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दूर भगा जहरीला सांप... बोले मर जाएंगे घर न छोड़ेंगे
अरुण चन्द, अमर उजाला, गोरखपुर।
Updated Tue, 22 Aug 2017 01:37 AM IST
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बाढ़ ग्रस्त जमुनिया में पानी में जहरीला सांप दिखाई दिया।
- फोटो : Amar Ujala
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सोमवार को दोपहर एक बजे। मानीराम के पास महुआतार रेलवे क्रासिंग से पीएसी की आठवीं बटालियन (बरेली यूनिट) की नाव राहत सामग्री बांटने को तैयार। हम भी नाव पर सवार हुए और उफनाती धारा के बीच करीब 30 किलो मीटर की लंबी दूरी तय की। जमुनिया पहुंचे थे कि जवान अजय पटेल की आवाज गूंज पड़ी। बोले बायीं तरफ से नाव के पास आ रहा सांप जहरीला है। बांस से उसे दूर भगाओ। इस पर रामबहादुर ने जब उसे पानी वाला सांप बताया तो पीएसी जवान झल्ला उठे। बोले पानी वाला होता तो नाव के इंजन की आवाज सुनकर पानी के भीतर पैठ जाता न कि फन उठाकर पानी के ऊपर-ऊपर तैरता। मेरठ में बाढ़ के दौरान बचाव कार्य का उन्होंने वो किस्सा भी सुनाया कि कैसे पेड़ से सांप नाव में गिर गया था।
महुआतार से पुलिस के एक अफसर ने पीएसी के नाव को आगे बढ़ाने का संकेत दिया तो फर्रुखाबाद के मूल निवासी पीएसी जवान बृजेश कुमार दूबे बोल पड़े- साहब नाव 10 क्विंटल का लोड संभाल सकती है। अभी और राहत सामग्री रखी जा सकती है। इतना सुनना था कि पूरी सब्जी, बिस्किट और पानी के पैकेट लिए भारत सेवाश्रम संघ के निश्रेयसानंद और अशोक जायसवाल नाव पर चढ़ गए। आगे की नाव में बंधी रस्सी के सहारे टोचन होते हुए जब नाव आगे बढ़ी तो जवान चंद्रजीत राय ने बेबसी जताते हुए कहा -सुबह इंजन खराब हो गया था। नाव खड़ी करने से बेहतर तो टोचन के ही सहारे राहत सामग्री बांटी जाए।
दोपहर 2: 15 बजे नाव मानीराम क्षेत्र के विशुनपुरा के पास पहुंची। वहीं एक मकान की छत पर खड़े 20 बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं चिल्लाने लगीं। बोले मदद करिए। इसके बाद नाव बाढ़ पीड़ितों की तरफ मुड़ गई। सबको पूरी, सब्जी, पानी के साथ बिस्किट का पैकेट दिया गया। पुराने कपड़े भी दिए गए, फिर पीएसी के जवान चंद्रजीत राय बोले- तैयार हो जाइए। सुरक्षित स्थान पर चलना है। इस पर एक बुजुर्ग ने तपाक से जवाब दिया। बाहर चले जाएंगे तो घर कौन रखाएगा। सब सामान पड़ा है। चोरी हो जाएगा। भले ही जहरीले सांप आए और काट लें लेकिन घर छोड़कर कतई नहीं जाएंगे।
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थोड़ी ही दूरी पर पीएसी की एक नाव पर कमिश्नर और डीआईजी भी राहत सामग्री बांटते दिखेे। जवानों ने तय किया कि वे रामपुर, गोपालपुर की तरफ रूख करेंगे। वहां दो दिनों से कोई नहीं गया। नाव आगे बढ़ी कि पीएसी के बृजेश का फोन घनघना उठा। बात पूरी हुई तो बोले पत्नी की तबियत खराब है। मगर यहां इससे बड़ी जिम्मेदारी है। तमाम लोग भूखे, प्यासे हैं। सबको सुरक्षित निकलना है। धीरे से यह भी बोले कि छुट्टी भी नहीं मिलेगी। इतना सुनना था कि दूसरे साथी रामबहादुर भी बोल पड़े। रात को बच्चे का फोन आया था। पूछ रहा था पापा कब आओगे। उसे समझाया यहां बहुत लोग फं से हैं। सभी को संभालने के बाद ही आ पाएंगे।
