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एक सिपाही के जिम्मे चार हजार की सुरक्षा
Updated Sat, 24 Jun 2017 01:59 AM IST
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गोरखपुर।
जिले की सुरक्षा व्यवस्था पुलिस अफसरों के लिए चुनौती बन गई है। जिले में एक सिपाही पर चार हजार लोगों की सुरक्षा का जिम्मा है। 2011 की जनगणना के हिसाब से जिले की आबादी 44 लाख 36 हजार है, जिनकी सुरक्षा के लिए महज 1100 सिपाही ही हैं। पहले से ही सिपाहियों की कमी से जूझ रहे महकमे की परेशानी 470 सिपाहियों के गैर जनपद तबादले के बाद से और बढ़ गई है। 28 जून को इन सिपाहियों को रिलीव भी करना है। इसके बदले में महज 100 सिपाही ही जिले को मिले हैं। ऐसे में पैदल गश्त, पिकेट ड्यूटी के लिए सिपाहियों की कमी परेशानी बढ़ाने वाली है।
जिले के 26 थानों के लिए 1932 सिपाहियों के पद सृजित हैं। इसमें से ही 100 सिपाही डायल 100 की ड्यूटी कर रहे हैं। इतने ही सिपाही पेशी और अन्य ड्यूटी पर रहते हैं। यानी वर्तमान में करीब 1500 सिपाही थाना, चौकी की ड्यूटी कर रहे हैं। इसी में से 470 सिपाहियों का तबादला समय पूरा होने या अन्य नियमों के आधार पर हो गया है। जिले से अचानक इतनी फोर्स कम होने से पुलिस अफसर भी बेचैन हो गए हैं। चूंकि पहले से ही सिपाहियों की कमी के कारण पिकेट, पैदल व अन्य ड्यूटी लगाने में दिक्कतों का सामना कर पड़ रहा था। ऐसे में सिपाहियों के तबादले के बाद महकमे की दुश्वारियों और बढ़ने वाली हैं।
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तीन हजार सिपाहियों की हुई है मांग
जिले में सिपाहियों के 1932 सिपाही पद हैं, मगर यह काफी पुराना मानक है। करीब पंद्रह साल पहले की जनसंख्या के आधार पर इतने पद सृजित हुए थे। वर्तमान में जिले की आबादी 44 लाख, 36 हजार 275 हो चुकी है। एसएसपी आरपी पांडेय ने बताया कि इस हिसाब से और सीएम सिटी होने के नाते बीते दिनों तीन हजार सिपाहियों के पद सृजित किए जाने की मांग करते हुए प्रस्ताव शासन के पास भेजा गया था।
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लंबे समय से सिपाहियों की कमी
जिले में सिपाहियों की कमी लंबे समय से चल रही है। कोई भी ऐसा थाना नहीं है, जहां मानक के मुताबिक सिपाही, दरोगा की पोस्टिंग हो। शायद यही वजह है कि अपराध को रोक पाने में पुलिस वाले नाकाम हो रहे हैं।
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नहीं मिल पाती है छुट्टी
सिपाहियों की कमी होने से छुट्टी भी एक बड़ी मुसीबत है। सिपाही इलाज या फिर घर जाने के लिए छुट्टी की मांग करते हैं, जो उन्हें इसी कमी के वजह से नहीं मिल पाती है। फिर भी तकरीबन 100 सिपाही हर महीने छुट्टी पर जाते हैं।
जिले की सुरक्षा व्यवस्था पुलिस अफसरों के लिए चुनौती बन गई है। जिले में एक सिपाही पर चार हजार लोगों की सुरक्षा का जिम्मा है। 2011 की जनगणना के हिसाब से जिले की आबादी 44 लाख 36 हजार है, जिनकी सुरक्षा के लिए महज 1100 सिपाही ही हैं। पहले से ही सिपाहियों की कमी से जूझ रहे महकमे की परेशानी 470 सिपाहियों के गैर जनपद तबादले के बाद से और बढ़ गई है। 28 जून को इन सिपाहियों को रिलीव भी करना है। इसके बदले में महज 100 सिपाही ही जिले को मिले हैं। ऐसे में पैदल गश्त, पिकेट ड्यूटी के लिए सिपाहियों की कमी परेशानी बढ़ाने वाली है।
जिले के 26 थानों के लिए 1932 सिपाहियों के पद सृजित हैं। इसमें से ही 100 सिपाही डायल 100 की ड्यूटी कर रहे हैं। इतने ही सिपाही पेशी और अन्य ड्यूटी पर रहते हैं। यानी वर्तमान में करीब 1500 सिपाही थाना, चौकी की ड्यूटी कर रहे हैं। इसी में से 470 सिपाहियों का तबादला समय पूरा होने या अन्य नियमों के आधार पर हो गया है। जिले से अचानक इतनी फोर्स कम होने से पुलिस अफसर भी बेचैन हो गए हैं। चूंकि पहले से ही सिपाहियों की कमी के कारण पिकेट, पैदल व अन्य ड्यूटी लगाने में दिक्कतों का सामना कर पड़ रहा था। ऐसे में सिपाहियों के तबादले के बाद महकमे की दुश्वारियों और बढ़ने वाली हैं।
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तीन हजार सिपाहियों की हुई है मांग
जिले में सिपाहियों के 1932 सिपाही पद हैं, मगर यह काफी पुराना मानक है। करीब पंद्रह साल पहले की जनसंख्या के आधार पर इतने पद सृजित हुए थे। वर्तमान में जिले की आबादी 44 लाख, 36 हजार 275 हो चुकी है। एसएसपी आरपी पांडेय ने बताया कि इस हिसाब से और सीएम सिटी होने के नाते बीते दिनों तीन हजार सिपाहियों के पद सृजित किए जाने की मांग करते हुए प्रस्ताव शासन के पास भेजा गया था।
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लंबे समय से सिपाहियों की कमी
जिले में सिपाहियों की कमी लंबे समय से चल रही है। कोई भी ऐसा थाना नहीं है, जहां मानक के मुताबिक सिपाही, दरोगा की पोस्टिंग हो। शायद यही वजह है कि अपराध को रोक पाने में पुलिस वाले नाकाम हो रहे हैं।
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नहीं मिल पाती है छुट्टी
सिपाहियों की कमी होने से छुट्टी भी एक बड़ी मुसीबत है। सिपाही इलाज या फिर घर जाने के लिए छुट्टी की मांग करते हैं, जो उन्हें इसी कमी के वजह से नहीं मिल पाती है। फिर भी तकरीबन 100 सिपाही हर महीने छुट्टी पर जाते हैं।