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Gonda News: ताले में बंद दिल की जांच
Wed, 29 Jan 2025 11:10 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
संवाद न्यूज एजेंसी, गोंडा
Updated Wed, 29 Jan 2025 11:10 PM IST
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गोंडा। दिल की जांच करने वाली मशीन ताले में बंद है। ठंड के मौसम में मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन 30 से 40 मरीज हृदय की समस्या लेकर आ रहे हैं, लेकिन इन्हें जांच की सुविधा नहीं मिल पा रही है। दिल की जांच करने वाली टू-डी ईको मशीन छह महीने से ताले में बंद है। जिम्मेदार बताते हैं कि मशीन में तकनीकी खराबी आ गई है। टेक्नीशियन की तैनाती भी नहीं है। इस वजह से मरीजों को बाहर से टू-डी ईको जांच करानी पड़ रही है।
कोरोना संक्रमण के दौरान कोविड अस्पताल के लिए अत्याधुनिक टू-डी ईको मशीन खरीदी गई थी लेकिन, हृदयरोग विशेषज्ञ की तैनाती न होने के कारण मशीन चालू नहीं हो सकी। जिला अस्पताल के मेडिकल कॉलेज में तब्दील होने के बाद कोविड बिल्डिंग में मेडिसिन विभाग शुरू किया गया। इसमें विभागाध्यक्ष डॉ. एजाज अहमद ने मशीन का संचालन भी शुरू किया।
टेक्नीशियन न होने के कारण वह खुद ही हृदय रोगियों की जांच करते थे। मशीन में तकनीकी खराबी आ गई और उसे ताले में बंद कर दिया गया। करीब छह महीने से इस जीवन रक्षक मशीन का उपयोग नहीं हो पा रहा है।
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दिल की बीमारी जानने के लिए टू-डी ईको जरूरी
डॉ. एजाज अहमद ने बताया कि टू-डी ईको कार्डियोग्राफी का प्रयोग दिल की संरचनाओं की वास्तविक गति को देखने के लिए किया जाता है। हृदय की 60 प्रतिशत से अधिक पंपिंग होने पर सामान्य माना जाता है, जबकि 40 प्रतिशत पंपिंग पर दिल में दिक्कत होना बताया जाता है। 30 प्रतिशत से कम होने पर हार्ट अटैक की आशंकाएं बढ़ जाती हैं। इस जांच में दो से तीन मिनट का समय लगता है। टीएमटी में व्यक्ति को ट्रेड-मिल मशीन पर तेजी के साथ लगभग 5 से 10 मिनट चलाया जाता है। टेस्ट के दौरान धीरे-धीरे मशीन की स्पीड व एंगल बढ़ाते हैं। इस दौरान मरीज का ईसीजी मॉनिटर किया जाता है। यदि शुरू व बाद की ईसीजी में काफी अंतर पाया जाए तो टेस्ट को पॉजिटिव माना जाता है।
मशीन में तकनीकी खराबी के कारण नहीं हो पा रही जांच
टू-डी ईको मशीन में तकनीकी खराबी आ गई है और टेक्नीशियन की नियुक्ति भी नहीं है। इस कारण जांच नहीं हो पा रही है। प्राचार्य को पत्र लिखकर मशीन की मरम्मत कराने व टेक्नीशियन की नियुक्ति किए जाने की मांग की गई है।
-- डॉ. एजाज अहमद, विभागाध्यक्ष मेडिसिन
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कोरोना संक्रमण के दौरान कोविड अस्पताल के लिए अत्याधुनिक टू-डी ईको मशीन खरीदी गई थी लेकिन, हृदयरोग विशेषज्ञ की तैनाती न होने के कारण मशीन चालू नहीं हो सकी। जिला अस्पताल के मेडिकल कॉलेज में तब्दील होने के बाद कोविड बिल्डिंग में मेडिसिन विभाग शुरू किया गया। इसमें विभागाध्यक्ष डॉ. एजाज अहमद ने मशीन का संचालन भी शुरू किया।
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टेक्नीशियन न होने के कारण वह खुद ही हृदय रोगियों की जांच करते थे। मशीन में तकनीकी खराबी आ गई और उसे ताले में बंद कर दिया गया। करीब छह महीने से इस जीवन रक्षक मशीन का उपयोग नहीं हो पा रहा है।
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दिल की बीमारी जानने के लिए टू-डी ईको जरूरी
डॉ. एजाज अहमद ने बताया कि टू-डी ईको कार्डियोग्राफी का प्रयोग दिल की संरचनाओं की वास्तविक गति को देखने के लिए किया जाता है। हृदय की 60 प्रतिशत से अधिक पंपिंग होने पर सामान्य माना जाता है, जबकि 40 प्रतिशत पंपिंग पर दिल में दिक्कत होना बताया जाता है। 30 प्रतिशत से कम होने पर हार्ट अटैक की आशंकाएं बढ़ जाती हैं। इस जांच में दो से तीन मिनट का समय लगता है। टीएमटी में व्यक्ति को ट्रेड-मिल मशीन पर तेजी के साथ लगभग 5 से 10 मिनट चलाया जाता है। टेस्ट के दौरान धीरे-धीरे मशीन की स्पीड व एंगल बढ़ाते हैं। इस दौरान मरीज का ईसीजी मॉनिटर किया जाता है। यदि शुरू व बाद की ईसीजी में काफी अंतर पाया जाए तो टेस्ट को पॉजिटिव माना जाता है।
मशीन में तकनीकी खराबी के कारण नहीं हो पा रही जांच
टू-डी ईको मशीन में तकनीकी खराबी आ गई है और टेक्नीशियन की नियुक्ति भी नहीं है। इस कारण जांच नहीं हो पा रही है। प्राचार्य को पत्र लिखकर मशीन की मरम्मत कराने व टेक्नीशियन की नियुक्ति किए जाने की मांग की गई है।