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एजेंटों ने थाने पर किया प्रदर्शन
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Updated Wed, 20 Apr 2016 08:27 PM IST
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कमिश्नर दफ्तर पर प्रदर्शन करतीं ठगी की शिकार हुई महिला एजेंट।
- फोटो : shivharsh
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एलआईसी के नाम पर एक शख्स ने करोड़ों की ठगी की है। रोजगार के नाम पर जुड़ी महिला एजेंटों के मुताबिक दस करोड़ रुपये की ठगी हुई है। बुधवार को एजेंटों ने कमिश्नर से मुलाकात कर कार्रवाई की मांग की। एजेंटों ने कैंट थाने पर प्रदर्शन कर तहरीर दी। दर्ज नहीं हो सका था। इस दौरान एक महिला एजेंट बेहोश भी हो गई।
थाने पहुंची इंद्रोनगर की सविता साहनी, तिवारीपुर थाना क्षेत्र के मोहनापुर की रेनू श्रीवास्तव ने बताया कि गगहा क्षेत्र निवासी खुद को एलआईसी अफसर बताने वाले केशव पांडेय ने चार साल रोजगार देने के नाम पर हम लोगों को एजेंट बनाया था। उस दौरान कहा कि एलआईसी की नई स्कीम आई है जिसके तहत रोजगार दिया जा रहा है। उसने गोलघर में सिनेमा रोड के अलावा चौरीचौरा और कौड़ीराम में कंपनी का ऑफिस खोला था।
एजेंटों को उसने एलआईसी से जुड़े होने की जानकारी देकर कई बार मीटिंग की और अधिकारियों को बुलाया। झांसे में फंसे करीब पांच सौ एजेंटों ने अपने परिचितों का बीमा करने के साथ ही एफडी भी कराई है। शुरूआती दौर में लोगाें को भुगतान मिला लेकिन दो साल से संचालक ने आडिट होने की बात कहकर किसी को रुपये नहीं लौटाए। दबाव बनाने पर एक महीने पहले मोबाइल बंद कर फरार हो गया।
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इसके बाद 11 अप्रैल को पीड़ित एजेंटों ने एसएसपी से मुलाकात कर घटना की जानकारी दी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। मंगलवार को पीड़ित डीएम से मिलने ऑफिस पहुंचे। छुट्टी होने के कारण डीएम नहीं मिले तो सिटी मजिस्ट्रेट लवकुश को तहरीर दी। कार्रवाई के लिए बुधवार को कमिश्नर और कैंट थाने में तहरीर दी गई है।
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थाने पहुंची इंद्रोनगर की सविता साहनी, तिवारीपुर थाना क्षेत्र के मोहनापुर की रेनू श्रीवास्तव ने बताया कि गगहा क्षेत्र निवासी खुद को एलआईसी अफसर बताने वाले केशव पांडेय ने चार साल रोजगार देने के नाम पर हम लोगों को एजेंट बनाया था। उस दौरान कहा कि एलआईसी की नई स्कीम आई है जिसके तहत रोजगार दिया जा रहा है। उसने गोलघर में सिनेमा रोड के अलावा चौरीचौरा और कौड़ीराम में कंपनी का ऑफिस खोला था।
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एजेंटों को उसने एलआईसी से जुड़े होने की जानकारी देकर कई बार मीटिंग की और अधिकारियों को बुलाया। झांसे में फंसे करीब पांच सौ एजेंटों ने अपने परिचितों का बीमा करने के साथ ही एफडी भी कराई है। शुरूआती दौर में लोगाें को भुगतान मिला लेकिन दो साल से संचालक ने आडिट होने की बात कहकर किसी को रुपये नहीं लौटाए। दबाव बनाने पर एक महीने पहले मोबाइल बंद कर फरार हो गया।
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इसके बाद 11 अप्रैल को पीड़ित एजेंटों ने एसएसपी से मुलाकात कर घटना की जानकारी दी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। मंगलवार को पीड़ित डीएम से मिलने ऑफिस पहुंचे। छुट्टी होने के कारण डीएम नहीं मिले तो सिटी मजिस्ट्रेट लवकुश को तहरीर दी। कार्रवाई के लिए बुधवार को कमिश्नर और कैंट थाने में तहरीर दी गई है।