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गोंडा: आठ महीनों से जांच सेंटरों पर नहीं हुई छापामार कार्रवाई
Sun, 19 Feb 2023 12:09 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Sun, 19 Feb 2023 12:09 AM IST
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गोंडा। जिले में मानकविहीन अपंजीकृत लैब को लूट करने की खुली छूट स्वास्थ्य विभाग ने ही दे रखी है। कारण यह है कि सीएमओ कार्यालय से सिर्फ 20 कदम की दूरी पर फैला अवैध जांच सेंटरों का जाल जिम्मेदारों को नहीं दिखाई पड़ रहा है। खुलेआम ये पैथालॉजी संचालक मरीजों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। आठ माह से अधिकारियों को निरीक्षण कर मानक व पंजीकरण परखने की फुरसत नहीं मिली।जिला अस्पताल के सामने स्टेशन रोड पर 29 पैथालॉजी संचालित हैं। इनमें अधिकांश मानक विहीन और बिना पंजीकरण की हैं।
बीती 30 जून 2022 को अध्यक्ष राज्य समुचित प्राधिकरण (पीसीपीएनडीटी अधिनियम) के निर्देश पर नौ जुलाई को अवैध जांच केंद्रों के खिलाफ अभियान चलाने की खानापूर्ति की गई थी। इसमें नगर मजिस्ट्रेट, व सभी उपजिलाधिकारियों ने एक साथ छापामार कार्रवाई की थी। हालांकि अभियान का भी कोई खासा असर नहीं दिखाई पड़ा। इसके बाद से स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने इन केंद्रों को कार्रवाई न करने का अक्षय वरदान दे रखा है।
इनसेट-
विभाग को नहीं पता जिले में कितनी लैब
-पैथालॉजी लैब खोलने के लिए चिकित्सा विभाग में पंजीकरण कराना अनिवार्य है। खास बात यह हैकि जिले में लैब की सही संख्या नहीं पता है। पिछले दो साल में कितनी नई लैब खुली इसकी कोई जानकारी विभाग के पास नहीं है। स्वास्थ्य विभाग में सिर्फ 30 लैब का पंजीकरण हैं, इसके अलावा कितने गैर पंजीकृत पैथालॉजी संचालित हैं, इसका कोई सर्वे अथवा रिकार्ड विभाग के पास नहीं है। इससे साफ पता चलता है कि लैब को लेकर विभाग कितना गंभीर है।
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नोटिस भेजकर की जाती है कार्रवाई
पीसीपीएनडीटी व पैथालॉजी पंजीकरण का दायित्व था, तब नियमित जांच कर अवैध सेंटरों पर नोटिस भेजकर कार्रवाई की जाती थी। अब ये जिम्मेदारी मुझसे ले ली गई। क्यों छापामार निरीक्षण नहीं हो रहा है। इसकी जानकारी मुझे नहीं है।
डॉ. टीपी जायसवाल डिप्टी सीएमओ
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बीती 30 जून 2022 को अध्यक्ष राज्य समुचित प्राधिकरण (पीसीपीएनडीटी अधिनियम) के निर्देश पर नौ जुलाई को अवैध जांच केंद्रों के खिलाफ अभियान चलाने की खानापूर्ति की गई थी। इसमें नगर मजिस्ट्रेट, व सभी उपजिलाधिकारियों ने एक साथ छापामार कार्रवाई की थी। हालांकि अभियान का भी कोई खासा असर नहीं दिखाई पड़ा। इसके बाद से स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने इन केंद्रों को कार्रवाई न करने का अक्षय वरदान दे रखा है।
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इनसेट-
विभाग को नहीं पता जिले में कितनी लैब
-पैथालॉजी लैब खोलने के लिए चिकित्सा विभाग में पंजीकरण कराना अनिवार्य है। खास बात यह हैकि जिले में लैब की सही संख्या नहीं पता है। पिछले दो साल में कितनी नई लैब खुली इसकी कोई जानकारी विभाग के पास नहीं है। स्वास्थ्य विभाग में सिर्फ 30 लैब का पंजीकरण हैं, इसके अलावा कितने गैर पंजीकृत पैथालॉजी संचालित हैं, इसका कोई सर्वे अथवा रिकार्ड विभाग के पास नहीं है। इससे साफ पता चलता है कि लैब को लेकर विभाग कितना गंभीर है।
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नोटिस भेजकर की जाती है कार्रवाई
पीसीपीएनडीटी व पैथालॉजी पंजीकरण का दायित्व था, तब नियमित जांच कर अवैध सेंटरों पर नोटिस भेजकर कार्रवाई की जाती थी। अब ये जिम्मेदारी मुझसे ले ली गई। क्यों छापामार निरीक्षण नहीं हो रहा है। इसकी जानकारी मुझे नहीं है।
डॉ. टीपी जायसवाल डिप्टी सीएमओ