बहरहाल, रामपुर, गोपालपुर में राहत सामग्री बांटते-बांटते शाम के पांच बज गए, फिर नाव महुआतार की तरफ लौटी लेकिन एक भी बाढ़ पीड़ित नाव पर सवार नहीं हुआ। राहत सामग्री बांटने के बाद पूरी नाव खाली लौटी। महुआतार पहुंचते-पहुंचते शाम के 6.30 बज गए। लंबी दूरी तय करके लौटे पीएसी जवान चंद्रजीत मायूस होकर बोले पेट्रोल न मिलने की वजह से राहत-बचाव का काम अच्छे से नहीं कर सके। पहले के मुकाबले कम चक्कर लगा पाए हैं। मंगलवार को और ज्यादा लोगों तक पहुंचने की कोशिश होगी।
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महुआतार से पुलिस के एक अफसर ने पीएसी के नाव को आगे बढ़ाने का संकेत दिया तो फर्रुखाबाद के मूल निवासी पीएसी जवान बृजेश कुमार दूबे बोल पड़े- साहब नाव 10 क्विंटल का लोड संभाल सकती है। अभी और राहत सामग्री रखी जा सकती है। इतना सुनना था कि पूरी सब्जी, बिस्किट और पानी के पैकेट लिए भारत सेवाश्रम संघ के निश्रेयसानंद और अशोक जायसवाल नाव पर चढ़ गए। आगे की नाव में बंधी रस्सी के सहारे टोचन होते हुए जब नाव आगे बढ़ी तो जवान चंद्रजीत राय ने बेबसी जताते हुए कहा -सुबह इंजन खराब हो गया था। नाव खड़ी करने से बेहतर तो टोचन के ही सहारे राहत सामग्री बांटी जाए।
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दोपहर 2: 15 बजे नाव मानीराम क्षेत्र के विशुनपुरा के पास पहुंची। वहीं एक मकान की छत पर खड़े 20 बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं चिल्लाने लगीं। बोले मदद करिए। इसके बाद नाव बाढ़ पीड़ितों की तरफ मुड़ गई। सबको पूरी, सब्जी, पानी के साथ बिस्किट का पैकेट दिया गया। पुराने कपड़े भी दिए गए, फिर पीएसी के जवान चंद्रजीत राय बोले- तैयार हो जाइए। सुरक्षित स्थान पर चलना है। इस पर एक बुजुर्ग ने तपाक से जवाब दिया। बाहर चले जाएंगे तो घर कौन रखाएगा। सब सामान पड़ा है। चोरी हो जाएगा। भले ही जहरीले सांप आए और काट लें लेकिन घर छोड़कर कतई नहीं जाएंगे।
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थोड़ी ही दूरी पर पीएसी की एक नाव पर कमिश्नर और डीआईजी भी राहत सामग्री बांटते दिखेे। जवानों ने तय किया कि वे रामपुर, गोपालपुर की तरफ रूख करेंगे। वहां दो दिनों से कोई नहीं गया। नाव आगे बढ़ी कि पीएसी के बृजेश का फोन घनघना उठा। बात पूरी हुई तो बोले पत्नी की तबियत खराब है। मगर यहां इससे बड़ी जिम्मेदारी है। तमाम लोग भूखे, प्यासे हैं। सबको सुरक्षित निकलना है। धीरे से यह भी बोले कि छुट्टी भी नहीं मिलेगी। इतना सुनना था कि दूसरे साथी रामबहादुर भी बोल पड़े। रात को बच्चे का फोन आया था। पूछ रहा था पापा कब आओगे। उसे समझाया यहां बहुत लोग फं से हैं। सभी को संभालने के बाद ही आ पाएंगे।
बहरहाल, रामपुर, गोपालपुर में राहत सामग्री बांटते-बांटते शाम के पांच बज गए, फिर नाव महुआतार की तरफ लौटी लेकिन एक भी बाढ़ पीड़ित नाव पर सवार नहीं हुआ। राहत सामग्री बांटने के बाद पूरी नाव खाली लौटी। महुआतार पहुंचते-पहुंचते शाम के 6.30 बज गए। लंबी दूरी तय करके लौटे पीएसी जवान चंद्रजीत मायूस होकर बोले पेट्रोल न मिलने की वजह से राहत-बचाव का काम अच्छे से नहीं कर सके। पहले के मुकाबले कम चक्कर लगा पाए हैं। मंगलवार को और ज्यादा लोगों तक पहुंचने की कोशिश होगी।