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Hamirpur News: बुंदेलखंड की प्यास बुझाने वाली चंद्रावल नदी नाले में तब्दील

Tue, 06 Jun 2023 11:15 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 06 Jun 2023 11:15 PM IST
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Bundelkhand's thirst-quenching Chandrawal river turned into a drain
हमीरपुर। बुंदेलखंड के हमीरपुर व महोबा जनपद को पानीदार बनाने वाली चंद्रावल नदी मौजूदा समय में अपना अस्तित्व बचाने के लिए जूझ रही है। मौजूदा समय में ज्यादातर स्थानों पर नदी नाले के रूप में तब्दील हो गई है। महोबा जिले के मदनताल समेत अन्य जल ग्रहण क्षेत्रों से पानी लेकर चांदौ गांव से निकली इस नदी से दोनों जनपदों के किसानों को लाभ मिलता था। जिले की मौदहा तहसील के 35 गांवों के किसान इसके पानी से खेतों की सिंचाई करते थे। नदी सूखने से गर्मियों के मौसम में सिंचाई तो दूर सामान्य उपयोग के लिए भी पानी नहीं मिलता।
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चंद्रावल नदी 67 किमी की दूरी तय कर जिले की सीमा में केन नदी में मिलती है। नदी का नामकरण महोबा के राजा परमाल की बेटी राजकुमारी चंद्रावल के नाम पर पड़ा। नदी की विशालता को देखते हुए इस पर चंद्रावल बांध का निर्माण कराया गया। यह नदी महोबा में करीब 30 व हमीरपुर में 65 किमी तक फैली है। करीब तीन दशक पूर्व तक यह नदी किसानों के लिए जीवनदायिनी थी। ग्रामीण खेतों की सिंचाई के साथ पेयजल व अन्य कामों में नदी के पानी का उपयोग करते थे। धीरे-धीरे अतिक्रमण व मिट्टी जमाव के कारण पानी धारण करने की क्षमता कम हो गई और नदी ने नाले का रूप ले लिया। नदी किनारे बसे जिले के गुढ़ा, छिरका, गहबरा, मवैया, मदारपुर, छिमौली, सिजनौड़ा, परछा, पढ़ोहरी, परछछ, ख़ैर, टोलामाफ़, किसवाही व कैथी आदि गांवों के ग्रामीण नदी के सूखने से काफी परेशान हैं।
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जयकरन निषाद ने बताया कि ग्राम नायकपुरवा में बिछुही नाला, ग्राम इचौली में श्याम नाला सहित कई गांवो के नाले इसमें समाहित हो जाते हैं। वहीं मौदहा के चकदहा गांव से निकला बड़ेरी नाला सिजनौड़ा के पास चंद्रावल में समाहित होता हैं। बांदा के खैरादा से निकल कर कारकी नाला जो गुसियारी, कपसा, सिजवाही टिकरी होते हुए चंद्रावल में मिला हैं। इसके अलावा अन्य नाले भी नदी में मिलते है। बरसात में नदी विकराल रूप धारण कर लेती है। जबकि गर्मियों में सूखकर नाले का आकार ले लेती है। नदी की खोदाई कराकर इसे गहरा कराने की जरूरत है।
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छिमौली निवासी प्रभुदयाल ने बताया किनदी में रपटा बनने से मिट्टी का जमाव हो गया है। इसी कारण नदी का अस्तित्व खोने के कगार पर है। मिटटी का जमाव होने से मलबा बह नहीं पाता। जिम्मेदार भी इसकी सफाई पर ध्यान नहीं देते। नदी ने 80 के दशक में रौद्ररूप धारण किया था। उस समय नरायच का पुल ढह गया था और हजारों लोगों को घर छोड़कर ऊंचाई वाले हिस्से में बसना पड़ा था। पहले खेतों को सींचने वाली नदी में आज सिर्फ कीचड़ बचा है। नदी में जल संरक्षण की योजना बनाई जानी चाहिए ताकि पानी का साल भर उपयोग हो सके।

डीसी मनरेगा महेंद्र प्रसाद चौबे ने बताया कि चंद्रावल नदी से जुड़े नालों के साथ नदी के उथले हिस्सों की मनरेगा से खोदाई कराई जाएगी। कार्ययोजना तैयार कराकर जल्द कार्य शुरू कराया जाएगा।
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