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अदब-ओ-एहतराम से शुरू हुआ उर्स मुबारक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
Updated Thu, 12 Jul 2018 01:46 AM IST
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हजरत बाबा मुबारक खां शहीद की मजार पर आयोजित जलसे में बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
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गोरखपुर। नार्मल स्थित हजरत बाबा मुबारक खां शहीद का तीन रोजा सालाना उर्स बुधवार को शुरू हुआ। लोगों ने बाबा की दरगाह पर अकीदत के फूल पेश कर अमनचैन व खुशहाली की दुआ मांगी। पहले दिन जलसा-ए-ईद मिलादुन्नबी व दस्तारबंदी का कार्यक्रम हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत कलाम-ए-पाक की तिलावत से हुई। मुख्य अतिथि कोलकाता के मौलाना सखावत हुसैन बरकाती ने कहा कि बुजुर्गों की बारगाह से आपसी मेलमिलाप और भाईचारगी का संदेश मिलता है। हम सबका यह फर्ज बनता है कि इस संदेश को दूर-दूर तक फैलाया जाए। मौलाना अलाउद्दीन मिस्बाही ने कहा कि इस्लाम हमेशा से भाईचारा, समानता और अमन की बात करता आया है। दरगाह कमेटी के सदर इकरार अहमद ने बताया कि बाबा के दरगाह पर जाति, धर्म की सभी दीवारें ढह जाती हैं। यहां पहुंचने वाला न कोई हिंदू होता और न ही मुसलमान। मान्यता तो यहां तक है कि बाबा के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई हर दुआ पूरी होती है।
इस मौके पर मौलाना मकसूद आलम मिस्बाही, शराफत हुसैन बरकाती, अब्दुर्रब, अजहरुल कादरी, सादिक रजा, रईस अनवर, अबदुल्लाह, कलीम फरजंद, अकरम कादरी आदि मौजूद रहे। इस दौरान मदरसा दारुल उलूम अहले सुन्नत फैजान-ए-मुबारक खां शहीद के आठ हिफ्ज के विद्यार्थियों शहाबुद्दीन, साकिब रजा, नूर आलम, रिजवान आलम, आतिफ रजा, सैफ रजा, मुहम्मद मेराज एवं मुहम्मद आमिर रजा की दस्तारबंदी भी की गई।
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कार्यक्रम की शुरुआत कलाम-ए-पाक की तिलावत से हुई। मुख्य अतिथि कोलकाता के मौलाना सखावत हुसैन बरकाती ने कहा कि बुजुर्गों की बारगाह से आपसी मेलमिलाप और भाईचारगी का संदेश मिलता है। हम सबका यह फर्ज बनता है कि इस संदेश को दूर-दूर तक फैलाया जाए। मौलाना अलाउद्दीन मिस्बाही ने कहा कि इस्लाम हमेशा से भाईचारा, समानता और अमन की बात करता आया है। दरगाह कमेटी के सदर इकरार अहमद ने बताया कि बाबा के दरगाह पर जाति, धर्म की सभी दीवारें ढह जाती हैं। यहां पहुंचने वाला न कोई हिंदू होता और न ही मुसलमान। मान्यता तो यहां तक है कि बाबा के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई हर दुआ पूरी होती है।
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इस मौके पर मौलाना मकसूद आलम मिस्बाही, शराफत हुसैन बरकाती, अब्दुर्रब, अजहरुल कादरी, सादिक रजा, रईस अनवर, अबदुल्लाह, कलीम फरजंद, अकरम कादरी आदि मौजूद रहे। इस दौरान मदरसा दारुल उलूम अहले सुन्नत फैजान-ए-मुबारक खां शहीद के आठ हिफ्ज के विद्यार्थियों शहाबुद्दीन, साकिब रजा, नूर आलम, रिजवान आलम, आतिफ रजा, सैफ रजा, मुहम्मद मेराज एवं मुहम्मद आमिर रजा की दस्तारबंदी भी की गई।
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