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10 साल से बिना अरेजमेंट हो रहा कचरे का मैनेजमेंट
Amarujala
Updated Mon, 08 May 2017 11:20 PM IST
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देश के सबसे गंदे शहरों में शुमार होने वाले गोंडा जिले की इस हालत के लिए जितना दोषी आम लोग हैं, उतसे कहीं ज्यादा दोषी यहां के अधिकारी भी रहे हैं। जिन्होंने शहर को साफ-सुथरा रखने के लिए आज तक कचरा निस्तारण की कोई ऐसी ठोस योजना नहीं बनाई।
जिससे रोज के रोज गोंडा शहर से निकलने वाले 80 टन कचरे को ठिकाने लगाया जा सके। यहां तक कि 3 साल पहले जो पैसा शहर के सभी 27 वार्डों में कूड़ाघर बनाए जाने के लिए पालिका को दिया गया था। वह भी हजम हो गया।
3 साल पहले वर्ष 2014 में गोंडा आए विश्वबैंक के अधिकारियों ने शहर से रोजाना निकलने वाले कूड़े के प्रबंधन के बाबत पालिका के अधिकारियों से सवाल-जवाब करते हुए उनसे इसके निस्तारण के लिए कार्ययोजना मांगी थी। जो आज तक नहीं दी गई।
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ऊपर से शहर के बाहर जिस पूरेशिवा बख्तावर गांव में नगर पालिका की ओर से कूड़ा डंप किया जाता है। वह जगह भी पूरी तरह से कूड़े के ढेर से पट चुकी है। ऐसे में शहर से रोज निकलने वाले 80 टन कचरे का निस्तारण करने के बजाए उसे या तो तालाबों में पाट दिया जाता है या फिर नालों व नालियों में।
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जिससे रोज के रोज गोंडा शहर से निकलने वाले 80 टन कचरे को ठिकाने लगाया जा सके। यहां तक कि 3 साल पहले जो पैसा शहर के सभी 27 वार्डों में कूड़ाघर बनाए जाने के लिए पालिका को दिया गया था। वह भी हजम हो गया।
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3 साल पहले वर्ष 2014 में गोंडा आए विश्वबैंक के अधिकारियों ने शहर से रोजाना निकलने वाले कूड़े के प्रबंधन के बाबत पालिका के अधिकारियों से सवाल-जवाब करते हुए उनसे इसके निस्तारण के लिए कार्ययोजना मांगी थी। जो आज तक नहीं दी गई।
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ऊपर से शहर के बाहर जिस पूरेशिवा बख्तावर गांव में नगर पालिका की ओर से कूड़ा डंप किया जाता है। वह जगह भी पूरी तरह से कूड़े के ढेर से पट चुकी है। ऐसे में शहर से रोज निकलने वाले 80 टन कचरे का निस्तारण करने के बजाए उसे या तो तालाबों में पाट दिया जाता है या फिर नालों व नालियों में।