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एक कंपनी के बराबर पुलिस कर्मी और रहने को सिर्फ एक बैरक
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गोंडा। तरबगंज थाने में आवास की समस्या से पुलिस कर्मी जूझ रहे हैं। थाने में 111 पुलिस कर्मी तैनात हैं और रहने के लिए सिर्फ छह आरक्षी की व्यवस्था है। छह आरक्षी की क्षमता का एक बैरक है और दो आवास है।
ऐसे में सौ से अधिक पुलिस कर्मियों के पास रहने की व्यवस्था ही नही है। यही नही यहां पर 30 महिला पुलिस कर्मियों की तैनाती है और उनके रहने का कोई इंतजाम नही है। ऐसे में उन्हें किराए पर रहना पड़ता है और आए दिन समस्याओं को जूझना पड़ रहा है। पुलिस विभाग इस ओर ध्यान ही नही दे रहा है।
तहसील मुख्यालय पर स्थित थाना तरबगंज पर तैनात पुलिस कर्मियों के बदौलत भले ही जनता चैन की नींद सोती है, लेकिन पुलिस कर्मियों को ड्यूटी के बाद आराम करने के लिए मिलीं छुट्टी भी परेशानी में ही बीतती है।
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थाना तरबगंज में 65 ग्राम पंचायतें हैं। जहां पर करीब डेढ़ से दो लाख के आबादी के लोगों की सुरक्षा देने कि जिम्मेदारी थाने पर तैनात पुलिस कर्मियों पर है। लेकिन थाने पर आवास व बैरक की कमी के चलते ड्यूटी के बाद आराम के लिए कोई इंतजाम नही है। पुलिस के भरोसे जहां गरीब, असहाय की मदद से लेकर वीआईपी ड्यूटी, अधिकारियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी होती है।
उन पुलिस कर्मियों कि रात कैसे बीत रही है यह जानने के लिए न तो अधिकारियों के पास समय है न जनप्रतिनिधि के पास। थाना तरबगंज थाने पर इस समय 10 उपनिरीक्षक व 70 आरक्षी व 30 महिला आरक्षियों की तैनाती है। लेकिन इनके रहने के लिए थाने पर एक मात्र बैरक है। एक बैरक में छ लोगो के रहने की व्यवस्था होती है।
यह बैरक भी इतनी जर्जर है, खिड़की, दरवाजे सब टूट चुके हैं। हल्की से बरसात होने पर छत टपकना शुरू कर देती है। जिससे ड्यूटी के बाद मिलने वाली आराम कि छुट्टी भी करवट बदलने में ही बीत जाती है। महिला आरक्षी 30 हैं, इनके लिए कोई बैैरक नहीं है।
10 उपनिरीक्षक के रहने के लिए भी कोई व्यवस्था नहीं है। एक उपनिरीक्षक आवास है। शेष 9 लोग कहा रहें, इसकी व्यवस्था उनको खुद करना है। थाना परिसर की बाउंड्री वाल भी नहीं जिससे छुट्टा जानवरों के अंदर आने को दिक्कत बनी रहती है। कुछ दिन पूर्व एक सरकारी आवास बनाए जाने की मंजूरी मिली थीं। करोना काल के चलते वह कार्य भी पिछले छ: माह से बंद चल रहा है।
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ऐसे में सौ से अधिक पुलिस कर्मियों के पास रहने की व्यवस्था ही नही है। यही नही यहां पर 30 महिला पुलिस कर्मियों की तैनाती है और उनके रहने का कोई इंतजाम नही है। ऐसे में उन्हें किराए पर रहना पड़ता है और आए दिन समस्याओं को जूझना पड़ रहा है। पुलिस विभाग इस ओर ध्यान ही नही दे रहा है।
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तहसील मुख्यालय पर स्थित थाना तरबगंज पर तैनात पुलिस कर्मियों के बदौलत भले ही जनता चैन की नींद सोती है, लेकिन पुलिस कर्मियों को ड्यूटी के बाद आराम करने के लिए मिलीं छुट्टी भी परेशानी में ही बीतती है।
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थाना तरबगंज में 65 ग्राम पंचायतें हैं। जहां पर करीब डेढ़ से दो लाख के आबादी के लोगों की सुरक्षा देने कि जिम्मेदारी थाने पर तैनात पुलिस कर्मियों पर है। लेकिन थाने पर आवास व बैरक की कमी के चलते ड्यूटी के बाद आराम के लिए कोई इंतजाम नही है। पुलिस के भरोसे जहां गरीब, असहाय की मदद से लेकर वीआईपी ड्यूटी, अधिकारियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी होती है।
उन पुलिस कर्मियों कि रात कैसे बीत रही है यह जानने के लिए न तो अधिकारियों के पास समय है न जनप्रतिनिधि के पास। थाना तरबगंज थाने पर इस समय 10 उपनिरीक्षक व 70 आरक्षी व 30 महिला आरक्षियों की तैनाती है। लेकिन इनके रहने के लिए थाने पर एक मात्र बैरक है। एक बैरक में छ लोगो के रहने की व्यवस्था होती है।
यह बैरक भी इतनी जर्जर है, खिड़की, दरवाजे सब टूट चुके हैं। हल्की से बरसात होने पर छत टपकना शुरू कर देती है। जिससे ड्यूटी के बाद मिलने वाली आराम कि छुट्टी भी करवट बदलने में ही बीत जाती है। महिला आरक्षी 30 हैं, इनके लिए कोई बैैरक नहीं है।
10 उपनिरीक्षक के रहने के लिए भी कोई व्यवस्था नहीं है। एक उपनिरीक्षक आवास है। शेष 9 लोग कहा रहें, इसकी व्यवस्था उनको खुद करना है। थाना परिसर की बाउंड्री वाल भी नहीं जिससे छुट्टा जानवरों के अंदर आने को दिक्कत बनी रहती है। कुछ दिन पूर्व एक सरकारी आवास बनाए जाने की मंजूरी मिली थीं। करोना काल के चलते वह कार्य भी पिछले छ: माह से बंद चल रहा है।