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निजी सेंटरों पर सोनोग्राफी कराने को मजबूर गर्भवती महिलाएं
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निजी सेंटरों पर सोनोग्राफी कराने को मजबूर गर्भवती महिलाएं
घंटों लगानी पड़ती है लाइन, वसूली जाती मोटी रकम
जिला अस्पताल से रोज 300 महिलाओं को दी जाती जांच की सलाह
चिकित्सालय में सिर्फ एक मशीन, सिर्फ 100 की होती जांच
फोटो-1-2-3-4
अरुण कुमार मिश्र
गोंडा। गर्भवती महिलाओं की जांच के लिए सरकारी अस्पताल में पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं। जिला महिला अस्पताल में प्रतिदिन ओपीडी में आने वालीं करीब 300 महिलाओं को सीधे सोनोग्राफी कराने की सलाह दी जाती है। इसे कराने के लिए महिलाओं को सरकारी व गैर सरकारी सोनोग्राफी केंद्रों पर घंटों लाइन लगाकर इंतजार करना पड़ता है। महिला अस्पताल में समय बचत के लिए कुछ गर्भवती माताएं निजी संचालकों के यहां पहुंच जाती हैं लेकिन वहां भी उन्हें लाइन लगाना पड़ता है। लाइन लगाने तक तो ठीक उनसे मुंह मांगी कीमत वसूल की जाती है इसके बाद भी बिना किसी रेडियोलॉजिस्ट के रिपोर्ट तैयार की जाती है।
जिले की करीब 40 लाख आबादी में आधी आबादी के लिए एक मात्र जिला महिला अस्पताल है। इसमें मात्र एक सोनोग्राफी की मशीन लगी है। वह भी किसी दिन खुलती तो किसी दिन बंद रहती है। लेकिन गर्भवती महिलाओं की प्रतिदिन भीड़ रहती है। आपात काल से लेकर सामान्य दिनों में करीब 300 महिलाएं ओपीडी में दिखाने आती हैं। डॉक्टरों की सलाह पर उन्हें हर बार सोनोग्राफी करानी होती है। जिला महिला अस्पताल में करीब 100 महिलाओं की ही सोनोग्राफी हो पाती है, जबकि 200 गर्भवतियों को निजी सेंटरों पर सोनोग्राफी के लिए लाइन लगाना पड़ता है। एक सोनोग्राफी के लिए 500 रुपए फीस ली जाती है। गोंडा में एक मात्र सोनोग्राफी सेंटर है जहां पर रेडियोलॉजिस्ट है शेष 100 से अधिक सेंटर बिना रेडियोलॉजिस्ट के संचालित हैं। इससे गर्भवतियों की कराह की परवाह किए बिना रिपोर्ट तैयार की जाती है और उनका धंधा चमक रहा है।
इनसेट
मामला गंभीर बताकर ऑपरेशन के लिए दी जाती सलाह
पीसीपीएनडीटी (प्री-ट्रांसेक्शन एंड प्री-नैटल डायग्नोस्टिक टेक्निक) यानि पूर्व प्रसव निदान का बोर्ड सभी सेंटरों पर लगा है। हर जगह लिखा है कि यहां गर्भस्थ शिशु का लिंग परीक्षण नहीं किया जाता है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी यह कभी जांच नहीं करते कि जो रिपोर्ट दी जाती है उसे किसने तैयार किया है। बिना डॉक्टर के केवल ऑपरेटर ही रिपोर्ट तैयार करते हैं। इससे अधिकांश गर्भवतियों को ऑपरेशन की सलाह दी जाती है। जिससे डॉक्टरों का भी धंधा चटक रहा है। सामान्य प्रसव को कांप्लीकेटेड दिखाकर सीजर कराने की सलाह दी जाती है।
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इनसेट
महिलाओं ने बयां किया दर्द
महिला अस्पताल में जांच कराने आईं रमावती ने बताया कि वह बीते तीन घंटे से लाइन में लगी हैं। उन्हें तकलीफ भी है लेकिन नंबर जब आएगा तभी सोनोग्राफी हो पाएगी। एक निजी सेंटर पर लाइन में लगी सीतादेवी ने बताया कि बिना पैसे जमा किए अंदर जाने ही नहीं दिया जाता है। पूरा पैसा जमा करने के बाद भी नंबर लगाकर बैठे हैं। एक अन्य महिला ने बताया कि दिखाने के लिए वह सुबह आठ बजे आई थी। दिन के दो बजे तक उसे भूखे रहकर सोनोग्राफी के लिए इंतजार करना पड़ा।
इनसेट
सक्रिय हैं दलाल, पहुंचाते हैं निजी सेंटर पर
जिला महिला अस्पताल के अंदर कई दलाल भी सक्रिय रहते हैं। वे निजी अस्पताल व निजी अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर बेहतर शीघ्र जांच कराने की बात कहकर मरीजों को बुला ले जाते हैं। एक महिला दलाल ने बताया कि उसे एक अल्ट्रासाउंड केस पर करीब 50 रुपये मिलते हैं और जो फीस जमा होती है उसमें देखने वाले डॉक्टर का भी हिस्सा होता है।
इनसेट
कराएंगे जांच, होगी छापेमारी
सभी सोनोग्राफी सेंटरों का रजिस्ट्रेशन है और लोगों ने रेडियोलॉजिस्ट का नाम भी लिखा है। लेकिन मौके पर कितने लोग मौजूद रहते हैं इसकी जांच की जाएगी। औचक निरीक्षण किया जाएगा। यह मामला डीएम की बैठक में उठाएंगे।
