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क्षय रोग कार्यालय के पीछे जला दी गई टीबी की लाखों की दवा
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जिला असपताल परिसर में क्षय रोग कार्यालय दवा जलने की सूचना पा कर क्षयरोग अधिकारी डा. सौरभ से पूछ ता
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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टीबी मरीजों को निशुल्क दी जाने वाली दवा जलाने का मामला प्रकाश में आया है। अप्रैल 2020 में एक्सपायर होने वाली लाखों की दवाएं छह माह पहले जलाने की जानकारी मिलने के बाद डीएम के निर्देश पर पहुंचीं सीएमओ ने मामले की जांच की। मरीजों में निशुल्क वितरित की जाने वाली मोनापॉस (डाट्स) दवा सोमवार को क्षयरोग नियंत्रण कार्यालय के पास खुले में जलाई जा रही थी। जानकारी मिलते ही लोगों की भीड़ जुट गई। इसी बीच जब लोगों ने चेक किया तो दवाओं की एक्सपायरी छह माह बाद मिली। दवाएं क्यों जलाई गईं, इसके पीछे किसका हाथ है यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा, लेकिन दबी जुबान से स्वास्थ्य विभाग के ही कुछ लोगों ने बताया कि दवा इसलिए जलाई गई ताकि स्टाक की कमी दिखाकर बजट में हेरफेर की जा सके।
इस संबंध में जिला क्षयरोग अधिकारी डॉ. सौरभ चतुर्वेदी से जब पूछा गया तो उन्होंने बताया कि घटना के समय मैं बैठक में था। बाद में जानकारी हुई तो जांच का आदेश दिया गया है। उधर, डीएम दीपक मीणा के निर्देश पर जांच करने पहुंचीं सीएमओ डॉ. सीमा राय ने बताया कि दवा नहीं बल्कि गिलिस्टर (दवा का पत्ता) जलाया गया है। कुछ लोगों ने खुराफातवश वहां दवा के पैकेट फेंक दिए थे। फिर भी हम जांच करा रहे हैं कि किस बैच नंबर की कितनी दवा, कहां-कहां भेजी गई है ताकि स्टाक का पता चल सके।
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इस संबंध में जिला क्षयरोग अधिकारी डॉ. सौरभ चतुर्वेदी से जब पूछा गया तो उन्होंने बताया कि घटना के समय मैं बैठक में था। बाद में जानकारी हुई तो जांच का आदेश दिया गया है। उधर, डीएम दीपक मीणा के निर्देश पर जांच करने पहुंचीं सीएमओ डॉ. सीमा राय ने बताया कि दवा नहीं बल्कि गिलिस्टर (दवा का पत्ता) जलाया गया है। कुछ लोगों ने खुराफातवश वहां दवा के पैकेट फेंक दिए थे। फिर भी हम जांच करा रहे हैं कि किस बैच नंबर की कितनी दवा, कहां-कहां भेजी गई है ताकि स्टाक का पता चल सके।
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