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मेडिकल कॉलेज शुरू करने की तैयारी, 1,451 पद तय
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गोंडा। जिले में मेडिकल कॉलेज संचालित करने की तैयारी लगभग पूरी हो गई है। इसके लिए 1,451 पद सृजित किए गये हैं। इसके तहत 778 नियमित, चार पद प्रतिनियुक्ति से और 669 पद आउटसोर्सिंग से भरे जाएंगे। 283 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की सौ सीटों पर पढ़ाई होगी। पद सृजित होने से जल्द ही मेडिकल कॉलेज के संचालन की उम्मीद भी बढ़ी है।
नए मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों व कर्मचारियों के पदों पर जल्द भर्ती होने जा रही है। जिसमें जिले में बन रहे मेडिकल कॉलेज के लिए सृजित पद भी शामिल हैं। मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की सौ सीटें होंगी। ऐसे में राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) के मानकों के आधार पर पद सृजित हुए हैं। इसमें 778 पदों को सीधी भर्ती से भरा जाएगा, चार पद प्रतिनियुक्ति से और 669 पद आउटसोर्सिंग से भरे जाएंगे। उम्मीद है कि इसी वित्तीय वर्ष में नियुक्तियां हो जाएंगी। इससे एमबीबीएस में दाखिले में जिले को भी स्थान मिलेगा।
जिले का मेडिकल कॉलेज प्रदेश के 14 मेडिकल कॉलेजों में शामिल है। अन्य 13 जिलों के मेडिकल कॉलेजों में भी पदों के सृजन की मंजूरी हो गई है। गोंडा के मेडिकल कॉलेज में 112 पद असिस्टेंट प्रोफेसर, प्रोफेसर व फिजिस्ट आदि के तय हुए हैं। वहीं, 446 पद सीनियर रेजीडेंट, जूनियर रेजीडेंट व मेडिकल ऑफिसर और 110 पद चीफ फार्मासिस्ट, डेंटल टेक्नीशियन व फामासिस्ट के हैं। 110 पद गैर तकनीकी संवर्ग के तय हैं।
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इस तरह मेडिकल कॉलेज में 778 नियमित पद सृजित किए गये हैं। चार पद प्रतिनियुक्ति से भरे जाएंगे। ये पद जूनियर इंजीनियर व वेटनरी ऑफिसर के हैं। वहीं, हर मेडिकल कॉलेज में 669 पद आउटसोर्सिंग से भरे जाएंगे। इसमें डिप्टी लाइब्रेरियन, मेडिकल सोशल वर्कर, काउंसिलर, कंप्यूटर ऑपरेटर व डाटा एंट्री ऑपरेटर के पद शामिल हैं। प्रमुख सचिव, चिकित्सा शिक्षा की ओर से पदों के सृजन का आदेश जारी कर दिया गया है। चयन की प्रक्रिया शासन स्तर से तैयार किए जा रहे नियमों के तहत होगी।
जिले के मेडिकल कॉलेज में अंतर विषयी शोध इकाई का भी गठन होगा। इसमें मेडिकल कॉलेजों के सभी विभाग एक प्लेटफार्म पर आकर शोध करेंगे। बीमारियों का किस तरह सस्ता व अच्छा इलाज किया जाए, इस पर रिसर्च होगा। अगर किसी क्षेत्र विशेष में कोई बीमारी फैली है, तो ये शोध इकाई उसके कारणों का पता लगाकर समाधान के उपाय खोजेगी। मेडिकल कॉलेज का संचालन शुरू होने पर शोध इकाई का गठन करके नए छात्रों को बड़े अवसर देने का प्रयास होगा। कॉलेज में नियुक्त विशेषज्ञ भी अपने स्तर से शोध करेंगे और छात्रों को नवीन जानकारी देंगे। फिलहाल मेडिकल कॉलेज का निर्माण पूरा होने के बाद इन सुविधाओं का विस्तर होगा।
हाल ही में राज्य सरकार की ओर से जारी किए गये बजट में निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेजों को समय से पूरा करने के लिए प्रावधान किया गया है। इससे जल्द से जल्द मेडिकल कॉलेज का संचालन शुरू होने की उम्मीद जगी है। वहीं, राज्यपाल के स्तर से मेडिकल कॉलेजों में पदों के सृजन की स्वीकृति भी दे दी गई है।
