{"_id":"666fb70d0757f7a0bfd77987fb265e4b","slug":"je-and-dengue-will-be-examined-now-in-the-district-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब जिले में हो सकेगी जेई व डेंगू की जांच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब जिले में हो सकेगी जेई व डेंगू की जांच
गोंडा/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 04 Oct 2015 11:14 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
करनैलगंज में डेंगू बुखार से होने वाली मौतों से हरकत में आए स्वास्थ्य महकमे ने डेंगू की जांच की सुविधा जिला अस्पताल में शुरू कर दी है। साथ ही जेई (जापानी इंसेफ्लाइटिस) के मरीजों की भी जांच जिला अस्पताल में होगी। जिसके लिए हाल-फिलहाल कोई दिन जांच का निश्चित नहीं किया गया है।
सीएमएस डॉ. आशुतोष गुप्ता का कहना है कि जेई व डेंगू बुखार से पीड़ित मरीजों की जांच हफ्ते में सिर्फ एक ही दिन की जाएगी। उस दिन सारे मरीजों का ब्लड सैंपल लेकर उनकी स्लाइड तैयार की जाएगी, चूंकि इसकी जांच में काफी समय लगता है, इसलिए इसकी जांच हर रोज हो पाना संभव नहीं है।
बता दें कि अभी तक जिला अस्पताल में डेंगू व जेई बुखार की जांच नहीं की जाती थी। जिसके कारण इसके पीड़ित मरीजों को बाहर जाकर जांच के नाम पर मोटी रकम खर्च करनी पड़ती थी। हालांकि जांच में डेंगू पाजिटिव आने वाले मरीजों को अपना इलाज बाहर जाकर ही कराना होगा। क्योंकि इसकी जांच के लिए आवश्यक उपकरण जिला अस्पताल में नहीं है।
विज्ञापन
32 लाख आबादी के उपचार की जिम्मेदारी संभाल रहे गोंडा जिला अस्पताल में वैसे तो हर रोग का इलाज होता है, लेकिन डेंगू व जेई बुखार से पीड़ित मरीजों के लिए न तो यहां इलाज की कोई व्यवस्था थी, न ही जांच की।
करनैलगंज में इधर एक पखवारे के भीतर जो मौतें डेंगू से हुई हैं, उसने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की नींद उड़ा रखी है। ऐसे में डेंगू बुखार की जांच की सुविधा जिला अस्पताल को देकर निदेशालय ने इसके मरीजों की समस्या कुछ हद तक आसान कर दी है।
हालांकि जांच में डेंगू पाजिटिव रिजल्ट वाले मरीजों को अपना इलाज बाहर जाकर ही कराना होगा। क्योंकि डेंगू बुखार के इलाज के लिए जो सुविधाएं लखनऊ के अस्पतालों में हैं, उसका यहां बेहद अभाव है।
जापानी इंसेफ्लाइटिस व डेंगू बुखार की जांच के लिए बीते दिनों जिला अस्पताल में तैनात दो एलटी को लखनऊ बुलाकर ट्रेनिंग दी गई। जिसके बाद शनिवार से इसकी जांच जिला अस्पताल में शुरू भी कर दी गई। जांच के लिए जरूरी सारे उपकरण व मशीनें भी जिला अस्पताल को मुहैया करा दी गई हैं।
डेंगू बुखार से पीड़ित मरीजों के इलाज के लिए एक पत्र निदेशालय को भेजा है, जिसमें इलाज के लिए जरूरी उपकरणों की डिमांड की गई है। जैसे ही यह उपकरण मिल जाते हैं, इसके इलाज की सुविधा यहां बहाल कर दी जाएगी। जांच का दिन एक-दो दिन में वह फाइनल कर लेंगे। -डॉ. आशुतोष गुप्त, सीएमएस
विज्ञापन
सीएमएस डॉ. आशुतोष गुप्ता का कहना है कि जेई व डेंगू बुखार से पीड़ित मरीजों की जांच हफ्ते में सिर्फ एक ही दिन की जाएगी। उस दिन सारे मरीजों का ब्लड सैंपल लेकर उनकी स्लाइड तैयार की जाएगी, चूंकि इसकी जांच में काफी समय लगता है, इसलिए इसकी जांच हर रोज हो पाना संभव नहीं है।
विज्ञापन
बता दें कि अभी तक जिला अस्पताल में डेंगू व जेई बुखार की जांच नहीं की जाती थी। जिसके कारण इसके पीड़ित मरीजों को बाहर जाकर जांच के नाम पर मोटी रकम खर्च करनी पड़ती थी। हालांकि जांच में डेंगू पाजिटिव आने वाले मरीजों को अपना इलाज बाहर जाकर ही कराना होगा। क्योंकि इसकी जांच के लिए आवश्यक उपकरण जिला अस्पताल में नहीं है।
विज्ञापन
32 लाख आबादी के उपचार की जिम्मेदारी संभाल रहे गोंडा जिला अस्पताल में वैसे तो हर रोग का इलाज होता है, लेकिन डेंगू व जेई बुखार से पीड़ित मरीजों के लिए न तो यहां इलाज की कोई व्यवस्था थी, न ही जांच की।
करनैलगंज में इधर एक पखवारे के भीतर जो मौतें डेंगू से हुई हैं, उसने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की नींद उड़ा रखी है। ऐसे में डेंगू बुखार की जांच की सुविधा जिला अस्पताल को देकर निदेशालय ने इसके मरीजों की समस्या कुछ हद तक आसान कर दी है।
हालांकि जांच में डेंगू पाजिटिव रिजल्ट वाले मरीजों को अपना इलाज बाहर जाकर ही कराना होगा। क्योंकि डेंगू बुखार के इलाज के लिए जो सुविधाएं लखनऊ के अस्पतालों में हैं, उसका यहां बेहद अभाव है।
जापानी इंसेफ्लाइटिस व डेंगू बुखार की जांच के लिए बीते दिनों जिला अस्पताल में तैनात दो एलटी को लखनऊ बुलाकर ट्रेनिंग दी गई। जिसके बाद शनिवार से इसकी जांच जिला अस्पताल में शुरू भी कर दी गई। जांच के लिए जरूरी सारे उपकरण व मशीनें भी जिला अस्पताल को मुहैया करा दी गई हैं।
डेंगू बुखार से पीड़ित मरीजों के इलाज के लिए एक पत्र निदेशालय को भेजा है, जिसमें इलाज के लिए जरूरी उपकरणों की डिमांड की गई है। जैसे ही यह उपकरण मिल जाते हैं, इसके इलाज की सुविधा यहां बहाल कर दी जाएगी। जांच का दिन एक-दो दिन में वह फाइनल कर लेंगे। -डॉ. आशुतोष गुप्त, सीएमएस