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शिवगढ़ धाम मंदिर
बलरामपुर/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 09 Aug 2015 11:28 PM IST
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शिवगढ़ धाम मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है। पूजा-अर्चना के लिए मंदिर में देश-विदेश केे भक्तों का तांता लगा रहता है। दो सौ वर्ष पुराना शिवगढ़ धाम मंदिर परंपराओं से परिपूर्ण है। सावन महीने में जलाभिषेक करने के लिए मंदिर में कांवरियों की भारी भीड़ जुटती है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक पचपेड़वा नगर क्षेत्र के निकट स्थित शिवगढ़ धाम का शिवमंदिर करीब दो सौ वर्ष पुराना है। मंदिर के प्रबंधक शिवकुमार वर्मा ने बताया कि करीब दो सौ साल पहले एक दिन पाले आरख नामक व्यक्ति सुबह अपने खेत में काम करने गया था।
खेत की कुदाल से पाले गोड़ाई कर रहा था तभी कुदाल एक पत्थर से टकराया। पत्थर से टकराते ही खून की धारा निकलने लगी। खून की धारा देख पाले डर गया। गांव पहुंचकर लोगों से घटना बताई। गांव के लोगों ने खून की बह रही धारा के आसपास सफाई की तो पत्थर शिवलिंग के रूप दिखाई पड़ा।
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स्थानीय लोगों के अनुसार पाले आरख को सपने में मदिर निर्माण कराने का आदेश मिला। पाले आरख ने अपने खेत में शिवमंदिर निर्माण कराने का निर्णय लिया। लोगों की मदद से मंदिर का निर्माण पूरा होने के बाद शिवलिंग की स्थापना की गई।
शिवलिंग की स्थापना पूरा होने के बाद शिवगढ़ धाम मंदिर में पूजा-अर्चना शुरू हो गई। देखते ही देखते मंदिर की भव्यता बढ़ती गई। मंदिर की भव्यता के लिए आज भी लोग प्रयासरत हैं। यहां देश-विदेश के श्रद्धालु आते हैं। लोगों का मानना है कि मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद भक्तों की सभी मन्नतें पूरी होती हैं।
सावन महीने के हर सोमवार को शिवगढ़ धाम मंदिर में जुटने वाली भीड़ को नियंत्रित करने के लिए स्थानीय प्रशासन की तरफ से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए जाते हैं। थानाध्यक्ष पचपेड़वा अर्जुन यादव ने बताया कि श्रद्घालुओं की सुरक्षा का व्यापक इंतजाम किया जाता है।
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स्थानीय लोगों के मुताबिक पचपेड़वा नगर क्षेत्र के निकट स्थित शिवगढ़ धाम का शिवमंदिर करीब दो सौ वर्ष पुराना है। मंदिर के प्रबंधक शिवकुमार वर्मा ने बताया कि करीब दो सौ साल पहले एक दिन पाले आरख नामक व्यक्ति सुबह अपने खेत में काम करने गया था।
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खेत की कुदाल से पाले गोड़ाई कर रहा था तभी कुदाल एक पत्थर से टकराया। पत्थर से टकराते ही खून की धारा निकलने लगी। खून की धारा देख पाले डर गया। गांव पहुंचकर लोगों से घटना बताई। गांव के लोगों ने खून की बह रही धारा के आसपास सफाई की तो पत्थर शिवलिंग के रूप दिखाई पड़ा।
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स्थानीय लोगों के अनुसार पाले आरख को सपने में मदिर निर्माण कराने का आदेश मिला। पाले आरख ने अपने खेत में शिवमंदिर निर्माण कराने का निर्णय लिया। लोगों की मदद से मंदिर का निर्माण पूरा होने के बाद शिवलिंग की स्थापना की गई।
शिवलिंग की स्थापना पूरा होने के बाद शिवगढ़ धाम मंदिर में पूजा-अर्चना शुरू हो गई। देखते ही देखते मंदिर की भव्यता बढ़ती गई। मंदिर की भव्यता के लिए आज भी लोग प्रयासरत हैं। यहां देश-विदेश के श्रद्धालु आते हैं। लोगों का मानना है कि मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद भक्तों की सभी मन्नतें पूरी होती हैं।
सावन महीने के हर सोमवार को शिवगढ़ धाम मंदिर में जुटने वाली भीड़ को नियंत्रित करने के लिए स्थानीय प्रशासन की तरफ से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए जाते हैं। थानाध्यक्ष पचपेड़वा अर्जुन यादव ने बताया कि श्रद्घालुओं की सुरक्षा का व्यापक इंतजाम किया जाता है।