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दफ्तर से संबद्ध कर 82 शिक्षकों को दे दिए दो करोड़ वेतन

Tue, 27 Jul 2021 10:12 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 27 Jul 2021 10:12 PM IST
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Two crores spent on the salary of teachers by sitting in the office
गोंडा। बेसिक शिक्षा विभाग से जुड़े 82 शिक्षकों को बीते पांच माह से बीएसए दफ्तर में बैठाकर वेतन दिया जा रहा है। स्कूलों में शिक्षकों की कमी के बावजूद 82 शिक्षकों को कार्यालय से संबद्घ कर इनके वेतन इत्यादि पर अब तक दो करोड़ की राशि खर्च कर दी गयी। नियमों के तहत कार्यालयों से शिक्षकों को संबद्घ करने पर रोक है। शासन स्तर से शिक्षकों की स्कूल आवंटन नीति तय न हो पाने के कारण ही यह परेशानी उठानी पड़ रही है।
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बेसिक शिक्षा में शिक्षकों के स्कूल आवंटन का खेल इस बार खुलेआम देखने को मिल रहा है। पूर्व में शिक्षकों के नियुक्ति के बाद स्कूल आवंटन करके ही नियुक्ति पत्र दिए जाते थे। अब पहले नियुक्ति पत्र, फिर कई माह बाद स्कूल आवंटन होता है।
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तब तक बड़ी संख्या में शिक्षक बीएसए दफ्तर में सबंद्व रहते हैं। इसी तरह अंतर जनपदीय तबादलों में भी स्कूल आवंटन को लेकर हीलाहवाली बरती जा रही है। बीते माह मार्च में जिले में पारस्परिक तबादले से 82 शिक्षकों ने जिले में कार्यभार ग्रहण किया। उन्हें स्कूल में तैनाती देने के बजाए, बीएसए दफ्तर में ही संबद्घ कर दिया गया था।
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जुलाई माह बीतने की कगार पर होने के बावजूद अभी तक बीएसए दफ्तर में ही इनकी हाजिरी दर्ज कर वेतन भुगतान हो रहा है। इतना ही नहीं बीते 23 जुलाई को 109 नए शिक्षकों की नियुक्ति की गई है उन्हें भी बीएसए दफ्तर में ही संबद्घ कर दिया है। अब वह भी स्कूल आवंटन का इंतजार करेंगे। इनके भी वेतन पर हर माह करीब 45 लाख खर्च होगा।
स्कूलों में तैनाती के लिए नियुक्ति पाने वाले शिक्षकों को पहली बार स्कूल आवंटन के लिए कई दिनों तक संबद्घ रहना पड़ा है। शिक्षक भर्ती में पहले चरण में नियुक्त 359 शिक्षकों की नियुक्ति 16 अक्टूबर 2020 में हुई और उन्हें 31 दिसंबर को स्कूल आवंटन हो सका।
इसी तरह दूसरे चरण के 1143 शिक्षकों को भी 3 दिसंबर 2020 को नियुक्ति दी गई और उन्हें भी बीएसए दफ्तर में ही संबद्घ रखा गया। इन्हें भी 25 जनवरी 2021 तक संबद्घ रखा गया और स्कूल में तैनाती करने में माह फरवरी में हो सकी। इस तरह स्कूल में तय समय में स्कूल आवंटन नहीं हो सका। करीब चार करोड़ का वेतन खर्च कर दिया। इससे पूर्व शिक्षकों को स्कूल आवंटन के बाद ही नियुक्ति पत्र दिए जाते थे।
शिक्षकों की नियुक्ति के लिए पहले से ही स्कूल आवंटन की व्यवस्था तय है। इसमें रिक्त पदों वालें स्कूलों की सूची जारी करके वरिष्ठता के आधार पर स्कूल का विकल्प दिया जाता है। सबसे पहले दिव्यांग महिलाएं, फिर दिव्यांग पुरूष, इसके बाद महिलाओं से वरिष्ठता के आधार पर विकल्प दिया जाता है।

इसके बाद अब पुरूषों को भी विकल्प देने की व्यवस्था है। विकल्प में रिक्त स्कूलों की सूची उपलब्ध कराकर एक- एक स्कूल लाक कराया जाता है और उसी स्कूल में शिक्षक की नियुक्ति कर दी जाती है। सभी को विकल्प देने से स्कूल आवंटन में भ्रष्टाचार की गुंजाइश नही रहती है। इसके बाद भी कई दिनों तक विकल्प उपलब्ध कराकर स्कूलों का आवंटन नहीं होता है।
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