-डॉ. मधु गैरोला, सीएमओ गोंडा
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घंटों लगानी पड़ती है लाइन, वसूली जाती मोटी रकम
जिला अस्पताल से रोज 300 महिलाओं को दी जाती जांच की सलाह
चिकित्सालय में सिर्फ एक मशीन, सिर्फ 100 की होती जांच
फोटो-1-2-3-4
अरुण कुमार मिश्र
गोंडा। गर्भवती महिलाओं की जांच के लिए सरकारी अस्पताल में पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं। जिला महिला अस्पताल में प्रतिदिन ओपीडी में आने वालीं करीब 300 महिलाओं को सीधे सोनोग्राफी कराने की सलाह दी जाती है। इसे कराने के लिए महिलाओं को सरकारी व गैर सरकारी सोनोग्राफी केंद्रों पर घंटों लाइन लगाकर इंतजार करना पड़ता है। महिला अस्पताल में समय बचत के लिए कुछ गर्भवती माताएं निजी संचालकों के यहां पहुंच जाती हैं लेकिन वहां भी उन्हें लाइन लगाना पड़ता है। लाइन लगाने तक तो ठीक उनसे मुंह मांगी कीमत वसूल की जाती है इसके बाद भी बिना किसी रेडियोलॉजिस्ट के रिपोर्ट तैयार की जाती है।
जिले की करीब 40 लाख आबादी में आधी आबादी के लिए एक मात्र जिला महिला अस्पताल है। इसमें मात्र एक सोनोग्राफी की मशीन लगी है। वह भी किसी दिन खुलती तो किसी दिन बंद रहती है। लेकिन गर्भवती महिलाओं की प्रतिदिन भीड़ रहती है। आपात काल से लेकर सामान्य दिनों में करीब 300 महिलाएं ओपीडी में दिखाने आती हैं। डॉक्टरों की सलाह पर उन्हें हर बार सोनोग्राफी करानी होती है। जिला महिला अस्पताल में करीब 100 महिलाओं की ही सोनोग्राफी हो पाती है, जबकि 200 गर्भवतियों को निजी सेंटरों पर सोनोग्राफी के लिए लाइन लगाना पड़ता है। एक सोनोग्राफी के लिए 500 रुपए फीस ली जाती है। गोंडा में एक मात्र सोनोग्राफी सेंटर है जहां पर रेडियोलॉजिस्ट है शेष 100 से अधिक सेंटर बिना रेडियोलॉजिस्ट के संचालित हैं। इससे गर्भवतियों की कराह की परवाह किए बिना रिपोर्ट तैयार की जाती है और उनका धंधा चमक रहा है।
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मामला गंभीर बताकर ऑपरेशन के लिए दी जाती सलाह
पीसीपीएनडीटी (प्री-ट्रांसेक्शन एंड प्री-नैटल डायग्नोस्टिक टेक्निक) यानि पूर्व प्रसव निदान का बोर्ड सभी सेंटरों पर लगा है। हर जगह लिखा है कि यहां गर्भस्थ शिशु का लिंग परीक्षण नहीं किया जाता है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी यह कभी जांच नहीं करते कि जो रिपोर्ट दी जाती है उसे किसने तैयार किया है। बिना डॉक्टर के केवल ऑपरेटर ही रिपोर्ट तैयार करते हैं। इससे अधिकांश गर्भवतियों को ऑपरेशन की सलाह दी जाती है। जिससे डॉक्टरों का भी धंधा चटक रहा है। सामान्य प्रसव को कांप्लीकेटेड दिखाकर सीजर कराने की सलाह दी जाती है।
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महिलाओं ने बयां किया दर्द
महिला अस्पताल में जांच कराने आईं रमावती ने बताया कि वह बीते तीन घंटे से लाइन में लगी हैं। उन्हें तकलीफ भी है लेकिन नंबर जब आएगा तभी सोनोग्राफी हो पाएगी। एक निजी सेंटर पर लाइन में लगी सीतादेवी ने बताया कि बिना पैसे जमा किए अंदर जाने ही नहीं दिया जाता है। पूरा पैसा जमा करने के बाद भी नंबर लगाकर बैठे हैं। एक अन्य महिला ने बताया कि दिखाने के लिए वह सुबह आठ बजे आई थी। दिन के दो बजे तक उसे भूखे रहकर सोनोग्राफी के लिए इंतजार करना पड़ा।
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सक्रिय हैं दलाल, पहुंचाते हैं निजी सेंटर पर
जिला महिला अस्पताल के अंदर कई दलाल भी सक्रिय रहते हैं। वे निजी अस्पताल व निजी अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर बेहतर शीघ्र जांच कराने की बात कहकर मरीजों को बुला ले जाते हैं। एक महिला दलाल ने बताया कि उसे एक अल्ट्रासाउंड केस पर करीब 50 रुपये मिलते हैं और जो फीस जमा होती है उसमें देखने वाले डॉक्टर का भी हिस्सा होता है।
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कराएंगे जांच, होगी छापेमारी
सभी सोनोग्राफी सेंटरों का रजिस्ट्रेशन है और लोगों ने रेडियोलॉजिस्ट का नाम भी लिखा है। लेकिन मौके पर कितने लोग मौजूद रहते हैं इसकी जांच की जाएगी। औचक निरीक्षण किया जाएगा। यह मामला डीएम की बैठक में उठाएंगे।
-डॉ. मधु गैरोला, सीएमओ गोंडा