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तुलसीदास का साहित्य समन्वयवादी
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 07 Feb 2016 11:27 PM IST
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जनता इंटर कॉलेज अमदही के पूर्व प्रधानाचार्य एवं वरिष्ठ साहित्यकार श्रीनारायण तिवारी की पुस्तक ‘जनपद गोंडा और तुलसीदास’ का विमोचन रविवार को लालबहादुर शास्त्री महाविद्यालय के तुलसी सभागार में किया गया। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एवं दलित चितंक डॉ. बजरंग बिहारी तिवारी, अध्यक्षता वरिष्ठ सहित्यकार डॉ. छोटेलाल दीक्षित व संचालन संस्कृत विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. मंशाराम वर्मा ने किया। डा. श्रीनरायन तिवारी की यह दूसरी पुस्तक है। इसके पहले गोंडा के इतिहास की रचना की।
विमोचन के बाद तुलसीदास साहित्य सृजन एवं चिंतन विषय पर आयोजित गोष्ठी में डॉ. शैलेंद्र मिश्र ने तुलसीदास के साहित्य को लोक मंगलकारी व समन्वयवादी बताया।
साहित्यकार एसपी मिश्र ने कहा कि तुलसी का साहित्य चैतन्य सहित्य है। सुल्तानपुर से आये डॉ. सुशील पांडेय ने कहा कि ये शोध का विषय है।
रामचरित मानस पर संस्कृत के महाकाव्य रघुवंशम का प्रभाव परिलक्षित होता है। डॉ. सूर्यपाल सिंह ने कहा कि आज तुलसी द्वारा रचित ग्रंथों में समाहित संदेशों को समझने की आवश्यकता है। हमें नवीन समाज के निर्माण के लिए नये उपमान व नये संदर्भ तलाशने होंगे।
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डॉ. छोटेलाल दीक्षित ने कहा कि यदि वैश्विक समस्याओं का निदान खोजना है तो हमें तुलसीदास के साहित्य पर प्रकाश डालना होगा। आदर्शों को समझना होगा।
कार्यक्रम में सुरेंद्र मिश्र, हरिराम सिंह, डॉ. उमा सिंह, अर्चना त्रिपाठी, ज्योति मौर्या आदि ने विचार प्रस्तुत किये। शिवपूजन शुक्ल, मुगेंद्र कुशवाहा, यज्ञराम मिश्र यज्ञेश ने कविताओं के माध्यम से तुलसीदास के जीवन चरित पर प्रकाश डाला। गोष्ठी में डॉ. मिथलेश मिश्र, डॉ. डीके गुप्ता, डॉ. केएन पांडेय, शिवाकांत मिश्र विद्रोही, धरमवीर आर्य आदि उपस्थित रहे।
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विमोचन के बाद तुलसीदास साहित्य सृजन एवं चिंतन विषय पर आयोजित गोष्ठी में डॉ. शैलेंद्र मिश्र ने तुलसीदास के साहित्य को लोक मंगलकारी व समन्वयवादी बताया।
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साहित्यकार एसपी मिश्र ने कहा कि तुलसी का साहित्य चैतन्य सहित्य है। सुल्तानपुर से आये डॉ. सुशील पांडेय ने कहा कि ये शोध का विषय है।
रामचरित मानस पर संस्कृत के महाकाव्य रघुवंशम का प्रभाव परिलक्षित होता है। डॉ. सूर्यपाल सिंह ने कहा कि आज तुलसी द्वारा रचित ग्रंथों में समाहित संदेशों को समझने की आवश्यकता है। हमें नवीन समाज के निर्माण के लिए नये उपमान व नये संदर्भ तलाशने होंगे।
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डॉ. छोटेलाल दीक्षित ने कहा कि यदि वैश्विक समस्याओं का निदान खोजना है तो हमें तुलसीदास के साहित्य पर प्रकाश डालना होगा। आदर्शों को समझना होगा।
कार्यक्रम में सुरेंद्र मिश्र, हरिराम सिंह, डॉ. उमा सिंह, अर्चना त्रिपाठी, ज्योति मौर्या आदि ने विचार प्रस्तुत किये। शिवपूजन शुक्ल, मुगेंद्र कुशवाहा, यज्ञराम मिश्र यज्ञेश ने कविताओं के माध्यम से तुलसीदास के जीवन चरित पर प्रकाश डाला। गोष्ठी में डॉ. मिथलेश मिश्र, डॉ. डीके गुप्ता, डॉ. केएन पांडेय, शिवाकांत मिश्र विद्रोही, धरमवीर आर्य आदि उपस्थित रहे।