फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gonda News ›   In Kargil war, victory was made by souring the teeth of enemies

कारगिल युद्ध में दुश्मनों के दांत खट्टे कर विजय बने थे मिसाल

Sun, 26 Jul 2020 09:33 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 26 Jul 2020 09:33 PM IST
विज्ञापन
In Kargil war, victory was made by souring the teeth of enemies
गोंडा। 26 जुलाई 1999 में भारत-पाक के मध्य हुए कारगिल युद्ध में भारतीय सेना ने दुश्मनों के दांत खट्टे कर दिए थे। फतह कर पाकिस्तान को उसकी हैसियत दिखा दी थी। इस युद्ध के नायकों में गोंडा के ऐली परसौली निवासी विजय सिंह भी बतौर सैनिक शामिल थे। गोली लगने के बावजूद अपनी टूटती सांस की परवाह किए बिना विजय दुश्मनों को आंखें दिखाते रहे और गोलियों से दुश्मनों पर वार करते रहेे।
विज्ञापन

जिले के बेलसर ब्लॉक के ऐली परसौली गांव में जन्मे विजय सिंह उस वक्त बारामूला में 16 ग्रेनेडियर रेजीमेंट में बतौर नायक तैनात रहे। एमएमजी, एजीएल व एके-47 का प्रशिक्षण प्राप्त विजय सिंह को यूनिट के साथ द्रास सेक्टर भेजा गया। विजय सिंह कहते हैं कि नौ जून 1999 में कश्मीर में कारगिल युद्ध शुरू हुआ। युद्ध के दौरान पता चला कि पाकिस्तानी फौज ने कारगिल सहित कश्मीर की 15 पहाड़ियों पर कब्जा कर लिया है। पाक के इस नापाक इरादों की जानकारी होते ही फौज की सभी यूनिटों को एलर्ट कर दिया गया और जगह-जगह पहाड़ियों पर जवानों को भेज दिया गया।
विज्ञापन

ताबडतोड़ सात बार पाक सैनिकों पर जलाई थी गोलियां
विजय सिंह ने बताया कि कश्मीर में कारगिल सबसे ऊंची पहाड़ियों में है। जब लड़ाई शुरू हुई तो कमांडिंग आफीसर व दल नायक मेजर अजीत सिंह के नेतृत्व में उनकी यूनिट ने चढ़ाई शुरू कर दी। विजय सिंह कहते हैं कि एक माह की लड़ाई में उनके यूनिट के 12 जवान शहीद हो गए और 22 जवान जख्मी हुए। बकौल विजय सिंह 5100 नंबर की पहाड़ी पर निर्णायक युद्ध चल रहा था। पहाड़ी के नीचे उनके यूनिट के जवान फायरिंग कर रहे थे और पहाड़ी पर चढ़ रहे थे। उनके बगल कवर फायरिंग के लिए इलाहाबाद का जवान अमर बहादुर भी था। विजय ने बताया कि इसी बीच उनके दाहिने पैर में गोली लग गई, लेकिन उन्हें महसूस नहीं हुआ। थोड़ी देर बाद पैर मेें चिपचिपाहट महसूस हुई। इसके बावजूद लड़ाई जारी रही और सात बार दुश्मनों पर फायर किया, लेकिन पैर में गोली लगने से हुए रक्तस्राव से उनकी आंख के सामने अंधेरा छाने लगा। इसके बावजूद विजय अन्य जवानों के साथ युद्ध में जुट रहे। विजय कहते हैं कि युद्ध के दौरान दुश्मनों की ओर से निकली गोली विजय के कमर में जा लगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

दो गोली व बम के टुकड़ों से छलनी था शरीर पर हिम्मत नहीं हारी
दो गोलियां व बम के टुकड़े लगने से पूरा शरीर छलनी था। आंखों के आगे अंधेरा छा रहा था जैसे वे मुकम्मल नींद पाने के लिए बोझिल हो रही हों कि अचानक किसी ने हाथ में कुछ थमाया और फिर कान मेें एक साथी की फुसफुसाहट सुनाई पड़ी कि विजय सर आपके हाथ में ग्रेनेड रखकर उसका पिन खोल दे रहा हूं, जैसे ही दुश्मन आपको हाथ लगाएगा वह नहीं बच पाएगा। यह गाथा है 21 साल पहले हुए कारगिल के उस युद्ध की जिसने यहां के निवासी सैनिक विजय सिंह को विजय सिंह कारगिल बना दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed