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Gonda News: सनातन व समाज का दर्पण है श्रीरामचरित मानस

Sun, 04 May 2025 11:46 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा Updated Sun, 04 May 2025 11:46 PM IST
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Shri Ramcharit Manas is the mirror of Sanatan and society
परसपुर के बड़के पुरवा बेलमत्थर में श्रीराम कथा सुनते श्रद्धालु। -संवाद
परसपुर (गोंडा)। श्रद्धा के साथ सत्संग व प्रभु की पावन कथा में जाने से लोगों के हृदय में भगवान के प्रति अटूट भक्ति, प्रेम व समर्पण की भावना उत्पन्न होती है। प्रभु कहते हैं जो भक्त हमारे चरण-शरण में आएगा उसे हम अपनाकर भक्ति प्रदान करेंगे। ये बातें बेलमत्थर बड़केपुरवा में आयोजित श्रीमद्देवी भागवत कथा में प्रवाचक सर्वेश महाराज ने रामचरित मानस का वर्णन करते हुए कहीं।
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उन्होंने कहा, मानस सनातन व समाज का सबसे बड़ा दर्पण है। यह गंगा के समान है। इसमें गोते लगाने पर सब कुछ मिल जाता है। यही मानस की विशेषता है। प्रवाचक ने श्रीराम कथा के माध्यम से युवा पीढ़ी को सचेत करते हुए कहा कि पुलिस से बचने के लिए नहीं, बल्कि अपनी सुरक्षा के लिए हेलमेट लगाकर ही बाइक चलाएं। बिजली व पानी बचाने, पौधे लगाने व बड़ों का आदर करने का आह्वान करते हुए कहा कि श्रीराम कथा हमें जिम्मेदारी भी सिखाती है। जिसे सभी को आत्मसात करना चाहिए। इस अवसर पर जगदंबा शरण मिश्र, काली शरण मिश्र, लाल बाबू शुक्ल, प्रिंस मिश्र, अजय शुक्ल आदि मौजूद रहे।
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पतन की ओर ले जाता है अहंकार
पसका (गोंडा)। मनुष्य का अहंकार उसे पतन की ओर ले जाता है, इसलिए अहंकार का त्याग करना चाहिए। अहंकार का परिणाम सदा बुरा ही होता है। ये बातें परसपुर के ग्राम मधईपुर खांडेराय के बरवन पुरवा में आयोजित संगीतमयी श्रीराम कथा में प्रवाचक प्रीति व्यास ने कहीं। उन्होंने रावण वध का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि राम ने रावण का वध कर बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया। कथा के दौरान चंद्रप्रकाश सिंह, सुशील सिंह, अर्जुन सिंह आदि मौजूद रहे। (संवाद)
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भगवान की प्राप्ति का सरल मार्ग है भक्ति : आचार्य अनूप
बेलसर (गोंडा)। मनुष्य में जब भक्ति प्रवेश करती है तो उसका दिल गंगाजल की तरह पावन व पवित्र हो जाता है। भक्ति ईश्वर की एक ऐसी शक्ति है जिससे मनुष्य को अपार उर्जा प्रदान होती है। ये बातें बेलसर के गोपीपुर में आयोजित संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा में प्रवाचक आचार्य अनूप वाजपेयी ने कही। उन्होंने कहा, इस कलिकाल में परमात्मा की प्राप्ति के तीन मार्ग भक्ति, ज्ञान व वैराग्य हैं। इनमें सबसे सरल मार्ग भक्ति का है। यदि भक्त बन गए तो परमात्मा स्वयं रक्षा के लिए उपस्थित रहेंगे। कथा के दौरान सुखवीर सिंह, अमित सिंह, महिपाल सिंह आदि मौजूद रहे। (संवाद)



अच्छे कर्मों के लिए प्रेरित करती है श्रीमद्भागवत कथा
पसका (गोंडा)। श्रीमद्भागवत कथा का मूलमंत्र सदाचार है, जो लोगों को अच्छे कर्म करने व बेहतर जीवन जीने के लिए प्रेरित करता है। यह कथा लोगों को अज्ञान से ज्ञान की ओर ले जाती है और उन्हें परम वास्तविकता को समझने में मदद करती है। ये बातें परसपुर के प्योली के पूरे बिलंद में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा में प्रवाचक पं. सुमित मिश्र ने कही। प्रवाचक ने कहा, श्रीमद्भागवत कथा सुनने से लोगों को जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति मिलती है। कथा के दौरान हरिशंकर सिंह, जय सिंह, लक्ष्मण सिंह, हौसला प्रसाद सिंह, विजय बहादुर सिंह, रवींद्र सिंह आदि मौजूद रहे। (संवाद)





सत्य मार्ग पर चलने वाले की हार नहीं होती
बालपुर (गोंडा)। बालपुर के प्राचीन राम जानकी मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में प्रवाचक लक्ष्मीकांत मिश्र में बताया कि जो मनुष्य सत्य मार्ग पर चलता है भगवान उसकी मदद के लिए स्वयं चले आते हैं। श्रीमद्भागवत में लिखा है राजा हिरण्यकश्यप के पुत्र भक्त प्रहलाद माया मोह को छोड़कर भगवान की भक्ति में लीन हो गए। भगवान ने अवतार लेकर उन पर कृपा की। कथा में कोयल तिवारी, ज्ञान, दुर्गेश, गोदे तिवारी, कृष्ण मोहन गुप्ता, राम प्रसाद चौबे आदि मौजूद रहे। (संवाद)





श्रीकृष्ण जन्म की सुनाई कथा

पसका (गोंडा)। भगवान के अवतार लेने का अर्थ कभी भी चमत्कार दिखाना या शक्ति-प्रदर्शन नहीं होता, बल्कि वह सभी जीवों के बीच एक साधारण मानव का जीवन जीते हुए अपनी उत्कृष्टता का परिचय देते हैं, ताकि हम भी अपने सद्गुणों की उच्चता को प्राप्त करने के लिए प्रेरित हों। ये बातें परसपुर के धनुही में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा में प्रवाचक पं. प्रदीप तिवारी ने कही। प्रवाचक ने श्रीकृष्ण जन्म की कथा सुनाई। (संवाद)


सत्संग से निर्मल बनता है जीवन

पसका (गोंडा)। सत्संग जीवन को निर्मल और पवित्र बनाता है। यह मन के बुरे विचारों व पापों को दूर करता है। सत्संगति मूर्खता को हर लेती है, वाणी में सत्यता का संचार करती है। ये बातें परसपुर विकासखंड के सहजौरा टेपरा में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा में प्रवाचक पं रमेश पांडेय ने कही। प्रवाचक ने धुंधकारी की कथा सुनाई। कथा के दौरान शिवभान, रामचरन, स्वामीदयाल, हनुमान, दीनानाथ, जगनारायण आदि मौजूद रहे। (संवाद)
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