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रसूख के चलते मिलती गई बड़ी जिम्मेदारियां
Updated Sun, 03 Sep 2017 01:59 AM IST
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गोरखपुर।
डॉ. कफील खान ने मेडिकल कॉलेज में एनएचएम के तहत संविदा पर असिस्टेंट लेक्चरर बने और फिर तरक्की की सीढ़ियां चढ़ते गए। उनकी पहुंच और रसूख तरक्की में बहुत काम आईं। बताया जाता है कि सपा के बड़े नेताओं से नजदीकी ने उन्हें पर्मानेंट होने के बाद भी यहीं बनाए रखा।
मेडिकल कॉलेज सूत्रों के मुताबिक डॉ. कफील खान का रसूख ऐसा था कि तत्कालीन प्रिंसिपल डॉ. राजीव मिश्र भी उनसे खौफ खाते थे। उनके खिलाफ कई शिकायतें आने पर भी डॉ. राजीव मिश्र ने उनके खिलाफ कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं दिखाई। इसकी वजह डॉ. कफील की पहुंच थी। मेडिकल कॉलेज में सपा सरकार के एक मंत्री से डॉ. कफील की नजदीकी की बातें आम थीं। इसीलिए डॉ. कफील के खिलाफ शिकायतों को नजरअंदाज करते हुए उन्हें लगातार महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गईं। 2016 में जब आयोग से उनका चयन असिस्टेंट लेक्चरर के लिए हुआ तो उनकी पहुंच के प्रभाव में ही कॉलेज प्रशासन ने पत्र लिखकर उनकी यहीं तैनाती की पैरवी की। ऑक्सीजन की कमी के बीच मेडिकल कॉलेज में मौतें हुईं तो डॉ. कफील की सपा सरकार में पहुंच और कद्दावर मंत्री से नजदीकी की बात भी आम हुई। इसी के चलते यहां डॉ. कफील को एनएचएम के नोडल अफसर से लेकर 100 बेड वार्ड के अधीक्षक की जिम्मेदारी मिली, जबकि बालरोग विभाग में उनसे वरिष्ठ लोग दरकिनार कर दिए गए।
जावीद अहमद के साथ भी फोटो हुए थे वायरल
बीआरडी मेडिकल कॉलेज कांड में जब वो सुर्खियों में आए तो सोशल साइट्स पर उनके ऊपर लगे पुराने दाग फिर से ताजा हो उठे। इसी तरह के वायरल संदेशों में पूर्व डीजीपी जावीद अहमद के साथ उनकी फोटो को पेश करके बताया गया कि इसी अफसर से नजदीकी के चलते उनके खिलाफ दर्ज रेप के केस में एफआर लगी।
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डॉ. कफील खान ने मेडिकल कॉलेज में एनएचएम के तहत संविदा पर असिस्टेंट लेक्चरर बने और फिर तरक्की की सीढ़ियां चढ़ते गए। उनकी पहुंच और रसूख तरक्की में बहुत काम आईं। बताया जाता है कि सपा के बड़े नेताओं से नजदीकी ने उन्हें पर्मानेंट होने के बाद भी यहीं बनाए रखा।
मेडिकल कॉलेज सूत्रों के मुताबिक डॉ. कफील खान का रसूख ऐसा था कि तत्कालीन प्रिंसिपल डॉ. राजीव मिश्र भी उनसे खौफ खाते थे। उनके खिलाफ कई शिकायतें आने पर भी डॉ. राजीव मिश्र ने उनके खिलाफ कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं दिखाई। इसकी वजह डॉ. कफील की पहुंच थी। मेडिकल कॉलेज में सपा सरकार के एक मंत्री से डॉ. कफील की नजदीकी की बातें आम थीं। इसीलिए डॉ. कफील के खिलाफ शिकायतों को नजरअंदाज करते हुए उन्हें लगातार महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गईं। 2016 में जब आयोग से उनका चयन असिस्टेंट लेक्चरर के लिए हुआ तो उनकी पहुंच के प्रभाव में ही कॉलेज प्रशासन ने पत्र लिखकर उनकी यहीं तैनाती की पैरवी की। ऑक्सीजन की कमी के बीच मेडिकल कॉलेज में मौतें हुईं तो डॉ. कफील की सपा सरकार में पहुंच और कद्दावर मंत्री से नजदीकी की बात भी आम हुई। इसी के चलते यहां डॉ. कफील को एनएचएम के नोडल अफसर से लेकर 100 बेड वार्ड के अधीक्षक की जिम्मेदारी मिली, जबकि बालरोग विभाग में उनसे वरिष्ठ लोग दरकिनार कर दिए गए।
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जावीद अहमद के साथ भी फोटो हुए थे वायरल
बीआरडी मेडिकल कॉलेज कांड में जब वो सुर्खियों में आए तो सोशल साइट्स पर उनके ऊपर लगे पुराने दाग फिर से ताजा हो उठे। इसी तरह के वायरल संदेशों में पूर्व डीजीपी जावीद अहमद के साथ उनकी फोटो को पेश करके बताया गया कि इसी अफसर से नजदीकी के चलते उनके खिलाफ दर्ज रेप के केस में एफआर लगी।
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