इलाहाबाद जंक्शन के सिविल लाइंस साइड में खड़ी कैशवैन से 1.54 करोड़ रुपये चोरी हो गए। कैशवैन के साथ पहुंचे तीन कर्मचारियों को जानकारी तब हुई, जब वह दूसरे एटीएम में रुपये डालने पहुंचे। फिलहाल भूमिका संदिग्ध लगने पर पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया है। देर रात तक उनसे पूछताछ जारी थी।
प्रयागराजः जंक्शन के बाहर खड़ी कैशवैन से 1.54 करोड़ रुपये की चोरी, नकदी से भरा बक्सा उड़ाया
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जंक्शन पर कैशवैन से चोरी होने के बाद खंगाली ट्रेनें
प्रयागराज। इलाहाबाद जंक्शन के सिविल लाइंस साइड में कैश वैन से 1.64 करोड़ की चौरी होने के बाद रेल महकमे में हड़कंप मच गया। घटना के बाद रेल सुरक्षा बल के तमाम अफसर जंक्शन पहुंच गए। इस दौरान आरपीएफ के डीआईजी आरएसपी सिंह, सीनियर डीएससी मनोज कुमार, आरपीएफ इंसपेक्टर बीपी सिंह आदि के नेतृत्व में तमाम ट्रेनों की चेकिंग की गई। संदिग्ध दिखने वाले लोगों से पूछताछ भी की गई।
लाखों-करोड़ों रुपये के मामले, लेकिन गंभीर नहीं पुलिस
प्रयागराज। घटनाएं होने के एक-दो दिन या हफ्ते भर तक पुलिस भले ही तेजी दिखाए। लेकिन सच यह है कि एटीएम या बैंक से रुपये चोरी या गायब होने के मामलों को पुलिस गंभीरता से नहीं लेती। सलोरी, मम्फोर्डगंज में एटीएम से लाखों की चोरी व सुलेमसराय में सवा करोड़ के गबन के मामले इसका प्रत्यक्ष उदाहरण हैं।
कर्नलगंज केे सलोरी में इसी साल 28 मई की रात यूनियन बैंक ऑफ इंडिया का एटीएम काटकर चोर 11.51 लाख रुपये उड़ा ले गए थे। इसी तरह पिछले साल 30 नवंबर को मम्फोर्डगंज में यूनियन बैंक का एटीएम काटकर बदमाश 16.61 लाख रुपये चोरी कर ले गए थे। दोनों मामलों का खुलासा अब तक नहीं हो सका है जबकि इसमें क्राइम ब्रांच, स्वाट के तेजतर्रार माने जाने वाले पुलिसकर्मियों की टीम भी लगाई गई। उधर जुलाई में सुलेमसराय की बैंक ऑफ इंडिया स्थित शाखा से सवा चार करोड़ के गबन के मामले में तीन महीने बाद भी पुलिस की जांच पूरी नहीं हो पाई है।
रिपोर्ट दर्ज कराने तक सीमित रहती है कार्रवाई
जानकार बताते हैं कि बैंक या फिर एटीएम में रखे एक-एक रुपयों का बीमा होता है। संभावित खतरे को देखते हुए कैश मैनेजमेंट कंपनी अपनी पूरी रकम का बीमा कराती है। रुपये चोरी या फिर अन्य किसी तरह के नुकसान पर सीधे तौर पर कैश मैनेजमेंट कंपनी ही जिम्मेदार होती है और यही वजह है कि उसकी ही ओर से मामले की रिपोर्ट दर्ज कराई जाती है। हालांकि एफआईआर दर्ज होने पर जांच पड़ताल के बाद बीमा कंपनी रकम का भुगतान कर देता है ऐसे में बैंक भी चुप होकर बैठ जाता है। उधर कैश मैनेजमेंट कंपनी की कार्रवाई भी रिपोर्ट दर्ज कराने तक ही सीमित होती है। यही वजह है कि किसी तरह का दबाव न होने के कारण पुलिस ऐसे मामलों को लेकर गंभीर नहीं होती।
वैन में लगा था ताला, चोरी हो गया डेढ़ करोड़ रुपयों भरा बक्सा
प्रयागराज। जंक्शन के बाहर कैशवैन से 1.64 करोड़ रुपये चोरी होने की घटना बेहद ही हैरान करने वाली रही। जिस वैन से रुपये चोरी होने की बात बताई गई, उसके पिछले दरवाजे में ताला लगा था। दो अन्य दरवाजे भी बंद थे। ऐसे में अफसर भी हैरान थे कि कोई आखिर कैसे इतनी बड़ी रकम से भरा बक्सा लेकर भाग निकला और किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी।
सूत्रों के मुताबिक, तीनों कर्मचारियों ने पूछताछ में बताया है कि सुबह 11.30 बजे के करीब वह कुल 2.30 करोड़ रुपये लेकर कैशवैन से निकले। एजी ऑफिस, बम्हरौली समेत तीन एटीएम मेें नगदी डालने के बाद वह शाम को 5-5.30 बजे के करीब जंक्शन के सिविल लाइंस साइड स्थित एसबीआई एटीएम पर पहुंचे। यहां गाड़ी से उतरकर कस्टोडियन बलराम व गनमैन अजय एटीएम में पहुंच गए और गार्ड दिनेश को एटीएम से बाहर जाने को कहा। इस दौरान ड्राइवर राजकुमार गाड़ी में ही बैठा था। गार्ड दिनेश का कहना है कि कुछ देर बाद राजकुमार भी गाड़ी से उतरकर एटीएम के पास आ गया। कुछ देर एटीएम के पास रहने के बाद वह गाड़ी के पास टहलने लगा।
नगदी डालने के बाद कस्टोडियन व गनमैन आकर गाड़ी में बैठे और फिर तीनों कैशवैन लेकर शाहगंज चले गए। वहां जानकारी हुई कि नगदी भरा बक्सा गायब है जिसके बाद उनके होश उड़ गए। इसके बाद पहले 100 नंबर और फिर पुलिस अफसर पहुंचे। सबसे खास बात यह रही कि जिस कैश वैन से लगभग डेढ़ करोड़ रुपये चोरी होने की बात बताई जा रही है, उसके पिछले दरवाजे पर ताला लगा था। वाहन में किसी तरह की कोई तोड़फोड़ भी नहीं थी। ऐसे में इतनी ज्यादा मात्रा में नगदी भरा बक्सा चोरी चले जाने की बात सुनकर अफसर भी हैरान रह गए। पुलिस का कहना है कि फिलहाल कर्मचारियों से मिली जानकारी के आधार पर जांच पड़ताल की जा रही है।