकरी
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हमीरपुर। क्षय रोग (टीबी) अब लाइलाज बीमारी नहीं है। 25 वर्षीय युवक और 12 वर्ष के बालिका क्रमश: एक्सटेनसिवली ड्रग रेजिस्टेंस (एक्सडीआर) और मल्टी ड्रग रेजिसटेंस (एमडीआर) संक्रमण था। नियमित इलाज और पौष्टिक खानपान से दोनों ही पूरी तरह स्वस्थ हैं।
सुमेरपुर का निवासी युवक ने बताया कि एक फैक्टरी में जॉब करते पांच साल पूर्व टीबी की चपेट में आया था। 20 वर्ष की उम्र में टीबी हुई थी। लखनऊ में उपचार चला, लेकिन आराम न मिलने पर मप्र के नौगांव छानी गया तो दवाओं से आराम नहीं मिला। सरकारी अस्पताल में जांच कराई तो पता चला कि टीबी बिगड़कर एमडीआर हो गई है। दवाएं भी अस्पताल की खाईं, लेकिन बीच में छोड़ दिया। जिससे एमडीआर टीबी बिगड़कर एक्सडीआर में तब्दील हो गई। फिर टीबी अस्पताल से दवाएं ले डॉक्टरों के परामर्श पर अमल किया। आज एक्सडीआर टीबी को पूरी तरह से मात दे चुके हैं। इसी तरह शहर के एक मोहल्ले की 12 साल की बालिका भी इलाज में ढिलाई बरतने की वजह से एमडीआर की शिकार हो गई थी। जो लगातार डॉट्स की दवाएं खाने से ठीक हो चुकी है।
टीबी के आंकड़ों पर एक नजर
जिला क्षय रोग अधिकारी डा. महेश चंद्रा ने बताया कि जिले में 13 स्थानों पर टीबी की जांच सीबी नॉट मशीन से की जाती है। राठ व मौदहा में ट्रूनेट मशीन से जांच हो रही है।
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वर्ष 2020 में जनपद में शुरुआती टीबी के 1825, एमडीआर के 66 और एक्सडीआर के छह मरीज मिले। 2021 में शुरुआती टीबी के 2037, एमडीआर 37 और एक्सडीआर के सात मरीज मिले। वर्ष 2022 में अब तक शुरुआती टीबी के 196 और एमडीआर के तीन मरीज मिल चुके हैं।
एमडीआर के 74 मरीज उपचाराधीन
जिला डॉट्स प्लस ट्रीटमेंट कोआर्डिनेटर वरुण पांडेय ने बताया कि एमडीआर टीबी से ग्रसित 74 मरीज उपचाराधीन हैं। करीब छह एमडीआर टीबी से ग्रसित मरीज पूरी तरह से ठीक हो चुके हैं और एक्सडीआर टीबी से ग्रसित एक युवक नियमित उपचार और देखभाल से ठीक होकर सामान्य जीवन व्यतीत कर रहा है।
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सुमेरपुर का निवासी युवक ने बताया कि एक फैक्टरी में जॉब करते पांच साल पूर्व टीबी की चपेट में आया था। 20 वर्ष की उम्र में टीबी हुई थी। लखनऊ में उपचार चला, लेकिन आराम न मिलने पर मप्र के नौगांव छानी गया तो दवाओं से आराम नहीं मिला। सरकारी अस्पताल में जांच कराई तो पता चला कि टीबी बिगड़कर एमडीआर हो गई है। दवाएं भी अस्पताल की खाईं, लेकिन बीच में छोड़ दिया। जिससे एमडीआर टीबी बिगड़कर एक्सडीआर में तब्दील हो गई। फिर टीबी अस्पताल से दवाएं ले डॉक्टरों के परामर्श पर अमल किया। आज एक्सडीआर टीबी को पूरी तरह से मात दे चुके हैं। इसी तरह शहर के एक मोहल्ले की 12 साल की बालिका भी इलाज में ढिलाई बरतने की वजह से एमडीआर की शिकार हो गई थी। जो लगातार डॉट्स की दवाएं खाने से ठीक हो चुकी है।
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टीबी के आंकड़ों पर एक नजर
जिला क्षय रोग अधिकारी डा. महेश चंद्रा ने बताया कि जिले में 13 स्थानों पर टीबी की जांच सीबी नॉट मशीन से की जाती है। राठ व मौदहा में ट्रूनेट मशीन से जांच हो रही है।
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वर्ष 2020 में जनपद में शुरुआती टीबी के 1825, एमडीआर के 66 और एक्सडीआर के छह मरीज मिले। 2021 में शुरुआती टीबी के 2037, एमडीआर 37 और एक्सडीआर के सात मरीज मिले। वर्ष 2022 में अब तक शुरुआती टीबी के 196 और एमडीआर के तीन मरीज मिल चुके हैं।
एमडीआर के 74 मरीज उपचाराधीन
जिला डॉट्स प्लस ट्रीटमेंट कोआर्डिनेटर वरुण पांडेय ने बताया कि एमडीआर टीबी से ग्रसित 74 मरीज उपचाराधीन हैं। करीब छह एमडीआर टीबी से ग्रसित मरीज पूरी तरह से ठीक हो चुके हैं और एक्सडीआर टीबी से ग्रसित एक युवक नियमित उपचार और देखभाल से ठीक होकर सामान्य जीवन व्यतीत कर रहा है।