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वैज्ञानिक सोच दिखाता है विकास की राह
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गोंडा। विज्ञान कुदरत के कण-कण में शामिल है। इसलिए आज मनुष्य ने जो तरक्की की है, जो खोज की है। उसके कारण ही मनुष्य समुंदर से लेकर आसमान तक उड़ान भरने के योग्य हुआ है।
प्रकाश के क्षेत्र में अपने उत्कृष्ट कार्य के लिए सर सीवी रमन को वर्ष 1930 में नोबेल पुरस्कार दिया गया था। उन्हें विज्ञान के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले पहले एशियाई होने का गौरव भी प्राप्त है।
उनका आविष्कार उनके नाम पर ही रमन प्रभाव के नाम से जाना जाता है। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर रे आफ साइंस द्वारा गोंडा मे तीन दिवसीय जन विज्ञान यात्रा शुरू की गयी। जन विज्ञान यात्रा बुधईपुरवा, शुकुलपुरवा, कटहामाफी, बनवरिया, भटपुरवा सहित विभिन्न जगहों पर जाकर बच्चों को विज्ञान जागरूक कर रही है।
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जन विज्ञान यात्रा में विज्ञान संचारक राजेश मिश्रा द्वारा बच्चों को कागज गीला क्यों नहीं हुआ, मिट्टी के कितने घटक, पानी क्यो नहीं गिरा, मोमबत्ती बुझी क्यों, उल्टे ग्लास में पानी क्यों, क्या ईट में हवा है आदि प्रयोगों को करके दिखाया तथा इनके पीछे छिपे हुए वैज्ञानिक सिद्धांतों को भी समझाया।
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प्रकाश के क्षेत्र में अपने उत्कृष्ट कार्य के लिए सर सीवी रमन को वर्ष 1930 में नोबेल पुरस्कार दिया गया था। उन्हें विज्ञान के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले पहले एशियाई होने का गौरव भी प्राप्त है।
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उनका आविष्कार उनके नाम पर ही रमन प्रभाव के नाम से जाना जाता है। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर रे आफ साइंस द्वारा गोंडा मे तीन दिवसीय जन विज्ञान यात्रा शुरू की गयी। जन विज्ञान यात्रा बुधईपुरवा, शुकुलपुरवा, कटहामाफी, बनवरिया, भटपुरवा सहित विभिन्न जगहों पर जाकर बच्चों को विज्ञान जागरूक कर रही है।
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जन विज्ञान यात्रा में विज्ञान संचारक राजेश मिश्रा द्वारा बच्चों को कागज गीला क्यों नहीं हुआ, मिट्टी के कितने घटक, पानी क्यो नहीं गिरा, मोमबत्ती बुझी क्यों, उल्टे ग्लास में पानी क्यों, क्या ईट में हवा है आदि प्रयोगों को करके दिखाया तथा इनके पीछे छिपे हुए वैज्ञानिक सिद्धांतों को भी समझाया।