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बिना प्रशिक्षण कराया जा रहा प्रसव
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सीएचसी बेलसर का मुख्य गेट।
- फोटो : GONDA
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बेलसर (गोंडा)। महिलाओं की सेहत से उपकेंद्रों पर खिलवाड़ हो रहा है। बिना प्रशिक्षण के ही केंद्रों पर एएनएम की तैनाती कर दी गई है। ऐसे में महिलाओं के संस्थागत प्रसव अप्रशिक्षित कर्मियों के हाथों से हो रहा है और इससे महिलाओं की सेहत प्रभावित हो रही हैं।
महिलाओं को लेकर प्रशासन की ओर से संजीदगी बरती जा रही है, लेकिन उनके सेहत के मामले में ऐसी लापरवाही से प्रसूता महिलाओं के साथ ही उनके बच्चों का जीवन असुरक्षित है। फिलहाल स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सकों का दावा है कि उपकेंद्रों पर प्रसव की बेहतर सुविधाएं देने की व्यवस्था हो रही है, स्थिति गंभीर होने पर सीएचसी पर सुविधा मुहैय्या कराई जा रहा है।
महिलाओं के बेहतर स्वास्थ्य के लिए सरकार की ओर से संचालित योजनाओं में लापरवाही होने से समस्या बढ़ती जा रही है। प्रसव केन्द्रों पर बिना प्रशिक्षण के ही तैनाती देकर प्रसव का कार्य कराए जाने से महिलाओं की सेहत पर खतरा बराकर बना हुआ है। सीएचसी बेलसर क्षेत्र के प्रसूता केन्द्र डिक्सिर, उमरी में संचालित है।
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हाल ही में माधवपुर, पकड़ी में भी केंद्र की शुरुआत हो गई है। संसाधन की कमी के कारण महिलाएं अप्रशिक्षित हाथों से प्रसव कराती थीं। जिसके कारण तमाम महिलाओं व बच्चों की मौत हो जाती थी। इन पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने जनसंख्या व दूरी के हिसाब से प्रसव केंद्र संचालित किया गया। हर केंद्र पर एनएम की तैनाती कर दी ग्रई।
अब 1000 से 1500 की आबादी पर आशा व संगिनी की तैनात है। आशा गांव-गांव परिवार नियोजन व सुरक्षित प्रसव की जानकारी गर्भवती महिलाओं को देती हैं। साथ ही प्रसव के समय केंद्र तक साथ जाती हैं। एक प्रसव पर आशा को सरकार की ओर से 600 रुपया प्रोत्साहन राशि भी देती है। अप्रशिक्षित हाथों प्रसव कराए जाने से लोग केन्द्रों पर आने से अब कतरा रहे हैं। जिससे प्रसव के मामले बहुत कम हो गए हैं। बेलसर क्षेत्र के डिक्सिर, माधवपुर, पकड़ी, उमरी केंद्रों पर तैनात एएनएम को विभाग से प्रसव कराने का कोई प्रशिक्षण नहीं दिया गया है।
यह बात अलग है कि इन केंद्रों पर कुछ मामलों को यदि छोड़ दिया जाए तो कोई अनहोनी की घटना नहीं हुई है। इस संबंध में बीसीपीएम केशरी प्रसाद ने बताया कि चारो केंद्रों पर तैनात एएनएम को विभाग से कोई प्रशिक्षण नहीं दिया गया है। नियम के अनुसार प्रसव कराने का प्रशिक्षण जिला महिला चिकित्सालय में सीएमएस के अधीन रहकर छ माह के लिए होना चाहिए। बताया कि डिलेवरी में कभी कभी खून की कमी हो जाती है, इसलिए इसके लिए कम से कम सीएचसी पर एक ब्लड बैंक बनाया जाना चाहिए। जिससे लोग ब्लड दे भी सके तथा जरूरत पड़ने पर ले भी सके।
स्वास्थ्य क्षेत्र की स्थिति पर एक नजर
सीएचसी क्षेत्र की जनसंख्या - 239310
डिलेवरी का लक्ष्य - 7100
प्रसव केन्द्र- डिकसिर, माधवपुर, उमरी, पकड़ी
आशा - 203
संगिनी - 07
एएनएम - 24
प्रसव के दौरान घटनाएं- 02
