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सात वर्ष बाद भी नहीं लौटा नाबालिग
अमर उजाला ब्यूरो, हमीरपुर
Updated Mon, 06 Mar 2017 10:51 PM IST
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प्रतीकात्मक फोटो
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घटना कितनी भी बड़ी हो और संवेदनशील हो। लेकिन कभी-कभी पुलिस ऐसी चूक करती है। जिससे खुद कटघरे में खड़ी हो जाती है। इसकी जीती-जागती मिसाल सिजवाही गांव से करीब सात वर्ष पूर्व एक नाबालिग को नौकरी का झांसा देकर ले जाने के मामले को पुलिस ने नजरअंदाज कर दिया। इस मामले में
पीड़ित पक्ष न्यायालय गया और न्यायालय ने 2015 में इस मामले की एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए। लेकिन इस पर भी पुलिस नहीं चेती। पीड़ित पक्ष ने पुन: अदालत के दरवाजे खटखटाए। तब कहीं जाकर यह मामला तीन मार्च को धारा 353 आईपीसी व एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। अब
तक उसका कोई सुराग नहीं लगा है। सिजवाही गांव के राजकुंवर पत्नी गंगवा अहिरवार के मुताबिक 18 मई 2011 को उसके पुत्र उदयभान (16) को गांव के बालाराम, प्रेम व कल्ला नौकरी का झांसा देकर उसकी जानकारी के बिना ले गए। जानकारी मिलने पर उसने अपहरण का मामला दर्ज कराने के लिए पुलिस
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को प्रार्थना पत्र दिया। लेकिन पुलिस ने सिर्फ खानापूरी की और उसके बेटे को घर पहुंचाने के लिए आरोपियों के परिजनों पर दबाव बनाया। लेकिन बेटे न आने पर उसने न्यायालय की शरण ली। अदालत से 156 (3) के तहत मामला दर्ज कराने की मांग की। 2015 में अदालत ने इस मामले का मुकदमा दर्जकर
विवेचना के आदेश दिए। लेकिन फिर पुलिस ने इस आदेश को नजर अंदाज कर दिया। इसके बाद पुन: पीड़ित अदालत पहुंचे और आदेश को अमल में लाए जाने की फरियाद लगाई। तब कहीं जाकर अब तीन मार्च को पुलिस ने धारा 363 आईपीसी व एससी एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। अब
क्षेत्राधिकारी की सक्रियता से उसकी तलाश की सरगर्मियां बढ़ गई हैं। इस मामले की पड़ताल करने रविवार को सीओ आरएन सिंह गांव पहुंचे। उन्होंने बताया कि इसमें पुलिस से चूक हुई है और अभी भी युवक का कहीं सही ठिकाना पता नहीं चल सका है। अलबत्ता उसके गुजरात में होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। इसकी तलाश के लिए अब पुलिस की टीम भेजी जाएगी।
उदयभान का अब तक कोई सुराग नहीं
गौरतलब है कि पीड़ित राजकुंवर का पति गंगवा भी दिल्ली में मजदूरी करता था। मौजूदा समय में वह अहमदाबाद में मजदूरी कर रहा है। पुलिस को जांच में स्पष्ट हुआ के गांव के करीब 100 लोग गुजरात के अहमदाबाद में मजदूरी करते हैं। मई 2011 में उदयभान को ले जाने वाले दो आरोपी भी अहमदाबाद में हैं। लेकिन उदयभान का कोई सुराग नहीं है। अनुमान लगाया जा रहा है कि उसे या तो बेच दिया गया या बंधक बनाकर रखा गया है।
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पीड़ित पक्ष न्यायालय गया और न्यायालय ने 2015 में इस मामले की एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए। लेकिन इस पर भी पुलिस नहीं चेती। पीड़ित पक्ष ने पुन: अदालत के दरवाजे खटखटाए। तब कहीं जाकर यह मामला तीन मार्च को धारा 353 आईपीसी व एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। अब
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तक उसका कोई सुराग नहीं लगा है। सिजवाही गांव के राजकुंवर पत्नी गंगवा अहिरवार के मुताबिक 18 मई 2011 को उसके पुत्र उदयभान (16) को गांव के बालाराम, प्रेम व कल्ला नौकरी का झांसा देकर उसकी जानकारी के बिना ले गए। जानकारी मिलने पर उसने अपहरण का मामला दर्ज कराने के लिए पुलिस
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को प्रार्थना पत्र दिया। लेकिन पुलिस ने सिर्फ खानापूरी की और उसके बेटे को घर पहुंचाने के लिए आरोपियों के परिजनों पर दबाव बनाया। लेकिन बेटे न आने पर उसने न्यायालय की शरण ली। अदालत से 156 (3) के तहत मामला दर्ज कराने की मांग की। 2015 में अदालत ने इस मामले का मुकदमा दर्जकर
विवेचना के आदेश दिए। लेकिन फिर पुलिस ने इस आदेश को नजर अंदाज कर दिया। इसके बाद पुन: पीड़ित अदालत पहुंचे और आदेश को अमल में लाए जाने की फरियाद लगाई। तब कहीं जाकर अब तीन मार्च को पुलिस ने धारा 363 आईपीसी व एससी एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। अब
क्षेत्राधिकारी की सक्रियता से उसकी तलाश की सरगर्मियां बढ़ गई हैं। इस मामले की पड़ताल करने रविवार को सीओ आरएन सिंह गांव पहुंचे। उन्होंने बताया कि इसमें पुलिस से चूक हुई है और अभी भी युवक का कहीं सही ठिकाना पता नहीं चल सका है। अलबत्ता उसके गुजरात में होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। इसकी तलाश के लिए अब पुलिस की टीम भेजी जाएगी।
उदयभान का अब तक कोई सुराग नहीं
गौरतलब है कि पीड़ित राजकुंवर का पति गंगवा भी दिल्ली में मजदूरी करता था। मौजूदा समय में वह अहमदाबाद में मजदूरी कर रहा है। पुलिस को जांच में स्पष्ट हुआ के गांव के करीब 100 लोग गुजरात के अहमदाबाद में मजदूरी करते हैं। मई 2011 में उदयभान को ले जाने वाले दो आरोपी भी अहमदाबाद में हैं। लेकिन उदयभान का कोई सुराग नहीं है। अनुमान लगाया जा रहा है कि उसे या तो बेच दिया गया या बंधक बनाकर रखा गया है।