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Gonda News: मेडिकल कॉलेज में दर्द व गैस की दवा का संकट
Thu, 08 Oct 2026 11:47 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Thu, 08 Oct 2026 11:47 PM IST
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गोंडा। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध बाबू ईश्वर शरण चिकित्सालय में जरूरी दवाओं का संकट बना हुआ है। दर्द निवारक डाइक्लो, एक्लोफिनेक और ट्रामाडोल टैबलेट के साथ गैस की दवा ओमेज भी उपलब्ध नहीं है। मरीजों को कई दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं। कर्मचारियों के अनुसार ग्लूकोज की डीएनएस, आरएल बोतल और कुछ एंटीबायोटिक इंजेक्शन का स्टॉक भी खत्म हो गया है।
अस्पताल में करीब 80 प्रकार की जरूरी दवाएं उपलब्ध होनी चाहिए लेकिन फिलहाल करीब 40 प्रकार की दवाएं ही हैं। इनमें भी कई का स्टॉक सीमित है। मेडिकल कॉलेज में रोजाना 1500 से अधिक मरीज पहुंचते हैं। दवाओं की कमी से मरीजों और तीमारदारों की परेशानी बढ़ गई है।
बृहस्पतिवार को भदुआ तरहर निवासी विमला शरीर में दर्द की शिकायत लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंचीं। डॉक्टर ने तीन दवाएं लिखीं लेकिन दर्द की दवा और ओमेज नहीं मिली। बहराइच रोड निवासी सचिन मिश्र ने बताया कि उनके पिता की आंखों में परेशानी है। डॉक्टर ने दवा लिखी लेकिन डाइक्लो ड्रॉप नहीं मिला। उन्हें बाहर से दवा लेने को कहा गया। भदुआ तरहर के रवि ने बताया कि वह बुखार और कमजोरी के इलाज के लिए आए थे। डॉक्टर ने तीन दवाएं लिखीं, जिनमें से दो अस्पताल से मिलीं, जबकि एक बाहर से खरीदने को कहा गया। उमेश शुक्ल और शोभाराम ने भी बताया कि काउंटर से कई बार एक-दो दवाएं ही मिलती हैं। बाकी बाहर से खरीदनी पड़ती हैं।
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अस्पताल में करीब 80 प्रकार की जरूरी दवाएं उपलब्ध होनी चाहिए लेकिन फिलहाल करीब 40 प्रकार की दवाएं ही हैं। इनमें भी कई का स्टॉक सीमित है। मेडिकल कॉलेज में रोजाना 1500 से अधिक मरीज पहुंचते हैं। दवाओं की कमी से मरीजों और तीमारदारों की परेशानी बढ़ गई है।
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बृहस्पतिवार को भदुआ तरहर निवासी विमला शरीर में दर्द की शिकायत लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंचीं। डॉक्टर ने तीन दवाएं लिखीं लेकिन दर्द की दवा और ओमेज नहीं मिली। बहराइच रोड निवासी सचिन मिश्र ने बताया कि उनके पिता की आंखों में परेशानी है। डॉक्टर ने दवा लिखी लेकिन डाइक्लो ड्रॉप नहीं मिला। उन्हें बाहर से दवा लेने को कहा गया। भदुआ तरहर के रवि ने बताया कि वह बुखार और कमजोरी के इलाज के लिए आए थे। डॉक्टर ने तीन दवाएं लिखीं, जिनमें से दो अस्पताल से मिलीं, जबकि एक बाहर से खरीदने को कहा गया। उमेश शुक्ल और शोभाराम ने भी बताया कि काउंटर से कई बार एक-दो दवाएं ही मिलती हैं। बाकी बाहर से खरीदनी पड़ती हैं।
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