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Gonda News: उधार के डॉक्टर के भरोसे मीठी गोलियों से इलाज
Thu, 09 Apr 2026 11:01 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Thu, 09 Apr 2026 11:01 PM IST
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गोंडा। जिले में होम्योपैथिक स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति बदहाल है। मुख्यालय स्थित मेडिकल कॉलेज परिसर में संचालित राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल बीते काफी समय से उधार के डॉक्टर के भरोसे चल रहा है।
स्थायी पद पर तैनाती न हो पाने से यहां इलाज के लिए आने वाले मरीजों को संबद्धता के कारण सप्ताह में केवल तीन दिन ही चिकित्सकीय परामर्श मिल पाता है। बाकी दिनों में उनका इलाज अस्पताल फार्मासिस्ट के सहारे होता है। इससे मरीजों को समुचित इलाज न मिल पाने से काफी परेशानी उठाना पड़ती है।
बृहस्पतिवार को अस्पताल में डॉ. जितेंद्र कुमार मरीजों को देख रहे थे। मूलतौर पर डॉ. जितेंद्र कुमार की तैनाती कौड़िया बाजार स्थित अस्पताल में है लेकिन उन्हें मुख्यालय से संबद्ध किया गया है। इसलिए वह सोमवार, गुरुवार और शनिवार को ही मुख्यालय स्थित होम्योपैथी अस्पताल मरीजों को परामर्श देने आते हैं।
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अन्य तीन दिन वह कौड़िया बाजार में अपनी सेवाएं देते हैं। इलाज कराने के लिए पहुंची वंदना ने बताया कि उन्हें लंबे समय से पैर में दर्द की शिकायत है लेकिन डॉक्टर के मिलने पर तो जांच कर अच्छी दवा मिल जाती है लेकिन उनके न होने पर मौजूद फार्मासिस्ट ही हालचाल पूछ कर दवा के नाम पर मीठी गोलियां दे देता है। (संवाद)
11 अस्पताल, लेकिन डॉक्टरों की भारी कमी
जिले में कुल 11 राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल संचालित हैं, जिनमें दो शहरी और बाकी ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। मुख्यालय अस्पताल में दो चिकित्साधिकारियों की तैनाती का प्रावधान है। इसके बावजूद वर्तमान में तैनाती न होने से एक भी स्थायी डॉक्टर उपलब्ध नहीं है। डॉ. जितेंद्र कुमार के अनुसार विभाग में 12 चिकित्साधिकारी के पद सृजित हैं लेकिन केवल आठ पर ही तैनाती है। तीन वरिष्ठ चिकित्साधिकारी के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं।
फार्मासिस्ट के भरोसे चल रही व्यवस्था
फार्मासिस्ट की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। 11 पदों के मुकाबले केवल नौ फार्मासिस्ट ही तैनात हैं। बभनजोत और बकठोरवा जैसे केंद्रों पर कोई भी फार्मासिस्ट की तैनाती नहीं है। डॉक्टरों की कमी के चलते दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता के बावजूद मरीजों को इलाज में इसका पूरा फायदा नहीं मिल पाता है। मुख्यालय में डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों को निजी चिकित्सकों के पास जाने को विवश होना पड़ता है।
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स्थायी पद पर तैनाती न हो पाने से यहां इलाज के लिए आने वाले मरीजों को संबद्धता के कारण सप्ताह में केवल तीन दिन ही चिकित्सकीय परामर्श मिल पाता है। बाकी दिनों में उनका इलाज अस्पताल फार्मासिस्ट के सहारे होता है। इससे मरीजों को समुचित इलाज न मिल पाने से काफी परेशानी उठाना पड़ती है।
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बृहस्पतिवार को अस्पताल में डॉ. जितेंद्र कुमार मरीजों को देख रहे थे। मूलतौर पर डॉ. जितेंद्र कुमार की तैनाती कौड़िया बाजार स्थित अस्पताल में है लेकिन उन्हें मुख्यालय से संबद्ध किया गया है। इसलिए वह सोमवार, गुरुवार और शनिवार को ही मुख्यालय स्थित होम्योपैथी अस्पताल मरीजों को परामर्श देने आते हैं।
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अन्य तीन दिन वह कौड़िया बाजार में अपनी सेवाएं देते हैं। इलाज कराने के लिए पहुंची वंदना ने बताया कि उन्हें लंबे समय से पैर में दर्द की शिकायत है लेकिन डॉक्टर के मिलने पर तो जांच कर अच्छी दवा मिल जाती है लेकिन उनके न होने पर मौजूद फार्मासिस्ट ही हालचाल पूछ कर दवा के नाम पर मीठी गोलियां दे देता है। (संवाद)
11 अस्पताल, लेकिन डॉक्टरों की भारी कमी
जिले में कुल 11 राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल संचालित हैं, जिनमें दो शहरी और बाकी ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। मुख्यालय अस्पताल में दो चिकित्साधिकारियों की तैनाती का प्रावधान है। इसके बावजूद वर्तमान में तैनाती न होने से एक भी स्थायी डॉक्टर उपलब्ध नहीं है। डॉ. जितेंद्र कुमार के अनुसार विभाग में 12 चिकित्साधिकारी के पद सृजित हैं लेकिन केवल आठ पर ही तैनाती है। तीन वरिष्ठ चिकित्साधिकारी के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं।
फार्मासिस्ट के भरोसे चल रही व्यवस्था
फार्मासिस्ट की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। 11 पदों के मुकाबले केवल नौ फार्मासिस्ट ही तैनात हैं। बभनजोत और बकठोरवा जैसे केंद्रों पर कोई भी फार्मासिस्ट की तैनाती नहीं है। डॉक्टरों की कमी के चलते दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता के बावजूद मरीजों को इलाज में इसका पूरा फायदा नहीं मिल पाता है। मुख्यालय में डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों को निजी चिकित्सकों के पास जाने को विवश होना पड़ता है।