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गंदगी के खिलाफ किया प्रदर्शन

Mon, 28 Dec 2015 11:37 PM IST
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 28 Dec 2015 11:37 PM IST
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पसका में कल्पवास की परम्परा को अपने ही लोग गंदगी फैलाकर खत्म करने में लगे हैं। इसके कारण कल्पवास के लिए यहां आने वाले लोगों की धार्मिक मान्यता को ठेस पहुंच रही है। इससे नाराज नागा साधुओं की टोली ने चेतावनी दी है कि अगर कल्पवास क्षेत्र में गंदगी फैलती रही तो लोग कल्पवास के लिए यहां आएंगे ही नहीं।
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बाबा मंगलदास, बेंचूलाल, बाबा फक्कड़ दास, भाजपा मंडल अध्यक्ष रामसुंदर सहित तमाम लोगों ने पसका घाट की सफाई के लिए सोमवार को प्रदर्शन किया।

चेतावनी दी है कि अगर कल्पवास क्षेत्र व स्नानघाट की व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो वह इसके खिलाफ आंदोलन को बाध्य होंगे।

मालूम हो कि गोस्वमी तुलसीदास की जन्मस्थली राजापुर सूकरखेत से कुछ दूर पसका घाट पर हर साल दूरदराज से लोग आकर एक महीने तक कल्पवास करते हैं।

ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान-ध्यान के साथ ही दिनभर पूजा-पाठ व विभिन्न तरह के धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। बावजूद इसके घाट पर ही शवों का अंतिम संस्कार किया जाता है। इतना ही नहीं जिस जगह पर साधु-संत झोपड़ी बनाकर रहते हैं, वहां भी गंदगी का अंबार लगा रहता है।
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विहिप धर्माचार्य सेवा प्रमुख बाबा प्रेमदास त्यागी का कहना है कि कुछ वर्षों से कल्पवास क्षेत्र में ज्यादा गंदगी हो रही है। इस पर प्रशासन को तत्काल अंकुश लगाने के लिए कोई ऐसा कदम उठाना चाहिए। बाबा राघवदास का कहना है कि सुबह नदी में स्नान करने पर मानव अंग की हड्डियां उनके पैरों में गड़ जाती हैं।
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शवों के दाह संस्कार से काला धुआं और उसकी राख से भी दिक्कत होती हैं। जम्मू-कश्मीर से आए नागा भोजपत्र गिरि ने कल्पवास क्षेत्र के साथ होने वाली छेड़छाड़ पर गहरी नाराजगी जताई है।

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