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डॉ. पूर्णिमा की जमानत अर्जी खारिज
Updated Wed, 04 Oct 2017 08:27 PM IST
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गोरखपुर।
बीआरडी में ऑक्सीजन की कमी के बीच मौतों के मामले में आरोपी बनाई गईं निलंबित प्रिंसिपल डॉ. राजीव मिश्रा की पत्नी डॉ. पूर्णिमा शुक्ला की जमानत अर्जी खारिज हो गई। भ्रष्टाचार निवारण न्यायालय के प्रभारी शिवानंद सिंह की अदालत में मंगलवार को ही सुनवाई हुई थी लेकिन फैसला नहीं सुनाया जा सका था। बुधवार को आदेश जारी कर दिया गया।
अदालत में अभियोजन पक्ष ने ऑक्सीजन प्रकरण को गंभीर बताते हुए डॉ. पूर्णिमा शुक्ला की संलिप्तता की बात कही। विवेचना में लिए गए बयान के आधार पर जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी हरिनरायन यादव ने मामले को घोर आपराधिक कृत्य बताते हुए कहा कि मेडिकल कॉलेज के प्रशासन तंत्र में डॉ. पूर्णिमा का अनाधिकार प्रभाव था और कोई भी भुगतान बिना उनकी सहमति के नहीं होता था। अधिवक्ता ने कहा कि पत्रावली पर उपलब्ध केस डायरी में पर्याप्त सबूत हैं जिससे यह साबित होता है कि डॉ. पूर्णिमा कमीशन मांगती थीं।
उधर, बचाव पक्ष के अधिवक्ता रमापति शुक्ला ने कहा कि डॉ. पूर्णिमा पर लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं। वह वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी रही हैं। बीआरडी के प्रशासनिक कार्यों में उसका कोई हस्तक्षेप नहीं है और न ही उसके पास कोई अधिकार व दायित्व ही था। उनका मेडिकल कॉलेज के कामों से कोई लेना देना नहीं था। दोनों पक्ष की दलील सुनने के बाद कोर्ट ने जमानत अर्जी खारिज कर दी।
बीआरडी में ऑक्सीजन की कमी के बीच मौतों के मामले में आरोपी बनाई गईं निलंबित प्रिंसिपल डॉ. राजीव मिश्रा की पत्नी डॉ. पूर्णिमा शुक्ला की जमानत अर्जी खारिज हो गई। भ्रष्टाचार निवारण न्यायालय के प्रभारी शिवानंद सिंह की अदालत में मंगलवार को ही सुनवाई हुई थी लेकिन फैसला नहीं सुनाया जा सका था। बुधवार को आदेश जारी कर दिया गया।
अदालत में अभियोजन पक्ष ने ऑक्सीजन प्रकरण को गंभीर बताते हुए डॉ. पूर्णिमा शुक्ला की संलिप्तता की बात कही। विवेचना में लिए गए बयान के आधार पर जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी हरिनरायन यादव ने मामले को घोर आपराधिक कृत्य बताते हुए कहा कि मेडिकल कॉलेज के प्रशासन तंत्र में डॉ. पूर्णिमा का अनाधिकार प्रभाव था और कोई भी भुगतान बिना उनकी सहमति के नहीं होता था। अधिवक्ता ने कहा कि पत्रावली पर उपलब्ध केस डायरी में पर्याप्त सबूत हैं जिससे यह साबित होता है कि डॉ. पूर्णिमा कमीशन मांगती थीं।
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उधर, बचाव पक्ष के अधिवक्ता रमापति शुक्ला ने कहा कि डॉ. पूर्णिमा पर लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं। वह वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी रही हैं। बीआरडी के प्रशासनिक कार्यों में उसका कोई हस्तक्षेप नहीं है और न ही उसके पास कोई अधिकार व दायित्व ही था। उनका मेडिकल कॉलेज के कामों से कोई लेना देना नहीं था। दोनों पक्ष की दलील सुनने के बाद कोर्ट ने जमानत अर्जी खारिज कर दी।
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