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शस्त्र लाइसेंस की चर्चा से गरमाया माहौल
गोरखपुर। अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 29 Feb 2016 08:29 PM IST
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शस्त्र लाइसेंस पर लगी रोक हटाने की सूचना ने कलेक्ट्रेट में सोमवार को चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया। शासन के आदेश का हवाला देते यह मामला सोशल मीडिया पर भी छाया रहा। अफसरों से लेकर असलहा दफ्तर तक भी कई लोग तस्दीक करने पहुंच गए। हालांकि, प्रशासन ने शासन की तरफ से ऐसे किसी भी निर्देश की जानकारी मिलने से इनकार किया है। अमर उजाला से हुई बातचीत में डीएम ओएन सिंह ने कहा कि शस्त्र लाइसेंस जारी करने पर रोक अब भी बरकरार है। इसमें छूट देने या लाइसेंस जारी करने को लेकर शासन की तरफ से जारी कोई भी दिशा निर्देश उन्हें नहीं मिला है।
दोपहर 12 बजे के करीब कलेक्ट्रेट के साथ ही सोशल मीडिया पर चर्चा उठी कि हाई कोर्ट के आदेश के बाद शासन से नए शस्त्र लाइसेंस जारी करने को लेकर जिला प्रशासन को निर्देश जारी कर दिया गया है। यही नहीं एक विशेष सचिव की तरफ से जारी आदेश का हवाला देते हुए बताया गया कि अगर कोई व्यक्ति दूसरे लाइसेंस के लिए आवेदन करता है तो कमिश्नर की अध्यक्षता में गठित समिति की सहमति के बाद ही डीएम लाइसेंस स्वीकृत करेंगे। इसी तरह तीसरे लाइसेंस के संबंध में कमिश्नर की अध्यक्षता में गठित समिति के माध्यम से सचिव गृह विभाग को आवेदक की फाइल भेजी जाएगी। यहां स्वीकृति मिलने के बाद ही डीएम इस तरह के लाइसेंस जारी कर सकेंगे।
दरअसल पिछले चार साल से अधिक समय से लाइसेंस जारी करने पर लगी रोक और जिले में असलहों के प्रति लोगों की बढ़ती चाहत ने इस चर्चा को तेजी से लोगों के बीच फै ला दिया। बता दें कि वर्ष 2012 में पदभार संभालते ही पूर्व डीएम रवि कुमार एनजी ने शस्त्र लाइसेंस जारी करने पर पूरी तरह से रोक लगा दी। यही नहीं दबाव बढ़ा तो उन्होंने फार्म बेचने पर भी प्रतिबंध लगा दिया। अभी यह रोक जारी ही थी कि हाई कोर्ट ने भी शस्त्र लाइसेंस जारी करने पर सख्ती कर दी। तब से अभी तक सिर्फ दो दर्जन लोगों को ही लाइसेंस जारी हो सके, जिनमें से करीब आठ मामले विरासत के हैं।
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दोपहर 12 बजे के करीब कलेक्ट्रेट के साथ ही सोशल मीडिया पर चर्चा उठी कि हाई कोर्ट के आदेश के बाद शासन से नए शस्त्र लाइसेंस जारी करने को लेकर जिला प्रशासन को निर्देश जारी कर दिया गया है। यही नहीं एक विशेष सचिव की तरफ से जारी आदेश का हवाला देते हुए बताया गया कि अगर कोई व्यक्ति दूसरे लाइसेंस के लिए आवेदन करता है तो कमिश्नर की अध्यक्षता में गठित समिति की सहमति के बाद ही डीएम लाइसेंस स्वीकृत करेंगे। इसी तरह तीसरे लाइसेंस के संबंध में कमिश्नर की अध्यक्षता में गठित समिति के माध्यम से सचिव गृह विभाग को आवेदक की फाइल भेजी जाएगी। यहां स्वीकृति मिलने के बाद ही डीएम इस तरह के लाइसेंस जारी कर सकेंगे।
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दरअसल पिछले चार साल से अधिक समय से लाइसेंस जारी करने पर लगी रोक और जिले में असलहों के प्रति लोगों की बढ़ती चाहत ने इस चर्चा को तेजी से लोगों के बीच फै ला दिया। बता दें कि वर्ष 2012 में पदभार संभालते ही पूर्व डीएम रवि कुमार एनजी ने शस्त्र लाइसेंस जारी करने पर पूरी तरह से रोक लगा दी। यही नहीं दबाव बढ़ा तो उन्होंने फार्म बेचने पर भी प्रतिबंध लगा दिया। अभी यह रोक जारी ही थी कि हाई कोर्ट ने भी शस्त्र लाइसेंस जारी करने पर सख्ती कर दी। तब से अभी तक सिर्फ दो दर्जन लोगों को ही लाइसेंस जारी हो सके, जिनमें से करीब आठ मामले विरासत के हैं।
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