जिलाधिकारी डॉ. उज्ज्वल कुमार ने बताया कि मेडिकल कॉलेज के निर्माण की निगरानी की जा रही है। तेजी से कार्य पूरा करने का पूरा जोर है। शासन के निर्देश के आधार पर मेडिकल कॉलेज के संचालन की कार्रवाई होगी।
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नए मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों व कर्मचारियों के पदों पर जल्द भर्ती होने जा रही है। जिसमें जिले में बन रहे मेडिकल कॉलेज के लिए सृजित पद भी शामिल हैं। मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की सौ सीटें होंगी। ऐसे में राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) के मानकों के आधार पर पद सृजित हुए हैं। इसमें 778 पदों को सीधी भर्ती से भरा जाएगा, चार पद प्रतिनियुक्ति से और 669 पद आउटसोर्सिंग से भरे जाएंगे। उम्मीद है कि इसी वित्तीय वर्ष में नियुक्तियां हो जाएंगी। इससे एमबीबीएस में दाखिले में जिले को भी स्थान मिलेगा।
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जिले का मेडिकल कॉलेज प्रदेश के 14 मेडिकल कॉलेजों में शामिल है। अन्य 13 जिलों के मेडिकल कॉलेजों में भी पदों के सृजन की मंजूरी हो गई है। गोंडा के मेडिकल कॉलेज में 112 पद असिस्टेंट प्रोफेसर, प्रोफेसर व फिजिस्ट आदि के तय हुए हैं। वहीं, 446 पद सीनियर रेजीडेंट, जूनियर रेजीडेंट व मेडिकल ऑफिसर और 110 पद चीफ फार्मासिस्ट, डेंटल टेक्नीशियन व फामासिस्ट के हैं। 110 पद गैर तकनीकी संवर्ग के तय हैं।
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इस तरह मेडिकल कॉलेज में 778 नियमित पद सृजित किए गये हैं। चार पद प्रतिनियुक्ति से भरे जाएंगे। ये पद जूनियर इंजीनियर व वेटनरी ऑफिसर के हैं। वहीं, हर मेडिकल कॉलेज में 669 पद आउटसोर्सिंग से भरे जाएंगे। इसमें डिप्टी लाइब्रेरियन, मेडिकल सोशल वर्कर, काउंसिलर, कंप्यूटर ऑपरेटर व डाटा एंट्री ऑपरेटर के पद शामिल हैं। प्रमुख सचिव, चिकित्सा शिक्षा की ओर से पदों के सृजन का आदेश जारी कर दिया गया है। चयन की प्रक्रिया शासन स्तर से तैयार किए जा रहे नियमों के तहत होगी।
जिले के मेडिकल कॉलेज में अंतर विषयी शोध इकाई का भी गठन होगा। इसमें मेडिकल कॉलेजों के सभी विभाग एक प्लेटफार्म पर आकर शोध करेंगे। बीमारियों का किस तरह सस्ता व अच्छा इलाज किया जाए, इस पर रिसर्च होगा। अगर किसी क्षेत्र विशेष में कोई बीमारी फैली है, तो ये शोध इकाई उसके कारणों का पता लगाकर समाधान के उपाय खोजेगी। मेडिकल कॉलेज का संचालन शुरू होने पर शोध इकाई का गठन करके नए छात्रों को बड़े अवसर देने का प्रयास होगा। कॉलेज में नियुक्त विशेषज्ञ भी अपने स्तर से शोध करेंगे और छात्रों को नवीन जानकारी देंगे। फिलहाल मेडिकल कॉलेज का निर्माण पूरा होने के बाद इन सुविधाओं का विस्तर होगा।
हाल ही में राज्य सरकार की ओर से जारी किए गये बजट में निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेजों को समय से पूरा करने के लिए प्रावधान किया गया है। इससे जल्द से जल्द मेडिकल कॉलेज का संचालन शुरू होने की उम्मीद जगी है। वहीं, राज्यपाल के स्तर से मेडिकल कॉलेजों में पदों के सृजन की स्वीकृति भी दे दी गई है।
जिलाधिकारी डॉ. उज्ज्वल कुमार ने बताया कि मेडिकल कॉलेज के निर्माण की निगरानी की जा रही है। तेजी से कार्य पूरा करने का पूरा जोर है। शासन के निर्देश के आधार पर मेडिकल कॉलेज के संचालन की कार्रवाई होगी।