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गोरखपुर में प्लेवे स्कूल की चार वर्षीय छात्रा के साथ दुष्कर्म, आरोपी वैन चालक भागा
Tue, 24 Dec 2019 10:59 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
डिजिटल न्यूज डेस्क, पादरी बाजार (गोरखपुर)।
डिजिटल न्यूज डेस्क, पादरी बाजार (गोरखपुर)।
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 24 Dec 2019 10:59 AM IST
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बच्ची से दुष्कर्म का आरोपी।
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शाहपुर थाना क्षेत्र में स्थित एक प्लेवे स्कूल की चार वर्षीय छात्रा के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया है। आरोपी उसी स्कूल का वैन चालक है। घटना के बाद से चालक फरार है। बच्ची के पिता की तहरीर पर पुलिस ने आरोपी वैन चालक खोराबार के पटपर निवासी रमेश यादव के खिलाफ दुष्कर्म और पाक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस आरोपी चालक की पत्नी को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।
जानकारी के मुताबिक घटना बीते 18 दिसंबर की है। शाहपुर इलाके के एक मोहल्ले की चार वर्षीय बच्ची इसी इलाके में स्थित एक प्लेवे स्कूल में पढ़ती है। वह प्रतिदिन स्कूल वैन से पढ़ने जाती है। पुलिस को दी तहरीर में छात्रा के पिता ने कहा है कि बेटी 18 दिसंबर को स्कूल गई थी।
अन्य बच्चों को घर छोड़ने के बाद स्कूल वैन में अकेला पाकर चालक रमेश यादव ने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। बच्ची घर पहुंची तो उसके कपड़े बदलने के दौरान मां को घटना की जानकारी हुई। परिजनों ने अगले दिन स्कूल के प्रिंसिपल से शिकायत की। चूंकि स्कूल की छुट्टी होने के कारण चालक आया नहीं था, लिहाजा प्रिंसिपल ने उसे 20 दिसंबर को बुलाया था। छात्रा के परिजन भी बुलाए गए थे। छात्रा के परिजन तो आए, लेकिन चालक फरार हो गया। इसके बाद छात्रा केमाता-पिता और स्कूल के प्रिंसिपल शाहपुर थाने पहुंचे और शिकायत की। पुलिस तत्काल केस दर्ज कर आरोपी चालक की तलाश में जुट गई।
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जानकारी के मुताबिक घटना बीते 18 दिसंबर की है। शाहपुर इलाके के एक मोहल्ले की चार वर्षीय बच्ची इसी इलाके में स्थित एक प्लेवे स्कूल में पढ़ती है। वह प्रतिदिन स्कूल वैन से पढ़ने जाती है। पुलिस को दी तहरीर में छात्रा के पिता ने कहा है कि बेटी 18 दिसंबर को स्कूल गई थी।
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अन्य बच्चों को घर छोड़ने के बाद स्कूल वैन में अकेला पाकर चालक रमेश यादव ने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। बच्ची घर पहुंची तो उसके कपड़े बदलने के दौरान मां को घटना की जानकारी हुई। परिजनों ने अगले दिन स्कूल के प्रिंसिपल से शिकायत की। चूंकि स्कूल की छुट्टी होने के कारण चालक आया नहीं था, लिहाजा प्रिंसिपल ने उसे 20 दिसंबर को बुलाया था। छात्रा के परिजन भी बुलाए गए थे। छात्रा के परिजन तो आए, लेकिन चालक फरार हो गया। इसके बाद छात्रा केमाता-पिता और स्कूल के प्रिंसिपल शाहपुर थाने पहुंचे और शिकायत की। पुलिस तत्काल केस दर्ज कर आरोपी चालक की तलाश में जुट गई।
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दो बच्चों का पिता है चालक
आरोपी चालक रमेश शादीशुदा है और उसके दो बच्चे हैं। वह स्कूल में पिछले एक वर्ष से काम कर रहा था। स्कूल के प्रिंसिपल ने बताया कि चालक पहले प्रबंधक के घर पर नौकर था।
एक साल पहले वह स्कूल वैन चलाने लगा। पिछले एक वर्ष से स्कूल के टीचरों को घर से लाने और छोड़ने का काम करता था। कभी-कभी जब चालक नहीं रहते थे तो वह स्कूल के बच्चों को भी वैन से घर से लाता और ले जाता था। परिजनों की शिकायत पर उसे नौकरी से निकाल दिया गया है। प्रबंधतंत्र ने खुद परिजनों के साथ थाने जाकर आरोपी चालक के खिलाफ केस दर्ज कराया है।
ये है सजा
12 वर्ष या उससे कम उम्र की बच्ची के साथ दुष्कर्म और पाक्सो एक्ट में केस दर्ज होने के बाद विवेचना में यदि आरोप सही पाया जाता है तो ऐसे मामलों में आजीवन कारावास या फिर फांसी की सजा होती है। इस मामले में भी दुष्कर्म, पाक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज हुआ है।
‘वैन चालकों के चरित्र सत्यापन की जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधन की’
आरटीओ प्रवर्तन डीडी मिश्रा ने बताया कि स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह अपने स्कूली वाहनों के चालकों का चरित्र सत्यापन अवश्य कराएं। इसके लिए शिक्षा विभाग के अधिकारियों को जांच की जिम्मेदारी दी गई है। अगर ऐसा नहीं होता है तो इसमें ड्राइवर और स्कूल प्रबंधक के खिलाफ केस दर्ज कराकर कार्रवाई की जाएगी।
एक साल पहले वह स्कूल वैन चलाने लगा। पिछले एक वर्ष से स्कूल के टीचरों को घर से लाने और छोड़ने का काम करता था। कभी-कभी जब चालक नहीं रहते थे तो वह स्कूल के बच्चों को भी वैन से घर से लाता और ले जाता था। परिजनों की शिकायत पर उसे नौकरी से निकाल दिया गया है। प्रबंधतंत्र ने खुद परिजनों के साथ थाने जाकर आरोपी चालक के खिलाफ केस दर्ज कराया है।
ये है सजा
12 वर्ष या उससे कम उम्र की बच्ची के साथ दुष्कर्म और पाक्सो एक्ट में केस दर्ज होने के बाद विवेचना में यदि आरोप सही पाया जाता है तो ऐसे मामलों में आजीवन कारावास या फिर फांसी की सजा होती है। इस मामले में भी दुष्कर्म, पाक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज हुआ है।
‘वैन चालकों के चरित्र सत्यापन की जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधन की’
आरटीओ प्रवर्तन डीडी मिश्रा ने बताया कि स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह अपने स्कूली वाहनों के चालकों का चरित्र सत्यापन अवश्य कराएं। इसके लिए शिक्षा विभाग के अधिकारियों को जांच की जिम्मेदारी दी गई है। अगर ऐसा नहीं होता है तो इसमें ड्राइवर और स्कूल प्रबंधक के खिलाफ केस दर्ज कराकर कार्रवाई की जाएगी।