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नहीं सह पाई पति-बेटे की मौत, सदमे से गई जान
क्राइम डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
Updated Mon, 20 Aug 2018 01:04 AM IST
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- फोटो : file photo
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चौरीचौरा (गोरखपुर)। शत्रुघ्नपुर गांव स्थित खेत में काम करने के दौरान करंट से पति बालगोविंद और पुत्र जयनाथ की मौत के सदमे को करमदानी (48) सहन न कर पाईं। शनिवार को अंत्येष्टि के बाद से ही सदमे से उनकी हालत बेहद खराब हो गई थी और रविवार सुबह उनकी मौत हो गई। तहसीलदार रत्नेश त्रिपाठी पीड़ित परिवार के पास पहुंचे और 30 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी। विधायक संगीता यादव सहित क्षेत्र के कई अन्य लोग भी परिवार को ढांढस बधाने पहुंचे।
खोराबार के देवीपुर निवासी बालगोविंद अपने छोटे बेटे जयनाथ के साथ शुक्रवार को खेत में काम करने गए थे। उसी दौरान पोल के स्पोर्ट में लगे तार में करंट आने की वजह से दोनों की मौत हो गई। मौत की खबर पाते ही परिवार वाले सदमे में आ गए थे। शनिवार को शव आने के बाद से ही बालगोविंद की पत्नी करमदानी बेसुध हो गई थीं। परिवार वाले उन्हें समझाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उनकी तबीयत बिगड़ गई। रविवार की सुबह करमदानी की भी मौत हो गई। घर में दो मौतों से पहले ही मातम छाया था। उसी बीच एक और मौत ने परिवार वालों को तोड़ दिया है। गांव के लोग भी स्तब्ध हैं। घटना की सूचना पर पहुंची भाजपा विधायक संगीता यादव ने दस लाख रुपये मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया है। उन्होंने परिवार को ढांढस बंधाया और शासन से आर्थिक सहायता कराने के लिए कहा।
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खोराबार के देवीपुर निवासी बालगोविंद अपने छोटे बेटे जयनाथ के साथ शुक्रवार को खेत में काम करने गए थे। उसी दौरान पोल के स्पोर्ट में लगे तार में करंट आने की वजह से दोनों की मौत हो गई। मौत की खबर पाते ही परिवार वाले सदमे में आ गए थे। शनिवार को शव आने के बाद से ही बालगोविंद की पत्नी करमदानी बेसुध हो गई थीं। परिवार वाले उन्हें समझाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उनकी तबीयत बिगड़ गई। रविवार की सुबह करमदानी की भी मौत हो गई। घर में दो मौतों से पहले ही मातम छाया था। उसी बीच एक और मौत ने परिवार वालों को तोड़ दिया है। गांव के लोग भी स्तब्ध हैं। घटना की सूचना पर पहुंची भाजपा विधायक संगीता यादव ने दस लाख रुपये मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया है। उन्होंने परिवार को ढांढस बंधाया और शासन से आर्थिक सहायता कराने के लिए कहा।
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परिवार में बचे दो बेटे और एक बेटी
बालगोविंद के परिवार में अब बड़ा बेटा सूर्यनाथ (28), नवनाथ (21) और बेटी सरिता (18) बची है। बेटी की शादी भी अभी नहीं हुई है। परिवार की जिम्मेदारी अब बड़े बेटे सूर्यनाथ के कंधों पर है। वह मजदूरी करके जीवन यापन करते हैं।
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