{"_id":"5c816c69bdec22140e106732","slug":"41551985769-gorakhpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"चुनाव से पहले सपा को बड़ा झटका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चुनाव से पहले सपा को बड़ा झटका
Fri, 08 Mar 2019 12:39 AM IST
ajay Kumar
अमर उजाला/गाोरख्ापुर
अमर उजाला/गाोरख्ापुर
Published by: ajay Kumar
Updated Fri, 08 Mar 2019 12:39 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गोरखपुर। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले मां राजमती निषाद के साथ अमरेंद्र के भाजपा में शामिल हो जाने से समाजवादी पार्टी को बड़ा झटका लगा है। निषाद वोट बैंक के बिखरने की आशंका से पार्टी के भीतर बेचैनी बढ़ र्गई है। उधर, अमरेंद्र अभी भी सदर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने का दावा कर रहे हैं। उन्हें पूरी उम्मीद है कि भाजपा उनपर ही दांव लगाएगी। टिकट नहीं मिलने की स्थिति में अगला कदम क्या होगा के सवाल पर उनका कहना है कि वह तो समय तय करेगा। अभी फिलहाल भाजपा जो जिम्मेदारी सौंपेगी उसका ईमानदारी से निर्वहन करेंगे।
सदर लोकसभा क्षेत्र के वोटरों में निषाद बिरादरी की हिस्सेदारी बड़ी है। यही वजह रही कि 2018 के उपचुनाव में समाजवादी पार्टी ने निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ संजय निषाद के बेटे प्रवीण निषाद पर न केवल दांव खेला बल्कि सीट निकालने में कामयाब रही। ढाई दशक से अधिक समय के बाद इस उपचुनाव में सदर लोकसभा की सीट भाजपा और मंदिर के हाथ से निकली। निषादों के इसी वोट बैंक के बूते सपा फिर से प्रवीण पर दांव खेलने की तैयारी में है।
वहीं, पिपराइच और उसके आसपास के क्षेत्रों के निषाद वोट बैंक पर अमरेंद्र की भी अच्छी पक ड़ है। इसका प्लेटफार्म उनके पिता जमुना निषाद ने ही तैयार किया था। 19 नवंबर \2010 में एक सड़क हादसे में जमुना की मौत के बाद 2011 में हुए उपचुनाव में जनता की पूरी सहानुभूति उनक ी पत्नी राजमती निषाद को मिली। वे सपा से पिपराइच की विधायक बनीं। 2012 में हुए विधानसभा चुनाव में जनता ने फिर उनपर भरोसा जताया और वे दोबारा विधायक चुनी गईं। ऐसे में निषाद वोट बैंक बंटने की आशंका है जो चुनाव में समाजवादी पार्टी की राह में दिक्कत पैदा कर सकता है।
विज्ञापन
सपा खुद में एक बहुत बड़ी पार्टी है। पार्टी के साथ बसपा, निषाद और रालोद का गठबंधन होने से यूपी का बड़ा वर्ग अखिलेश और मायावती के साथ है। किसी अकेले व्यक्ति के पार्टी छोड़ने से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। पूरी निषाद बिरादरी सपा के साथ है।
- प्रह्लाद यादव, जिलाध्यक्ष, सपा
विज्ञापन
सदर लोकसभा क्षेत्र के वोटरों में निषाद बिरादरी की हिस्सेदारी बड़ी है। यही वजह रही कि 2018 के उपचुनाव में समाजवादी पार्टी ने निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ संजय निषाद के बेटे प्रवीण निषाद पर न केवल दांव खेला बल्कि सीट निकालने में कामयाब रही। ढाई दशक से अधिक समय के बाद इस उपचुनाव में सदर लोकसभा की सीट भाजपा और मंदिर के हाथ से निकली। निषादों के इसी वोट बैंक के बूते सपा फिर से प्रवीण पर दांव खेलने की तैयारी में है।
विज्ञापन
वहीं, पिपराइच और उसके आसपास के क्षेत्रों के निषाद वोट बैंक पर अमरेंद्र की भी अच्छी पक ड़ है। इसका प्लेटफार्म उनके पिता जमुना निषाद ने ही तैयार किया था। 19 नवंबर \2010 में एक सड़क हादसे में जमुना की मौत के बाद 2011 में हुए उपचुनाव में जनता की पूरी सहानुभूति उनक ी पत्नी राजमती निषाद को मिली। वे सपा से पिपराइच की विधायक बनीं। 2012 में हुए विधानसभा चुनाव में जनता ने फिर उनपर भरोसा जताया और वे दोबारा विधायक चुनी गईं। ऐसे में निषाद वोट बैंक बंटने की आशंका है जो चुनाव में समाजवादी पार्टी की राह में दिक्कत पैदा कर सकता है।
विज्ञापन
सपा खुद में एक बहुत बड़ी पार्टी है। पार्टी के साथ बसपा, निषाद और रालोद का गठबंधन होने से यूपी का बड़ा वर्ग अखिलेश और मायावती के साथ है। किसी अकेले व्यक्ति के पार्टी छोड़ने से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। पूरी निषाद बिरादरी सपा के साथ है।
- प्रह्लाद यादव, जिलाध्यक्ष, सपा