चार केंद्रों पर प्रसव की व्यवस्था की गई है जिससे महिलाओं को उनके आसपास सुविधा मिल सके। एएनएम को सुरक्षित प्रसव की जानकारी दी गई है। सीएचसी पर प्रसव की पूरी व्यवस्था है।
- डॉ. मेराज अहमद, अधीक्षक सीएचसी बेलसर
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महिलाओं को लेकर प्रशासन की ओर से संजीदगी बरती जा रही है, लेकिन उनके सेहत के मामले में ऐसी लापरवाही से प्रसूता महिलाओं के साथ ही उनके बच्चों का जीवन असुरक्षित है। फिलहाल स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सकों का दावा है कि उपकेंद्रों पर प्रसव की बेहतर सुविधाएं देने की व्यवस्था हो रही है, स्थिति गंभीर होने पर सीएचसी पर सुविधा मुहैय्या कराई जा रहा है।
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महिलाओं के बेहतर स्वास्थ्य के लिए सरकार की ओर से संचालित योजनाओं में लापरवाही होने से समस्या बढ़ती जा रही है। प्रसव केन्द्रों पर बिना प्रशिक्षण के ही तैनाती देकर प्रसव का कार्य कराए जाने से महिलाओं की सेहत पर खतरा बराकर बना हुआ है। सीएचसी बेलसर क्षेत्र के प्रसूता केन्द्र डिक्सिर, उमरी में संचालित है।
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हाल ही में माधवपुर, पकड़ी में भी केंद्र की शुरुआत हो गई है। संसाधन की कमी के कारण महिलाएं अप्रशिक्षित हाथों से प्रसव कराती थीं। जिसके कारण तमाम महिलाओं व बच्चों की मौत हो जाती थी। इन पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने जनसंख्या व दूरी के हिसाब से प्रसव केंद्र संचालित किया गया। हर केंद्र पर एनएम की तैनाती कर दी ग्रई।
अब 1000 से 1500 की आबादी पर आशा व संगिनी की तैनात है। आशा गांव-गांव परिवार नियोजन व सुरक्षित प्रसव की जानकारी गर्भवती महिलाओं को देती हैं। साथ ही प्रसव के समय केंद्र तक साथ जाती हैं। एक प्रसव पर आशा को सरकार की ओर से 600 रुपया प्रोत्साहन राशि भी देती है। अप्रशिक्षित हाथों प्रसव कराए जाने से लोग केन्द्रों पर आने से अब कतरा रहे हैं। जिससे प्रसव के मामले बहुत कम हो गए हैं। बेलसर क्षेत्र के डिक्सिर, माधवपुर, पकड़ी, उमरी केंद्रों पर तैनात एएनएम को विभाग से प्रसव कराने का कोई प्रशिक्षण नहीं दिया गया है।
यह बात अलग है कि इन केंद्रों पर कुछ मामलों को यदि छोड़ दिया जाए तो कोई अनहोनी की घटना नहीं हुई है। इस संबंध में बीसीपीएम केशरी प्रसाद ने बताया कि चारो केंद्रों पर तैनात एएनएम को विभाग से कोई प्रशिक्षण नहीं दिया गया है। नियम के अनुसार प्रसव कराने का प्रशिक्षण जिला महिला चिकित्सालय में सीएमएस के अधीन रहकर छ माह के लिए होना चाहिए। बताया कि डिलेवरी में कभी कभी खून की कमी हो जाती है, इसलिए इसके लिए कम से कम सीएचसी पर एक ब्लड बैंक बनाया जाना चाहिए। जिससे लोग ब्लड दे भी सके तथा जरूरत पड़ने पर ले भी सके।
स्वास्थ्य क्षेत्र की स्थिति पर एक नजर
सीएचसी क्षेत्र की जनसंख्या - 239310
डिलेवरी का लक्ष्य - 7100
प्रसव केन्द्र- डिकसिर, माधवपुर, उमरी, पकड़ी
आशा - 203
संगिनी - 07
एएनएम - 24
प्रसव के दौरान घटनाएं- 02
चार केंद्रों पर प्रसव की व्यवस्था की गई है जिससे महिलाओं को उनके आसपास सुविधा मिल सके। एएनएम को सुरक्षित प्रसव की जानकारी दी गई है। सीएचसी पर प्रसव की पूरी व्यवस्था है।
- डॉ. मेराज अहमद, अधीक्षक सीएचसी बेलसर