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मां चंद्रघंटा की हुई आराधना
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गोंडा। नवरात्र के तीसरे दिन श्रद्धालुओं ने माता चंद्रघंटा की पूजा कर सौम्यता एवं विनम्रता का आशीर्वाद मांगा। देवी मंदिरों में भोर से ही श्रद्धालुओं का तांता लग गया। जहां विधि-विधान से पूजा कर मां से आशीर्वाद मांगा।
शहर के खैरा भवानी मंदिर, काली भवानी मंदिर, सम्मय माता सहित उमरी बेगमगंज के उत्तरी भवानी मंदिर, जयप्रभा ग्राम के कामिन देवी मंदिर सहित दर्जनों देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की कतारें लगी रहीं। खैरा भवानी मंदिर के पुजारी प्रदीप कुमार ने बताया कि चंद्रघंटा शक्ति की पूजा और साधना से मणिपुर चक्र जाग्रत होता है। इनकी पूजा करने से वीरता-निर्भरता के साथ ही सौम्यता व विनम्रता का विकास होता है। इनकी पूजा से मुख, नेत्र तथा शरीर की क्रांति बढ़ने लगती है। स्वर दिव्य और मधुर होने लगता है।
नवरात्र के चौथे दिन मंगलवार को शक्ति की देवी मां दुर्गा के चौथे स्वरूप माता कूष्मांडा की पूजा की जाती है। मान्यता है कि जब इस संसार में सिर्फ अंधकार था तब देवी कूष्मांडा ने ब्रह्मांड की रचना की थी। देवी को सृष्टि के रचनाकार के रूप में भी जाना जाता है। मां कूष्मांडा के पूजन का विशेष महत्व है। जो भी भक्त सच्चे मन से नवरात्र के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा करता है उसे आयु, यश और बल की प्राप्ति होती है।
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शहर के खैरा भवानी मंदिर, काली भवानी मंदिर, सम्मय माता सहित उमरी बेगमगंज के उत्तरी भवानी मंदिर, जयप्रभा ग्राम के कामिन देवी मंदिर सहित दर्जनों देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की कतारें लगी रहीं। खैरा भवानी मंदिर के पुजारी प्रदीप कुमार ने बताया कि चंद्रघंटा शक्ति की पूजा और साधना से मणिपुर चक्र जाग्रत होता है। इनकी पूजा करने से वीरता-निर्भरता के साथ ही सौम्यता व विनम्रता का विकास होता है। इनकी पूजा से मुख, नेत्र तथा शरीर की क्रांति बढ़ने लगती है। स्वर दिव्य और मधुर होने लगता है।
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नवरात्र के चौथे दिन मंगलवार को शक्ति की देवी मां दुर्गा के चौथे स्वरूप माता कूष्मांडा की पूजा की जाती है। मान्यता है कि जब इस संसार में सिर्फ अंधकार था तब देवी कूष्मांडा ने ब्रह्मांड की रचना की थी। देवी को सृष्टि के रचनाकार के रूप में भी जाना जाता है। मां कूष्मांडा के पूजन का विशेष महत्व है। जो भी भक्त सच्चे मन से नवरात्र के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा करता है उसे आयु, यश और बल की प्राप्ति होती है।
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