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डस्टबिन बने शोपीस, स्वच्छता से नाता नहीं
ब्यूरो, अमर उजाला/हमीरपुर
Updated Sat, 04 Jul 2015 10:57 PM IST
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ये केस तो महज बानगी हैं। अधिकारी हों या कर्मचारी, जिसका जब जहां पर मन
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हुआ, वहीं पर थूक दिया। उन पर स्वच्छता का कोई असर नहीं दिखाई दे रहा है।
केंद्र सरकार ने स्वच्छ भारत अभियान शुरू किया था।
उम्मीद थी कि सार्वजनिक स्थानों व कार्यालयों में गंदगी फैलाने वाले जागरूक हो जाएंगे, लेकिन इसका असर सिर्फ फोटो सेशन तक ही सीमित रह गया।
हालत यह है कि सरकारी कार्यालय हों या सार्वजनिक स्थान, हर जगह गंदगी मिल जाएगी। कार्यालयों में अगर डस्टबिन है तो भी लोग इनका प्रयोग नहीं कर रहे हैं।
दीवार हो या फर्श हर जगह पर थूक रहे हैं। बाजार में खरीददारी करके लोग सड़क पर ही कूड़ा-करकट फेंक देते हैं। नगर पालिका भी डस्टबिन रखवाने में कंजूसी कर रही है।
जिला मुख्यालय का बेसिक शिक्षा कार्यालय, यहां पर सारा दिन दूसरों को शिक्षा देने वाले गुरुओं का आना जाना रहता है। साथ ही तमाम लोग अपनी समस्याएं लेकर आते हैं।
कार्यालय के नीचे बेसिक शिक्षा के कर्मचारी/अधिकारी बैठते हैं तो ऊपरी मंजिल में सर्व शिक्षा अभियान और वित्त लेखा कार्यालय संचालित है, लेकिन यहां सीढ़ियों सहित हर कोने की दीवार लाल कलर से रंगी मिलेगी।
जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में स्वच्छता अभियान का ख्याल नहीं रखा जा रहा है। हालांकि यहां पर एक डस्टबिन थूकने के लिए रखा गया है, लेकिन थूकने वालों को इतनी जल्दी रहती है कि वह डस्टबिन तक थूकने तो जाते हैं मगर पान मसाले की पीक इतनी तेज होती है कि आसपास की दीवार लाल नजर आती है।
तेज बहादुर मिश्र कहते हैं जब तक लोग अपनी सोच नहीं बदलेंगे, तब तक कुछ नहीं होने वाला। केंद्र सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन शुरू किया, लेकिन इसका कहीं असर नहीं दिखाई दे रहा है।
प्रशांत कुमार शुक्ला के मुताबिक केंद्र सरकार सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने वालों के खिलाफ कानून का मसौदा तैयार कर रही है। यह स्वागत योग्य कदम है। शिवकुमार सेठी कहते हैं जब कानून बन जाएगा तो लोग कुछ हद तक डरेंगे।
डीआईओएस डा.चंद्रशेखर मालवीय ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी न फैले इसके लिए मौरंग भरा कटा ड्रम रखवाए गए हैं। फिर भी लोग इधर-उधर पीक मारकर दीवार लाल कर रहे हैं। इसके लिए वह हर 15 दिन में दीवारों को पुतवाते हैं।
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उम्मीद थी कि सार्वजनिक स्थानों व कार्यालयों में गंदगी फैलाने वाले जागरूक हो जाएंगे, लेकिन इसका असर सिर्फ फोटो सेशन तक ही सीमित रह गया।
हालत यह है कि सरकारी कार्यालय हों या सार्वजनिक स्थान, हर जगह गंदगी मिल जाएगी। कार्यालयों में अगर डस्टबिन है तो भी लोग इनका प्रयोग नहीं कर रहे हैं।
दीवार हो या फर्श हर जगह पर थूक रहे हैं। बाजार में खरीददारी करके लोग सड़क पर ही कूड़ा-करकट फेंक देते हैं। नगर पालिका भी डस्टबिन रखवाने में कंजूसी कर रही है।
जिला मुख्यालय का बेसिक शिक्षा कार्यालय, यहां पर सारा दिन दूसरों को शिक्षा देने वाले गुरुओं का आना जाना रहता है। साथ ही तमाम लोग अपनी समस्याएं लेकर आते हैं।
कार्यालय के नीचे बेसिक शिक्षा के कर्मचारी/अधिकारी बैठते हैं तो ऊपरी मंजिल में सर्व शिक्षा अभियान और वित्त लेखा कार्यालय संचालित है, लेकिन यहां सीढ़ियों सहित हर कोने की दीवार लाल कलर से रंगी मिलेगी।
जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में स्वच्छता अभियान का ख्याल नहीं रखा जा रहा है। हालांकि यहां पर एक डस्टबिन थूकने के लिए रखा गया है, लेकिन थूकने वालों को इतनी जल्दी रहती है कि वह डस्टबिन तक थूकने तो जाते हैं मगर पान मसाले की पीक इतनी तेज होती है कि आसपास की दीवार लाल नजर आती है।
तेज बहादुर मिश्र कहते हैं जब तक लोग अपनी सोच नहीं बदलेंगे, तब तक कुछ नहीं होने वाला। केंद्र सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन शुरू किया, लेकिन इसका कहीं असर नहीं दिखाई दे रहा है।
प्रशांत कुमार शुक्ला के मुताबिक केंद्र सरकार सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने वालों के खिलाफ कानून का मसौदा तैयार कर रही है। यह स्वागत योग्य कदम है। शिवकुमार सेठी कहते हैं जब कानून बन जाएगा तो लोग कुछ हद तक डरेंगे।
डीआईओएस डा.चंद्रशेखर मालवीय ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी न फैले इसके लिए मौरंग भरा कटा ड्रम रखवाए गए हैं। फिर भी लोग इधर-उधर पीक मारकर दीवार लाल कर रहे हैं। इसके लिए वह हर 15 दिन में दीवारों को पुतवाते हैं।
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