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125 मदरसों की मान्यता खतरे में, बच्चों के भविष्य पर संकट
siddharthnagar
Updated Tue, 20 Mar 2018 11:26 PM IST
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सिद्धार्थनगर।जिले में संचालित 125 मदरसों की मान्यता खतरे में पड़ गई है। हिदायतों के बाद भी विभागीय पोर्टल (मदरसा पोर्टल डॉट यूपीएसडीसी डॉट जीओवी डॉट इन) पर मदरसे से जुड़ी जानकारियां अपलोड नहीं कर रहे हैं। इस कारण शासन ने इनकी सुविधाओं पर रोक लगा दी है। विभागीय रिकार्ड में भी अब इनका अस्तित्व खतरे में है। मदरसा संचालकों की लापरवाही के चलते करीब 10 हजार बच्चों का भविष्य भी संकट में पड़ गया है। इन मदरसों में पंजीकृत बच्चे अब न तो छात्रवृत्ति के लिए आवेदन कर पाएंगे और न इन्हें अन्य सुविधाएं मिल पाएंगी।
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अंतर्गत जिले में 600 मान्यता प्राप्त मदरसे संचालित हैं। मदरसों में पारदर्शिता लाने के मकसद से योगी सरकार ने उनसे जुड़ी सभी विवरण विभागीय पोर्टल पर अपलोड करने का निर्देश दिया था। सख्त हिदायत दी थी जो मदरसे पोर्टल पर विवरण नहीं देते, उन्हें अमान्य कर दिया जाए। पोर्टल पर डाटा अपलोड करने की तिथि पहले दिसंबर तक थी। बाद में इसे बढ़ाकर जनवरी करा दिया गया। मदरसा संचालकों को लगातार हिदायत दी जाती रही, बावजूद 125 मदरसे ऐसे हैं, जिन्होंने अपना विवरण पोर्टल पर देने में रुचि नहीं दिखाई। पोर्टल लॉक होने के बाद अब वह स्वत: विभागीय रिकार्ड से बाहर हो गए हैं। लिहाजा उनकी मान्यता भी खतरे में पड़ गई है।
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी आशुतोष पांडेय ने मुताबिक मान्यता प्राप्त सभी मदरसा संचालकों को पोर्टल पर डाटा अपलोड करने के लिए कई बार कहा गया। लिखित निर्देश भी दिए गए, इसके बाद भी डाटा न देने वाले मदरसों पर शासन ने रोक लगा दी है। अब इन्हें शासन से मिलने वाली किसी भी तरह की मदद के लिए योग्य नहीं माना जाएगा। मदरसों की मान्यता व बच्चों पर फैसला शासन स्तर पर होना है। इसकी रिपोर्ट भेजी जा चुकी है।
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मान्यता प्राप्त मदरसों को मिलती हैं ये सुविधाएं
मदरसों में पंजीकृत बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सके, इसके लिए विभाग से उन्हें विभिन्न तरह की योजनाओं से लाभान्वित किया जाता रहा है। मान्यता प्राप्त मदरसों में विज्ञान, अंग्रेजी, कंप्यूटर विषयों की पढ़ाई के लिए नियुक्त आधुनिक शिक्षकों का मानदेय शासन से दिया जाता है।
10 हजार बच्चे पंजीकृत
जिन 125 मदरसों ने पोर्टल पर डाटा अपलोड नहीं किया है, उनमें पंजीकृत बच्चों की संख्या करीब 10 हजार है। अगर मदरसों की मान्यता खत्म हुई तो पंजीकृत बच्चे न तो छात्रवृत्ति के लिए आवेदन कर सकेंगे और न ही किसी अन्य सुविधा का लाभ ले सकेंगे।
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अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अंतर्गत जिले में 600 मान्यता प्राप्त मदरसे संचालित हैं। मदरसों में पारदर्शिता लाने के मकसद से योगी सरकार ने उनसे जुड़ी सभी विवरण विभागीय पोर्टल पर अपलोड करने का निर्देश दिया था। सख्त हिदायत दी थी जो मदरसे पोर्टल पर विवरण नहीं देते, उन्हें अमान्य कर दिया जाए। पोर्टल पर डाटा अपलोड करने की तिथि पहले दिसंबर तक थी। बाद में इसे बढ़ाकर जनवरी करा दिया गया। मदरसा संचालकों को लगातार हिदायत दी जाती रही, बावजूद 125 मदरसे ऐसे हैं, जिन्होंने अपना विवरण पोर्टल पर देने में रुचि नहीं दिखाई। पोर्टल लॉक होने के बाद अब वह स्वत: विभागीय रिकार्ड से बाहर हो गए हैं। लिहाजा उनकी मान्यता भी खतरे में पड़ गई है।
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जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी आशुतोष पांडेय ने मुताबिक मान्यता प्राप्त सभी मदरसा संचालकों को पोर्टल पर डाटा अपलोड करने के लिए कई बार कहा गया। लिखित निर्देश भी दिए गए, इसके बाद भी डाटा न देने वाले मदरसों पर शासन ने रोक लगा दी है। अब इन्हें शासन से मिलने वाली किसी भी तरह की मदद के लिए योग्य नहीं माना जाएगा। मदरसों की मान्यता व बच्चों पर फैसला शासन स्तर पर होना है। इसकी रिपोर्ट भेजी जा चुकी है।
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मान्यता प्राप्त मदरसों को मिलती हैं ये सुविधाएं
मदरसों में पंजीकृत बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सके, इसके लिए विभाग से उन्हें विभिन्न तरह की योजनाओं से लाभान्वित किया जाता रहा है। मान्यता प्राप्त मदरसों में विज्ञान, अंग्रेजी, कंप्यूटर विषयों की पढ़ाई के लिए नियुक्त आधुनिक शिक्षकों का मानदेय शासन से दिया जाता है।
10 हजार बच्चे पंजीकृत
जिन 125 मदरसों ने पोर्टल पर डाटा अपलोड नहीं किया है, उनमें पंजीकृत बच्चों की संख्या करीब 10 हजार है। अगर मदरसों की मान्यता खत्म हुई तो पंजीकृत बच्चे न तो छात्रवृत्ति के लिए आवेदन कर सकेंगे और न ही किसी अन्य सुविधा का लाभ ले सकेंगे।