फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gonda News ›   One million farmers left farming

एक लाख किसानों ने छोड़ी खेतीबाड़ी

Fri, 11 Dec 2015 11:11 PM IST
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 11 Dec 2015 11:11 PM IST
विज्ञापन
अनाज की पैदावार को लेकर आने वाला समय खतरनाक साबित हो सकता है। विभागीय उपेक्षा व मौसम की बेरुखी ने जिले में एक दशक में 1.08 लाख किसानों की संख्या कम कर दी है। अब इसका सीधा असर खेती किसानी पर पड़ने जा रहा है।
विज्ञापन


यदि समय रहते इस ओर जरूरी कदम न उठाए गए तो वह दिन दूर नहीं जब जिले के लोगों को अनाज के लिए तरसना पड़ेगा। ये बातें किसी और की नहीं बल्कि विभागीय आंकड़े खुद गवाही दे रहे हैं।
विज्ञापन


जिले में रबी सीजन में गेहूं, मटर, चना, सरसों, जौं, मसूर व खरीफ सीजन में धान, मक्का, अरहर, उरद, तिल और जायद में सब्जी की खेती के लायक करीब चार लाख हेक्टेयर जमीन है।
विज्ञापन
विज्ञापन


जिले में एक दौर था, जब किसानों की तादाद 4.65 लाख थी, अब उनकी संख्या 3.57 बची है। पिछले 10 साल में 1.08 लाख किसान कम हो गए हैं।

महंगी लागत लगा कर खेती करने वाले किसानों को उनकी उपज का वाजिब मूल्य न मिलना, विभागीय उपेक्षा से शासन की ओर से चलायी जा रहीं योजनाओं का समुचित लाभ न मिलना, पिछले कई सालो से मौसम की बेरुखी से फसलों की होने वाली क्षति को रोकने या फिर इस क्षति से किसानों को उबारने के लिए मजबूत पारदर्शी व भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था न बनाए जाने से किसानों के हौसलों को झटका लगा है।

इससे मजबूर होकर ज्यादातर किसानों ने खेती छोड़कर अन्य व्यवसाय कर लिया है।

पहले किसानों की संख्या -     4.65 लाख
अब किसानों की संख्या -         3.57 लाख
कुल घटे किसानों की संख्या-     1.08 लाख

हालात से आहत किसानों ने बदल दिया रास्ता
झंझरी ब्लॉक क्षेत्र के किसान घनश्याम ने खेती करने के दौरान बैंक से कर्ज लिया था। लेकिन धीरे-धीरे कर्ज की रकम बढ़ गई। परेशान होकर उन्हें अपना डेढ़ एकड़ खेत बेचना पड़ा। आज वह मामूली कार्य कर अपनी जीविका चला रहे हैं।

झंझरी ब्लॉक क्षेत्र के ही राजेंद्र तिवारी के  पास करीब आठ बीघा खेत था। खेती में लगातार हो रहे घाटे व परेशानी के कारण उनका पूरा खेत बिक गया। आज वे लखनऊ में मजदूरी कर रहे हैं। बताया जाता है कि वे पहले गांव के अच्छे किसान माने जाते थे।


किसान को अपनी उपज को अपनी लागत के मुताबिक बेचने की व्यवस्था नहीं है। किसानों को अपनी उपज को मूल्य समर्थन योजना के तहत बेचना पड़ रहा है।

लेकिन सरकार की लचर धान खरीद नीति से पिछले कई साल से किसानों को मूल्य समर्थन योजना का भी लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसकी नजीर आज की धान खरीद में दिखाई पड़ रही है। जिले में 48 क्रय केंद्र खोले गए हैं, लेकिन कहीं भी खरीद नहीं हो रही है।

गल्ला मंडी में दो क्रय केंद्र खुले हैं, लेकिन दोनों पर किसान धान की खामियां बता कर लौटाए जा रहे हैं। ऐसे में किसानों को अपना धान मंडी में व्यापारियों व गांव के बिचौलियों को 900 से 1000 रुपये प्रति क्विंटल बेचना पड़ रहा है।

किसानों को खाद की दुकानदारों को महंगी कीमत चुकानी पड़ रही है। जिले के 144 साधन सहकारी समितियाें पर न तो पूरे समय कर्मचारी बैठते हैं और न ही खाद की उपलब्धता रहती है।

ऐसे में बाजार से किसानों को मंहगे रेट पर खाद खरीदनी पड़ रही है। एक बोरा खाद के पीछे किसानों को 50 से 100 अधिक देने पड़ रहे हैं।


बैंकों के केसीसी ने किसानों को कर्जदार बना दिया है। जिले में करीब दो लाख किसानों का केसीसी कार्ड बना हुआ है। इसमें किसान को फसली सीजन के हिसाब से बैंक कर्ज देते हैं। लेकिन महंगाई के चलते खेती की बढ़ती लागत व मौसम की मार ने किसानों की इनकम खत्म कर दी।

ऐसे में किसान बैंक की किस्त जमा करने में मजबूर होने लगे। अब हाल यह हुआ कि धीरे-धीरे किसान किस्त न दे पाने से बैंकों के बड़े बकाएदार बन गए।

इस बाबत किसान शत्रोहन यादव का कहना है कि सूखे व कीट प्रकोप से धान, गेहूं के अलावा नकदी फसल गन्ने की खेती ने झटका दिया। ऐसे में बैंक की किस्त नहीं जमा कर पा रहे हैं। किसानों को मजदूर बनाने में बैंकों का भी हाथ रहा।

पिछले रबी सीजन में बेमौसम आए आंधी-तूफान और तेज बारिश से गेहूं, सरसों, मसूर आदि की फसल चौपट हो गई थी। फसलों के नुकसान के सदमे में आकर कई किसानों की मौत हो गई थी।

जिले के करीब 10 हजार किसानों को भारी नुकसान हुआ था। वहीं इस बार खरीफ में सूखे ने धान, मक्के आदि की फसल को खराब कर दिया। इससे किसानों को काफी नुकसान हुआ। आज तक किसानों को राहत नहीं मिली है। ऐसे में किसानों में नाराजगी है।

जिले की चीनी मिलें भी किसानों को रुला रही हैं। जिले की बजाज हिंदुस्तान, मैजापुर व मनकापुर चीनी मिलें किसानों का अभी भी 36.36 करोड़ रुपये दबाए बैठी हैं। किसान परेशान हैं।

सरकार व मिल मालिकानों की साठगांठ से एक साल बाद भी सभी किसानों को गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं मिल सका है। यही वजह रही कि इस बार जिले में 7,259 हेक्टेयर गन्ना रकबा घट गया है।


जिले में पहले किसानों की संख्या 4.65 लाख थी, लेकिन अब किसानों की संख्या घटकर 3.57 हो गई है। जनगणना के आधार पर आई रिपोर्ट में जिले में करीब 1.08 लाख किसान घटे हैं।

इसकी वजह कईं हो सकती हैं। फिलहाल जिले के किसानों को विभाग की ओर से शासन की ओर से संचालित योजनाओं का लाभ दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।
-श्रवण कुमार, उप कृषि निदेशक गोंडा
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed