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नगर की तीन पंचायतों के हटे वोटर, अस्तित्व में रहेंगीं पंचायतें
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गोंडा। पंचायत चुनाव की तैयारियां तेज हो गई हैं और परिसीमन की कार्रवाई लगभग पूरी हो गई है। कारण इस बार परिसीमन में पंचायतों का गठन नहीं होना है, सिर्फ उन पंचायतों की मतदाता सूची से मतदाता हटाना है जो शहरी क्षेत्र में शामिल हो चुके हैं। परसपुर नगर पंचायत के गठन से तीन पंचायतों का अंश शामिल हुआ है और उनके मतदाताओं को अब पंचायत की मतदाता सूची से बाहर कर दिया गया है। तीनों पंचायत के करीब 11 हजार मतदाता शहरी क्षेत्रों में होने के कारण बाहर हुए हैं। पंचायत ने अब अवशेष बचे करीब सात हजार मतदाताओं की सूची तैयार कर बीएलओ को देने के लिए तय किया है। इस तरह इन तीनों पंचायतों के मतदाता सूची का भी पुनरीक्षण होगा और नए मतदाता तैयार कर आगे के चुनाव में गांव शामिल होंगे।
राज्य निर्वाचन आयोग ने 15 सितंबर से निकाय में शामिल गांवों के मतदाताओं का परिसीमन करने का आदेश दिया था। इसके बारे में निर्वाचन के अधिकारी पहले से ही तैयार थे। परसपुर नगर पंचायत में शामिल परसपुर ग्राम पंचायत से नौ हजार मतदाताओं के नाम शहरी में शामिल हुए हैं, उन्हें बाहर किया गया है। अभी यहां पर पांच हजार मतदाता अवशेष हैं। ऐसे में परसपुर ग्रामीण पंचायत का अस्तित्व है। इसी तरह आटा गांव से नौ सौ और चरहुंआ में चार सौ मतदाता ही निकाय में शामिल हुए हैं। आटा में अभी भी तीन हजार और चरहुआं में चार हजार के करीब मतदाता होंगे। आगे इन गांवों की मतदाता सूची का पुनरीक्षण भी होगा, जिसमें नए वोटर बढंगे। तीनों गांव पंचायतों में भी मतदाता सूची का पुनरीक्षण होगा। इन तीनों में पंचायत चुनाव होने तय हैं। निर्वाचन विभाग के अधिकारी उमेश कुमार का कहना है कि पहले से ही तीनों पंचायतों की सूची ठीक कर ली गई थी। अब परिसीमन की कार्रवाई ज्यादा नहीं होनी है।
फाइलों में कैद रहेंगे 149 पंचायतों के अस्तित्व
पंचायत चुनाव की तैयारियों से साफ हो गया है कि अब पांच साल पहले परिसीमन में गठित किए गए 149 पंचायतों का प्रस्ताव फाइलों में ही कैद रहेगा। वर्ष 2025 में ही परिसीमन संभव होगा। नियमों के तहत दस साल में ही पंचायतों का परिसीमन होता है, इसी के तहत वर्ष 2015 में परिसीमन की कार्रवाई हुई थी 149 नई पंचायतों के गठन का प्रस्ताव तैयार हुआ था। सियासी खींचतान के कारण प्रस्ताव समय से निदेशालय न पहुंचने से स्वीकृत नही हो पाया था। इस बार भी उम्मीद खत्म है, क्योंकि प्रदेश में गोंडा के साथ सिर्फ तीन जिलों का ही मामला फंसा है और तीन जिलों के कारण अब चुनाव में देर नहीं हो सकता है। वहीं आयोग के निर्देशों में पुनरीक्षण शुरू कर दिया गया है, ऐसे में नए पंचायतों पर फैसला संभव नही है। फिर चुनाव 1054 पंचायतों में 1044 में ही होंगे। 10 पंचायतों के कार्यकाल अभी पूरे नहीं हैं।
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65.85 करोड़ से गांवों के विकास की तैयारी, प्रधानों को छवि बनाने का एक मौका
प्रदेश सरकार ने जिले की 1054 पंचायतों में विकास के लिए 65. 85 करोड़ का बजट जारी कर दिया है। इससे चुनाव से पहले प्रधानों को विकास का एक मौका मिला है और गांवों में विकास के नाम पर वोटरों को रिझाने का मौका मिलेगा। 15 वें वित्त आयोग से जिले के 1054 पंचायतों को बजट जारी किया गया है। चुनाव से पहले पंचायतों में तैयार किए गए प्रस्तावों पर लोग कार्य करा सकेंगे। इस बजट से आपरेशन कायाकल्प के साथ ही गावों में विकास कार्य कराएंगे। बजट की निगरानी के लिए भी अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है।
पंचायतों के मतदाता सूची का पुनरीक्षण शुरू होने जा रहा है। अधिक से अधिक युवा मतदाताओं को जोड़ने पर जोर रहेगा। 15वें वित्त से बजट भी जारी कर दिया गया है। गांवों में विकास कार्य प्राथमिकता पर कराए जाएंगे। -शशांक त्रिपाठी, सीडीओ
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राज्य निर्वाचन आयोग ने 15 सितंबर से निकाय में शामिल गांवों के मतदाताओं का परिसीमन करने का आदेश दिया था। इसके बारे में निर्वाचन के अधिकारी पहले से ही तैयार थे। परसपुर नगर पंचायत में शामिल परसपुर ग्राम पंचायत से नौ हजार मतदाताओं के नाम शहरी में शामिल हुए हैं, उन्हें बाहर किया गया है। अभी यहां पर पांच हजार मतदाता अवशेष हैं। ऐसे में परसपुर ग्रामीण पंचायत का अस्तित्व है। इसी तरह आटा गांव से नौ सौ और चरहुंआ में चार सौ मतदाता ही निकाय में शामिल हुए हैं। आटा में अभी भी तीन हजार और चरहुआं में चार हजार के करीब मतदाता होंगे। आगे इन गांवों की मतदाता सूची का पुनरीक्षण भी होगा, जिसमें नए वोटर बढंगे। तीनों गांव पंचायतों में भी मतदाता सूची का पुनरीक्षण होगा। इन तीनों में पंचायत चुनाव होने तय हैं। निर्वाचन विभाग के अधिकारी उमेश कुमार का कहना है कि पहले से ही तीनों पंचायतों की सूची ठीक कर ली गई थी। अब परिसीमन की कार्रवाई ज्यादा नहीं होनी है।
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फाइलों में कैद रहेंगे 149 पंचायतों के अस्तित्व
पंचायत चुनाव की तैयारियों से साफ हो गया है कि अब पांच साल पहले परिसीमन में गठित किए गए 149 पंचायतों का प्रस्ताव फाइलों में ही कैद रहेगा। वर्ष 2025 में ही परिसीमन संभव होगा। नियमों के तहत दस साल में ही पंचायतों का परिसीमन होता है, इसी के तहत वर्ष 2015 में परिसीमन की कार्रवाई हुई थी 149 नई पंचायतों के गठन का प्रस्ताव तैयार हुआ था। सियासी खींचतान के कारण प्रस्ताव समय से निदेशालय न पहुंचने से स्वीकृत नही हो पाया था। इस बार भी उम्मीद खत्म है, क्योंकि प्रदेश में गोंडा के साथ सिर्फ तीन जिलों का ही मामला फंसा है और तीन जिलों के कारण अब चुनाव में देर नहीं हो सकता है। वहीं आयोग के निर्देशों में पुनरीक्षण शुरू कर दिया गया है, ऐसे में नए पंचायतों पर फैसला संभव नही है। फिर चुनाव 1054 पंचायतों में 1044 में ही होंगे। 10 पंचायतों के कार्यकाल अभी पूरे नहीं हैं।
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65.85 करोड़ से गांवों के विकास की तैयारी, प्रधानों को छवि बनाने का एक मौका
प्रदेश सरकार ने जिले की 1054 पंचायतों में विकास के लिए 65. 85 करोड़ का बजट जारी कर दिया है। इससे चुनाव से पहले प्रधानों को विकास का एक मौका मिला है और गांवों में विकास के नाम पर वोटरों को रिझाने का मौका मिलेगा। 15 वें वित्त आयोग से जिले के 1054 पंचायतों को बजट जारी किया गया है। चुनाव से पहले पंचायतों में तैयार किए गए प्रस्तावों पर लोग कार्य करा सकेंगे। इस बजट से आपरेशन कायाकल्प के साथ ही गावों में विकास कार्य कराएंगे। बजट की निगरानी के लिए भी अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है।
पंचायतों के मतदाता सूची का पुनरीक्षण शुरू होने जा रहा है। अधिक से अधिक युवा मतदाताओं को जोड़ने पर जोर रहेगा। 15वें वित्त से बजट भी जारी कर दिया गया है। गांवों में विकास कार्य प्राथमिकता पर कराए जाएंगे। -शशांक त्रिपाठी, सीडीओ